मध्य प्रदेश

दिग्विजय सिंह का RSS-VHP पर हमला, राम मंदिर चंदा और पारदर्शिता पर उठाए सवाल

Kavita2
27 Jun 2026 12:13 PM IST
दिग्विजय सिंह का RSS-VHP पर हमला, राम मंदिर चंदा और पारदर्शिता पर उठाए सवाल
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इन संगठनों ने जमीन और धार्मिक संस्थानों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की है और राम मंदिर आंदोलन में उनकी सक्रियता राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से रही है।

मीडिया से बातचीत करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में RSS और VHP की भूमिका धार्मिक से अधिक राजनीतिक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संगठनों ने आंदोलन का उपयोग अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया।

सिंह ने विशेष रूप से VHP नेता चंपत राय पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि उनके संबंध धार्मिक संगठनों से कम और RSS से अधिक जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए दान में पारदर्शिता की कमी रही है।

उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर से भारी मात्रा में दान एकत्र किया गया, लेकिन उसका सही और पारदर्शी हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। सिंह के अनुसार, लगभग 12.5 करोड़ लोगों ने राम मंदिर के लिए दान दिया, जिसमें उन्होंने स्वयं भी दो बार योगदान देने की बात कही।

दिग्विजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह जानकारी नहीं मिली कि उनके द्वारा दिए गए दान का उपयोग कैसे किया गया। उन्होंने कहा कि कई अन्य श्रद्धालुओं को भी दान की रसीद या उपयोग संबंधी जानकारी नहीं दी गई।

इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे सहित कई श्रद्धालुओं को भी उनके योगदान की रसीदें नहीं मिलीं। उन्होंने इस पूरे मामले में वित्तीय पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया और इसकी जांच की मांग का संकेत दिया।

सिंह ने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थाओं को राजनीति से दूर रहना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में कई संगठन धार्मिक भावनाओं का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया तेज हो गई है। भाजपा और हिंदू संगठनों की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, दिग्विजय सिंह के इस बयान ने एक बार फिर राम मंदिर, धार्मिक संगठनों की भूमिका और दान प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

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