मध्य प्रदेश

BRICS समिट में सांस्कृतिक सहयोग पर चर्चा

Kavita2
6 Aug 2026 1:03 PM IST
BRICS समिट में सांस्कृतिक सहयोग पर चर्चा
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भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित BRICS कल्चरल समिट 2026 के दूसरे दिन गुरुवार को सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने और साझा विरासत को बढ़ावा देने से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों, अधिकारियों और संस्कृति क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

समिट के दूसरे दिन की मुख्य चर्चा ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों के प्रस्तावित घोषणा-पत्र के मसौदे पर केंद्रित रही। इसके अलावा सांस्कृतिक सहयोग के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना तथा साझा पहलों के लिए एक प्रभावी रोडमैप तैयार करना है।

बैठक में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संग्रहालयों के विकास, रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने और देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा की। अधिकारियों ने माना कि संस्कृति विभिन्न देशों के लोगों को जोड़ने का एक मजबूत माध्यम है और इसके जरिए आपसी समझ और सहयोग को बढ़ाया जा सकता है।

समिट में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया। प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐतिहासिक स्थलों, पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई।

बैठक में संग्रहालयों की भूमिका पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं को सुरक्षित रखने के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं। डिजिटल संग्रहालयों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सांस्कृतिक सामग्री को अधिक लोगों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

ब्रिक्स देशों के अधिकारियों ने सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों के विकास पर भी चर्चा की। फिल्म, संगीत, कला, डिजाइन, हस्तशिल्प और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों को आर्थिक विकास और रोजगार के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। प्रतिनिधियों ने इन क्षेत्रों में सहयोग और अनुभव साझा करने की जरूरत पर जोर दिया।

समिट के दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उपायों पर भी चर्चा हुई। सदस्य देशों के बीच कलाकारों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और सांस्कृतिक संस्थानों के सहयोग को बढ़ाने के लिए संभावित योजनाओं पर विचार किया गया। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम देशों के बीच लोगों के स्तर पर संबंधों को मजबूत करने में मदद करेंगे।

इसके अलावा क्षमता निर्माण को भी बैठक के एजेंडे में शामिल किया गया। संस्कृति क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों, संस्थानों और युवाओं के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सहयोगी पहलों पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि सांस्कृतिक क्षेत्र के विकास के लिए नई पीढ़ी को अवसर और संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।

समिट के दौरान वर्किंग ग्रुप्स द्वारा तैयार की गई सिफारिशों पर भी चर्चा की गई। ये सिफारिशें आगे संस्कृति मंत्रियों की बैठक में होने वाली बातचीत का आधार बनेंगी। इन सिफारिशों के माध्यम से ब्रिक्स देशों के बीच भविष्य के सांस्कृतिक सहयोग की दिशा तय करने का प्रयास किया जाएगा।

भारत की मेजबानी में आयोजित यह सम्मेलन ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई गति देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। भारत का मानना है कि सांस्कृतिक सहयोग अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने और विभिन्न समाजों के बीच बेहतर समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। ऐसे में राज्य की राजधानी में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सांस्कृतिक सहयोग केवल कला और परंपराओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शिक्षा, पर्यटन, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच संबंधों को भी प्रभावित करता है।

कुल मिलाकर, BRICS कल्चरल समिट 2026 का दूसरा दिन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, रचनात्मक क्षेत्रों के विकास और सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। अब सभी की नजरें संस्कृति मंत्रियों की बैठक और उससे निकलने वाले संयुक्त घोषणा-पत्र पर टिकी हैं, जो आने वाले वर्षों में ब्रिक्स देशों के सांस्कृतिक सहयोग की दिशा तय कर सकता है।

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