मध्य प्रदेश

मौत के बाद भी मानवता की मिसाल बने देवेंद्र जैन, परिवार ने लिया महादान का फैसला

Kavita2
31 Oct 2026 10:03 AM IST
मौत के बाद भी मानवता की मिसाल बने देवेंद्र जैन, परिवार ने लिया महादान का फैसला
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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में मानवता और परोपकार की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। शहर के महावीर बाग निवासी देवेंद्र जैन (बुराड) के निधन के बाद उनके परिवार ने आंखें, त्वचा और देह दान करने का सराहनीय निर्णय लिया। शुक्रवार सुबह देवेंद्र जैन के निधन से परिवार में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन दुख की इस घड़ी में भी परिजनों ने मानव सेवा को प्राथमिकता देते हुए ऐसा फैसला लिया, जो समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है।

देवेंद्र जैन शहर के प्रतिष्ठित कपड़ा व्यवसायी और महाराजा तुकोजीराव क्लॉथ मार्केट से जुड़े श्री क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हंसराज जैन के छोटे भाई थे। जैन परिवार श्वेतांबर जैन समुदाय में सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए जाना जाता है। उनके निधन के बाद परिवार की ओर से लिया गया दान का निर्णय अंगदान और देहदान के प्रति बढ़ती जागरूकता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

दुख की घड़ी में परिवार ने लिया बड़ा फैसला

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह देवेंद्र जैन का निधन हो गया। परिवार के सदस्य इस दुखद घटना से व्यथित थे। इसी दौरान अंगदान और देहदान के क्षेत्र में सक्रिय मुस्कान ग्रुप के स्वयंसेवकों ने परिवार से संपर्क किया।

स्वयंसेवकों ने परिजनों को नेत्रदान, त्वचादान और देहदान के महत्व के बारे में जानकारी दी तथा इस मानवीय कार्य के लिए सहमति देने का आग्रह किया।

परिजनों ने आपसी विचार-विमर्श के बाद दान करने का निर्णय लिया। परिवार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी प्रियजन के निधन के तुरंत बाद इस तरह का फैसला लेना भावनात्मक रूप से आसान नहीं होता।

इस निर्णय ने समाज को यह संदेश दिया है कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और जरूरतमंद मरीजों की सहायता में योगदान दे सकता है।

मुस्कान ग्रुप ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

इंदौर में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मुस्कान ग्रुप परमार्थिक ट्रस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संस्था के स्वयंसेवक जरूरतमंद परिवारों को अंगदान और देहदान की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करते हैं।

देवेंद्र जैन के निधन के बाद भी संस्था के स्वयंसेवकों ने परिजनों से संपर्क कर दान के संबंध में जानकारी दी।

ऐसे मामलों में परिवार की सहमति के साथ चिकित्सा संस्थानों और संबंधित विशेषज्ञों के बीच समन्वय आवश्यक होता है।

इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी मुस्कान ग्रुप को अंगदान जागरूकता से जुड़े सहयोगी संगठनों में शामिल किया गया है।

नेत्रदान से किसी की जिंदगी में लौट सकती है रोशनी

नेत्रदान का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि कॉर्निया संबंधी कुछ बीमारियों के कारण दृष्टि खो चुके मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण से लाभ मिल सकता है।

आंखों का दान करने का अर्थ पूरी आंख किसी व्यक्ति में प्रत्यारोपित करना नहीं होता। सामान्यतः दान की गई आंखों से प्राप्त उपयुक्त कॉर्निया का उपयोग प्रत्यारोपण के लिए किया जाता है।

इस प्रक्रिया में चिकित्सा विशेषज्ञ यह निर्धारित करते हैं कि दान किया गया ऊतक प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त है या नहीं।

देवेंद्र जैन के परिवार की ओर से नेत्रदान की सहमति जरूरतमंद मरीजों के लिए आशा का माध्यम बन सकती है।

