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40 साल सेवा के बाद हेडमास्टर करण सिंह सिंदल की भावुक विदाई

पीपलरावां (मध्य प्रदेश) : सरकारी बॉयज प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर करण सिंह सिंदल की सेवानिवृत्ति का दिन यादगार बन गया। करीब चार दशक तक जिस स्कूल में उन्होंने शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं, उसी स्कूल से उन्होंने अपनी अंतिम विदाई ली। खास बात यह रही कि सिंदल ने अपने जीवन के लगभग 40 साल उसी विद्यालय को समर्पित किए, जहां से उन्होंने खुद अपनी प्राथमिक शिक्षा हासिल की थी।
शुक्रवार को रिटायरमेंट के मौके पर करण सिंह सिंदल परिवार के साथ सजी-धजी बग्घी में स्कूल पहुंचे। उनके पहुंचने का अंदाज किसी समारोह से कम नहीं था। स्कूल परिसर में पहुंचने के बाद उन्होंने अपने पुराने शिक्षकों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।
सिंदल के लिए यह अवसर भावनाओं से भरा हुआ था, क्योंकि जिस संस्थान से उनके शैक्षणिक जीवन की शुरुआत हुई थी, वहीं से उन्होंने अपने शिक्षक जीवन का समापन किया। इस दौरान स्कूल के शिक्षक, छात्र और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे और उन्होंने हेडमास्टर को सम्मानपूर्वक विदाई दी।
विदाई समारोह के दौरान करण सिंह सिंदल ने छात्रों को स्टडी किट भी वितरित कीं। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और उनका भविष्य हमेशा उनकी प्राथमिकता रहा है। छात्रों के साथ उनका रिश्ता केवल एक शिक्षक और विद्यार्थी का नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और परिवार जैसा रहा।
समारोह का सबसे भावुक पल तब आया, जब सिंदल ने अपने पुराने शिक्षकों को विशेष सम्मान देते हुए उन्हें अपने विदाई जुलूस में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने इच्छा जताई कि जिन शिक्षकों ने उन्हें शिक्षा दी और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, वे उनकी इस अंतिम यात्रा के खास मौके का हिस्सा बनें।
इसके बाद शहर की मुख्य सड़कों से बग्घी में उनका जुलूस निकाला गया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने जगह-जगह रुककर उनका स्वागत किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों ने भी उनकी लंबी सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें सम्मान दिया।
जुलूस के दौरान स्कूल के छात्रों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपने प्रिय शिक्षक को विदाई दी। बच्चों की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को भावुक और यादगार बना दिया।
करण सिंह सिंदल का स्कूल के साथ रिश्ता बेहद पुराना रहा है। उन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर शिक्षक और फिर हेडमास्टर के रूप में इसी संस्थान को करीब से देखा। चार दशक की सेवा के दौरान उन्होंने कई पीढ़ियों के छात्रों को शिक्षा दी और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षा क्षेत्र में लंबे समय तक काम करने वाले सिंदल ने न केवल पाठ्यक्रम की पढ़ाई पर ध्यान दिया, बल्कि छात्रों के व्यक्तित्व विकास और अनुशासन पर भी जोर दिया। उनके सहयोगियों के अनुसार, वह हमेशा छात्रों के हित को सबसे ऊपर रखते थे और विद्यालय के विकास के लिए लगातार प्रयास करते रहे।
स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों ने कहा कि सिंदल की कार्यशैली और समर्पण हमेशा प्रेरणादायक रहेगा। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यों से विद्यालय में सकारात्मक माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्थानीय लोगों के लिए भी सिंदल की विदाई एक खास अवसर था। उनका मानना है कि किसी शिक्षक का चार दशक तक एक ही संस्थान से जुड़े रहना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया और समाज में एक अलग पहचान बनाई।
सिंदल की विदाई ने यह संदेश भी दिया कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक शिक्षक का प्रभाव कई पीढ़ियों तक बना रहता है।
रिटायरमेंट के बाद भी करण सिंह सिंदल ने शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जारी रखने की इच्छा जताई। उनके लिए यह यात्रा केवल नौकरी का हिस्सा नहीं थी, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण मिशन थी।
चार दशक की सेवा के बाद जब उन्होंने स्कूल को अलविदा कहा, तो यह केवल एक कर्मचारी की विदाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसे शिक्षक का सम्मान था जिसने अपना पूरा जीवन बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में लगा दिया।
करण सिंह सिंदल की यह विदाई स्थानीय लोगों, छात्रों और शिक्षकों के लिए लंबे समय तक यादगार रहेगी।





