मध्य प्रदेश

स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, खुद के राजस्व स्रोत विकसित करें: पवैया

Kavita2
10 Sept 2026 10:40 AM IST
स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, खुद के राजस्व स्रोत विकसित करें: पवैया
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इंदौर। छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की ग्रांट पर पूरी तरह निर्भर रहने की प्रवृत्ति से बाहर आना होगा। स्थानीय निकायों को अपनी जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप खुद के राजस्व स्रोत विकसित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे न केवल उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ेगी।

बुधवार को इंदौर दौरे के दौरान कमिश्नर कार्यालय में आयोजित डिविजनल लेवल की बैठक को संबोधित करते हुए पवैया ने कहा कि स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को मजबूत करने के लिए वित्तीय आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। पंचायतों और नगरीय निकायों को अपने क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए आय के नए माध्यम तलाशने होंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय यदि अपने राजस्व में वृद्धि करते हैं तो विकास कार्यों के लिए उन्हें बाहरी वित्तीय सहायता पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।

जमीनी जरूरतों के आधार पर होंगी सिफारिशें

पवैया ने कहा कि छठा राज्य वित्त आयोग स्थानीय निकायों से संबंधित अपनी सिफारिशें केवल आंकड़ों या कागजी रिपोर्ट के आधार पर तैयार नहीं करेगा। आयोग की सिफारिशों में पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की वास्तविक जरूरतों, स्थानीय परिस्थितियों और जमीनी अनुभवों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से जानकारी और सुझाव लिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र की परिस्थितियां अलग होती हैं। किसी निकाय के सामने राजस्व जुटाने की चुनौती हो सकती है, तो किसी अन्य क्षेत्र में विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में सभी स्थानीय निकायों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू करने के बजाय उनकी वास्तविक स्थिति को समझना आवश्यक है।

राजस्व बढ़ाने के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे

आयोग के अध्यक्ष ने स्थानीय निकायों को अपने राजस्व स्रोतों की समीक्षा करने और उनमें सुधार की संभावनाएं तलाशने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पंचायतों और नगरीय निकायों के पास उपलब्ध संसाधनों से किस तरह अधिक राजस्व अर्जित किया जा सकता है, इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

उन्होंने स्थानीय स्तर पर कर संग्रह, शुल्क और अन्य वैध आय के स्रोतों को व्यवस्थित करने पर जोर दिया। साथ ही यह भी जरूरी बताया कि राजस्व बढ़ाने की प्रक्रिया ऐसी हो, जिससे आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

स्थानीय अनुभवों को मिलेगा महत्व

पवैया ने कहा कि वित्त आयोग का उद्देश्य केवल राशि के वितरण की व्यवस्था तय करना नहीं है, बल्कि स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाना भी है। इसके लिए स्थानीय निकायों की समस्याओं और उनके अनुभवों को समझना जरूरी है। डिविजन स्तर की बैठकों के माध्यम से आयोग अधिकारियों से सीधे संवाद कर रहा है, ताकि क्षेत्र विशेष की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी मिल सके।

उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति, राजस्व संग्रह और विकास कार्यों से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। साथ ही ऐसे विषयों पर भी चर्चा की गई, जिनका स्थानीय निकायों की आर्थिक क्षमता और विकास गतिविधियों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

विकास के लिए मजबूत वित्तीय आधार जरूरी

बैठक में यह बात भी सामने आई कि स्थानीय स्तर पर सड़क, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए पंचायतों और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत होना आवश्यक है। यदि स्थानीय संस्थाओं के पास पर्याप्त और नियमित आय के साधन होंगे, तो वे अपने क्षेत्र की प्राथमिकताओं के अनुसार विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू कर सकेंगे।

पवैया ने कहा कि वित्तीय संसाधनों का उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। स्थानीय निकायों को यह तय करने की क्षमता मिलनी चाहिए कि उनके क्षेत्र में किन कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ जवाबदेही और पारदर्शिता भी जरूरी है।

अधिकारियों ने साझा की जानकारी

डिविजनल लेवल की बैठक में इंदौर के डिविजनल कमिश्नर भास्कर लक्षकार, आयोग के सदस्य केके सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, आयोग के सदस्य सचिव वीरेंद्र कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान स्थानीय निकायों से जुड़े विभिन्न वित्तीय और प्रशासनिक विषयों पर चर्चा की गई।

आयोग के पदाधिकारियों ने अधिकारियों से स्थानीय निकायों की मौजूदा स्थिति, उनकी आवश्यकताओं और सामने आ रही चुनौतियों के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने भी क्षेत्रीय स्तर पर स्थानीय निकायों के सामने आने वाली समस्याओं और विकास कार्यों से संबंधित विषयों को आयोग के समक्ष रखा।

आत्मनिर्भर निकायों से मजबूत होगा स्थानीय शासन

छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय अपनी वित्तीय क्षमता विकसित करनी होगी। स्थानीय स्तर पर राजस्व के स्थायी स्रोत तैयार होने से निकाय न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि अपने क्षेत्र की विकास प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे।

आयोग द्वारा जमीनी वास्तविकताओं और स्थानीय अनुभवों के आधार पर सिफारिशें तैयार किए जाने से उम्मीद है कि आने वाले समय में पंचायतों और नगरीय निकायों की वित्तीय जरूरतों को अधिक प्रभावी तरीके से संबोधित किया जा सकेगा। इससे स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को मजबूत करने और उन्हें विकास की प्रक्रिया में अधिक सक्षम भागीदार बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।

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