हालांकि, इस मामले में कॉर्निया प्राप्त करने और उसके प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी होने का स्वतंत्र विवरण उपलब्ध नहीं है।

त्वचादान से गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को मिल सकती है सहायता

नेत्रदान के साथ त्वचादान भी महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवा है। विशेष रूप से गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार में दान की गई त्वचा का उपयोग किया जा सकता है।

त्वचा बैंक में सुरक्षित रखे गए दान किए हुए ऊतकों का उपयोग डॉक्टर मरीज की स्थिति और चिकित्सा जरूरत के अनुसार करते हैं।

कई मामलों में दान की गई त्वचा अस्थायी जैविक आवरण के रूप में काम आती है, जिससे घाव की सुरक्षा और उपचार में सहायता मिल सकती है।

इंदौर में त्वचादान की व्यवस्था से जुड़े चिकित्सा संस्थान और सामाजिक संगठन लंबे समय से जागरूकता के प्रयास कर रहे हैं।

देवेंद्र जैन के परिवार के इस निर्णय से त्वचादान के महत्व पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है।

देहदान से चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा सहयोग

देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मेडिकल कॉलेजों में शरीर रचना विज्ञान का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना समझने के लिए दान की गई पार्थिव देह से सीखने का अवसर मिलता है।

चिकित्सा शिक्षा में किताबों और डिजिटल तकनीक के साथ वास्तविक शरीर रचना का अध्ययन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

देहदान के माध्यम से भावी डॉक्टर मानव शरीर के विभिन्न अंगों, ऊतकों और उनकी संरचना का अध्ययन कर सकते हैं।

हालांकि, देहदान की प्रक्रिया संबंधित मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति, चिकित्सकीय मानदंडों और आवश्यक औपचारिकताओं पर निर्भर करती है।

इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के अनुसार, देहदान संबंधी जानकारी और आवेदन पत्र मेडिकल कॉलेज के शरीर रचना विभाग तथा सहयोगी सामाजिक संस्थाओं से प्राप्त किए जा सकते हैं।

सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा है जैन परिवार

देवेंद्र जैन का परिवार इंदौर के सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्र में परिचित है। उनके बड़े भाई हंसराज जैन महाराजा तुकोजीराव क्लॉथ मार्केट के प्रमुख व्यवसायियों में शामिल रहे हैं।

श्री क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष के रूप में भी उनका व्यावसायिक संगठनों से जुड़ाव रहा है।

परिवार श्वेतांबर जैन समुदाय की सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के लिए पहचाना जाता है। ऐसे परिवार की ओर से देहदान का निर्णय समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला है।

जैन परंपरा में अहिंसा, करुणा और परोपकार को विशेष महत्व दिया जाता है। देवेंद्र जैन के परिजनों का यह निर्णय इन्हीं मानवीय मूल्यों से जुड़ी सेवा भावना को दर्शाता है।

इंदौर में लगातार बढ़ रही दान के प्रति जागरूकता

इंदौर में हाल के दिनों में अंगदान और देहदान के कई प्रेरणादायक उदाहरण सामने आए हैं।

अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में भी अलग-अलग परिवारों ने अपने प्रियजनों के निधन के बाद नेत्रदान, त्वचादान और देहदान का निर्णय लिया था।

28 अक्टूबर को शहर में एक अन्य परिवार ने अपने दिवंगत परिजन की पूर्व में व्यक्त इच्छा का सम्मान करते हुए देहदान की प्रक्रिया पूरी कराई थी। इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि शहर में दान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दान की इच्छुक परिवारों को पहले से संबंधित चिकित्सा संस्थान या अधिकृत संगठन से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। मृत्यु के बाद दान की संभावना कई चिकित्सकीय और समय संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

देवेंद्र जैन के परिवार ने अपने निजी दुख को समाज सेवा के संकल्प से जोड़कर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उनका निर्णय यह दर्शाता है कि किसी व्यक्ति की स्मृति को मानव कल्याण के कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है।

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