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इंदौर में ऑटो चालकों का प्रदर्शन, ई-रिक्शा के तय रूट और बाइक टैक्सी पर सख्त नियमों की मांग

इंदौर। शहर में ऑटो-रिक्शा चालकों ने अपनी रोजी-रोटी पर बढ़ते दबाव को लेकर बुधवार को पलासिया स्क्वायर पर विरोध प्रदर्शन किया। ‘भगवा ऑटो रिक्शा ड्राइवर्स एसोसिएशन’ के बैनर तले जुटे चालकों ने ई-रिक्शा के लिए तय रूट निर्धारित करने और बाइक टैक्सी के संचालन पर सख्त नियम लागू करने की मांग उठाई। चालकों का कहना है कि लगातार घटते यात्रियों और बढ़ते खर्चों के बीच पारंपरिक ऑटो चालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा है।
ऑटो-रिक्शा लंबे समय से शहरों में सार्वजनिक परिवहन का सबसे सस्ता और आसानी से उपलब्ध साधन माना जाता रहा है। छात्र, नौकरीपेशा लोग, परिवार और बाजार आने-जाने वाले लोग बड़ी संख्या में इनका इस्तेमाल करते हैं। इंदौर में भी ऑटो-रिक्शा शहरी यातायात व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और हजारों परिवारों की आय इनसे जुड़ी हुई है।
लेकिन बदलते परिवहन विकल्पों के बीच ऑटो चालकों की परेशानियां बढ़ी हैं। चालकों का कहना है कि ई-रिक्शा और बाइक टैक्सी की बढ़ती संख्या के कारण उन्हें पहले की तुलना में कम सवारी मिल रही है। दूसरी ओर ईंधन, वाहन की मरम्मत, बीमा, परमिट और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस कारण उनकी कमाई और खर्च के बीच संतुलन बिगड़ता जा रहा है।
पलासिया स्क्वायर पर हुए विरोध प्रदर्शन में ऑटो चालकों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। एसोसिएशन का कहना है कि ई-रिक्शा के संचालन के लिए स्पष्ट रूट तय किए जाने चाहिए, ताकि वे हर सड़क और इलाके में बिना किसी सीमा के परिचालन न करें। ऑटो चालकों का आरोप है कि ई-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन का सीधा असर पारंपरिक ऑटो चालकों की कमाई पर पड़ रहा है।
चालकों ने बाइक टैक्सी के संचालन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि बाइक टैक्सी यात्रियों को व्यावसायिक रूप से ले जा रही हैं तो उनके लिए भी स्पष्ट नियम और कड़े मानक होने चाहिए। ऑटो चालकों ने बराबरी के अवसर की मांग करते हुए कहा कि एक ही शहर में अलग-अलग परिवहन सेवाओं के लिए अलग-अलग नियम होने से पारंपरिक ऑटो चालकों को नुकसान हो रहा है।
ऑटो चालक लंबे समय से परमिट, फिटनेस, बीमा और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। उनका कहना है कि वाहन चलाने के लिए कई प्रकार के शुल्क और खर्च उन्हें उठाने पड़ते हैं। ऐसे में यदि दूसरे परिवहन विकल्प कम नियमों के साथ संचालन करते हैं तो प्रतिस्पर्धा असमान हो जाती है।
इंदौर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सार्वजनिक परिवहन के कई विकल्प उपलब्ध हो गए हैं। ई-रिक्शा, बाइक टैक्सी और ऐप आधारित परिवहन सेवाओं ने यात्रियों को अधिक विकल्प दिए हैं। यात्रियों के लिए यह सुविधा का विषय हो सकता है, लेकिन पारंपरिक ऑटो चालकों के लिए यह नई आर्थिक चुनौती बनती जा रही है।
ऑटो चालकों का कहना है कि वे किसी नए परिवहन साधन का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन सभी के लिए समान और स्पष्ट नियम होने चाहिए। ई-रिक्शा के लिए तय रूट और बाइक टैक्सी के लिए सख्त नियम लागू होने से सभी वाहन चालकों को समान अवसर मिलेगा और सड़क पर अव्यवस्था भी कम होगी।
चालकों की एक बड़ी चिंता यह भी है कि सवारी कम होने से उनकी दैनिक आय प्रभावित हो रही है। ऑटो चलाने वाले कई लोग किराये या कर्ज पर वाहन लेते हैं। उन्हें रोजाना ईंधन के साथ किस्त और घर का खर्च भी निकालना पड़ता है। यदि दिनभर में पर्याप्त सवारी नहीं मिलती तो परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है।
एसोसिएशन ने प्रशासन से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। चालकों का कहना है कि शहर की परिवहन व्यवस्था में बदलाव करते समय उन लोगों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, जो वर्षों से ऑटो चलाकर शहर के लोगों को सेवा दे रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान ऑटो चालकों ने यह भी कहा कि बिना रूट निर्धारण के ई-रिक्शा का संचालन कई इलाकों में यातायात की समस्या पैदा कर सकता है। यदि इनके लिए निर्धारित मार्ग तय किए जाएं तो यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ सड़क पर वाहनों का दबाव भी व्यवस्थित किया जा सकता है।
बाइक टैक्सी को लेकर चालकों की मांग है कि उनके संचालन, सुरक्षा और व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े नियम स्पष्ट किए जाएं। उनका कहना है कि यात्रियों को ले जाने वाले हर व्यावसायिक वाहन के लिए नियमों का पालन समान रूप से होना चाहिए।
ऑटो चालकों के इस प्रदर्शन ने शहर में बदलती परिवहन व्यवस्था और उसके आर्थिक प्रभाव को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। तकनीक और नए वाहनों के आने से लोगों को सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन पुराने परिवहन साधनों से जुड़े हजारों चालकों के लिए रोजगार की चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
भगवा ऑटो रिक्शा ड्राइवर्स एसोसिएशन का कहना है कि प्रशासन को सभी पक्षों के साथ बैठक कर ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे यात्रियों की सुविधा भी बनी रहे और किसी एक वर्ग की आजीविका पर असमान दबाव न पड़े।
फिलहाल ऑटो चालकों ने अपनी मांगें प्रशासन के सामने रख दी हैं। अब उनकी नजर इस बात पर है कि ई-रिक्शा के रूट निर्धारण और बाइक टैक्सी के नियमों को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। चालकों ने साफ कहा है कि उनका उद्देश्य किसी सेवा को बंद कराना नहीं, बल्कि परिवहन व्यवस्था में बराबरी का अवसर सुनिश्चित कराना है।





