मध्य प्रदेश

80 की उम्र में 950 KM पैदल चलेंगे दिग्विजय सिंह

Kavita2
8 Oct 2026 10:48 AM IST
80 की उम्र में 950 KM पैदल चलेंगे दिग्विजय सिंह
x

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक बड़ी धार्मिक और सामाजिक पदयात्रा का ऐलान किया है। करीब 80 वर्ष की उम्र में वह उज्जैन से अयोध्या तक लगभग 950 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करेंगे। इस यात्रा का नाम 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' रखा गया है। यात्रा 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होगी और उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर पहुंचकर समाप्त होगी। दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे के इस्तेमाल में पारदर्शिता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा किसी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है।

दशहरा के दिन महाकाल मंदिर से होगी शुरुआत

दिग्विजय सिंह ने बुधवार, 7 अक्टूबर को भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यात्रा की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उनकी पत्नी अमृता राय भी मौजूद थीं।

उन्होंने बताया कि 20 अक्टूबर को उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद पदयात्रा शुरू की जाएगी। इसके बाद यात्रा मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर उत्तर प्रदेश पहुंचेगी।

यात्रा के दौरान ओरछा के प्रसिद्ध रामराजा सरकार मंदिर में भी दर्शन किए जाएंगे। इसका अंतिम पड़ाव अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर होगा।

दिग्विजय सिंह ने इसे शिवधाम से रामधाम तक की यात्रा बताया है। उनका कहना है कि यात्रा का उद्देश्य लोगों के बीच जाकर धार्मिक आस्था, सत्य, न्याय और जवाबदेही का संदेश देना है।

दो महीने से अधिक समय तक चलेगी पदयात्रा

यात्रा में दिग्विजय सिंह प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना बना रहे हैं। इसके आधार पर पूरी यात्रा को लगभग 65 से 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यात्रा की कुल दूरी को लेकर प्रकाशित विवरणों में थोड़ा अंतर है। कुछ रिपोर्टों में लगभग 950 किलोमीटर और विस्तृत मार्ग विवरण में लगभग 930 किलोमीटर की दूरी बताई गई है।

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, यात्रा उज्जैन से तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर और चंदेरी से होकर आगे बढ़ेगी।

इसके बाद उत्तर प्रदेश के तालबेहट, ओरछा क्षेत्र, चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचेगी।

धार्मिक स्थलों के चढ़ावे का हिसाब मांगेंगे

दिग्विजय सिंह ने यात्रा का प्रमुख उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना बताया है।

उन्होंने कहा कि देश के बड़े मंदिरों में श्रद्धालु आस्था के साथ दान और चढ़ावा देते हैं। इस धन का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाता है, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि महाकालेश्वर मंदिर, ओरछा के रामराजा मंदिर और अयोध्या के श्रीराम मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के ट्रस्टों का नियमित स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।

उन्होंने मंदिरों की आय-व्यय, जमीन से जुड़े लेनदेन और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही है।

हालांकि, धार्मिक संस्थाओं में अनियमितताओं को लेकर उनके आरोपों को जांच से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

वोट चोरी और चंदा चोरी को बनाया मुद्दा

दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश में दो महत्वपूर्ण विषयों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत है।

पहला विषय चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जिसे उन्होंने 'वोट चोरी' का मुद्दा बताया। दूसरा विषय धार्मिक संस्थाओं में दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का है।

उनका आरोप है कि इन मुद्दों से लोकतांत्रिक व्यवस्था और लोगों के विश्वास पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने मांग की कि संबंधित आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और जहां अनियमितता प्रमाणित हो, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

यात्रा में नहीं होगा कांग्रेस का झंडा

दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि इस यात्रा में कांग्रेस पार्टी के झंडे और राजनीतिक पोस्टरों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

उनके अनुसार, यह जनजागरण यात्रा होगी, जिसमें विभिन्न सामाजिक और धार्मिक विचारों से जुड़े लोग शामिल हो सकेंगे।

यात्रा में एक व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा व्यक्ति धर्म ध्वज लेकर चलेगा।

धर्म ध्वज में लाल, पीला, काला, सफेद और हरा रंग शामिल होंगे। दिग्विजय सिंह ने इन रंगों को शक्ति, ज्ञान, आत्मचिंतन, शांति और प्रकृति के सम्मान का प्रतीक बताया है।

यात्रा का ध्येय वाक्य 'यतो धर्मस्ततो जयः' रखा गया है, जिसका अर्थ है कि जहां धर्म और न्याय है, वहीं विजय है।

RSS प्रमुख को भी शामिल होने का न्योता

दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को भी यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण देने की बात कही है।

उन्होंने यात्रा को किसी राजनीतिक दल या विचारधारा के खिलाफ अभियान बताने से इनकार किया है।

दिग्विजय सिंह के अनुसार, धार्मिक स्थलों की पवित्रता और श्रद्धालुओं के धन का पारदर्शी इस्तेमाल सुनिश्चित करना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

हालांकि, मोहन भागवत की ओर से यात्रा में शामिल होने की सहमति की पुष्टि नहीं हुई है।

पत्नी अमृता राय भी रहीं मौजूद

भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय ने भी यात्रा का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि जब दिग्विजय सिंह ने उनके सामने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करने का विचार रखा, तो उन्हें यह एक अच्छा प्रस्ताव लगा।

अमृता राय ने अपने पति के संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना की।

दिग्विजय सिंह और अमृता राय इससे पहले लगभग 3,200 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा भी पैदल पूरी कर चुके हैं। इस बार उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक यात्रा करने का निर्णय लिया है।

यात्रा से जुड़ने के लिए डिजिटल अभियान शुरू

पूर्व मुख्यमंत्री ने यात्रा में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए डिजिटल अभियान भी शुरू किया है।

बुधवार को उन्होंने यात्रा से संबंधित पैम्फलेट, डिजिटल पिटीशन और टोल फ्री नंबर जारी किया।

इसका उद्देश्य यात्रा से जुड़ने के इच्छुक लोगों को जानकारी उपलब्ध कराना और उनके समर्थन को दर्ज करना है।

यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों से संवाद करने और धार्मिक तथा सामाजिक विषयों पर चर्चा करने की योजना भी है।

मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक राजनीतिक चर्चा

दिग्विजय सिंह की इस घोषणा के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यात्रा को गैर-दलीय जनजागरण अभियान बताया है। हालांकि, वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और चुनावी प्रक्रियाओं तथा धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही जैसे विषयों पर लगातार अपनी राय रखते रहे हैं।

फिलहाल यात्रा की शुरुआत 20 अक्टूबर को निर्धारित है। करीब दो महीने से अधिक समय तक चलने वाली इस पदयात्रा के जरिए दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से संवाद करेंगे।

अब सबकी नजर यात्रा की शुरुआत, इसमें शामिल होने वाले लोगों और उज्जैन से अयोध्या तक निर्धारित कार्यक्रम पर बनी हुई है।

Next Story