मध्य प्रदेश

ओबीसी आरक्षण पर विशेष सत्र बुलाने की मांग, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से पूछा सवाल

jantaserishta.com
13 Oct 2026 3:53 PM IST
ओबीसी आरक्षण पर विशेष सत्र बुलाने की मांग, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से पूछा सवाल
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भोपाल: मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में राज्य सरकार आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह से मुलाकात की। इस दौरान हाईकोर्ट के फैसले और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और आरक्षण पर अध्यादेश लाने की मांग की है।
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार आगे क्या कदम उठाएगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात की।
इस बैठक में मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी शामिल हुए। बातचीत का मुख्य विषय ओबीसी आरक्षण से जुड़े हाईकोर्ट के निर्णय के कानूनी पहलू और उसके बाद अपनाई जाने वाली रणनीति रहा।
मुख्यमंत्री की इस मुलाकात से संकेत मिला है कि राज्य सरकार आरक्षण के मुद्दे पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर विचार कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगला कदम क्या होगा और इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा तय हुई है या नहीं।
डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में...
डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में हुई बैठक की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के निर्णय से जुड़े कानूनी विषयों पर विस्तार से बातचीत हुई।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, बैठक में आगे की कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर भी विचार किया गया। इस चर्चा को हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार की ओर से आगे का रास्ता तलाशने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से साझा की गई जानकारी में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की किसी तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है। न ही इस बारे में औपचारिक घोषणा की गई है कि राज्य सरकार निश्चित रूप से कब और किस प्रक्रिया के तहत अगली कानूनी कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल से...
मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार के कदम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि ओबीसी आरक्षण के मामले में चर्चा के लिए मुख्यमंत्री को दिल्ली जाने की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि राज्य में विधानसभा मौजूद है।
सिंघार का कहना है कि यदि सरकार आरक्षण के मुद्दे पर कोई ठोस पहल करना चाहती है, तो उसे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री विशेष सत्र आयोजित करने के बजाय कानूनी रास्ते पर ही क्यों आगे बढ़ना चाहते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल होने के लिए तैयार है। उन्होंने सरकार से ओबीसी आरक्षण पर अध्यादेश लाने और इस विषय पर कानून पारित कराने की मांग भी की।
विशेष सत्र और अध्यादेश की मांग
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से आरक्षण के मुद्दे पर सरकार का रुख साफ करने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी वर्ग को उम्मीदें तो दे रही है, लेकिन स्थिति स्पष्ट करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा रही है।
सिंघार के अनुसार, यदि सरकार की मंशा आरक्षण के मामले में आगे बढ़ने की है, तो उसे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि सरकार बार-बार मामले को अदालत के निर्णय पर क्यों छोड़ना चाहती है।
यह कांग्रेस की ओर से सरकार पर उठाया गया राजनीतिक सवाल है। वहीं, मुख्यमंत्री की ओर से सामने आई जानकारी फिलहाल कानूनी पहलुओं और आगामी कार्रवाई की रणनीति पर चर्चा तक सीमित है।
सुप्रीम कोर्ट जाने पर अभी औपचारिक घोषणा नहीं
हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार के अगले कदम को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात के दौरान कानूनी रणनीति पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तारीख या किसी अंतिम फैसले का औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है।
यदि सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाती है, तो उसे 27 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में अपना कानूनी आधार प्रस्तुत करना होगा। फिलहाल यह देखना बाकी है कि सरकार अदालत के माध्यम से आगे बढ़ती है या विधानसभा में विशेष सत्र और कानून बनाने जैसे विकल्पों पर भी कोई निर्णय लेती है।
ओबीसी आरक्षण से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में सरकार की घोषणा और कानूनी कार्रवाई की दिशा महत्वपूर्ण होगी।
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