- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- जिला अस्पताल में 58...
मध्य प्रदेश
जिला अस्पताल में 58 नवजातों की मौत, FIR की मांग
Rajeshwari Nishad
11 Oct 2026 3:01 PM IST

x
सिवनी : मध्य प्रदेश के सिवनी जिला अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। विधायक दिनेश राय के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में बच्चों की मौत के आंकड़ों की जानकारी मिलने के बाद उपचार व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। सामने आए विवरण में 46 बच्चों की मौत का संबंध सांस लेने में तकलीफ से बताया गया है। विधायक ने जांच और कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है। कांग्रेस ने भी निष्पक्ष जांच कराने तथा लापरवाही साबित होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
मामले में सामने आई शुरुआती जानकारी के अनुसार, पिछले तीन महीनों के दौरान प्रसव के बाद 46 बच्चों की मौत हुई। वहीं, उपलब्ध बयान में एक अप्रैल 2026 से संबंधित रविवार तक कुल 58 बच्चों की मौत का उल्लेख किया गया है। बयान के मुताबिक, इनमें 57 बच्चों की मृत्यु एसएनसीयू में हुई और 46 बच्चों को सांस लेने में तकलीफ थी। दोनों विवरणों की अवधि अलग है, इसलिए इन्हें एक ही समयावधि के आंकड़े के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
इन आंकड़ों का सही अर्थ समझने के लिए अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज अवधि और प्रत्येक मामले का विवरण महत्वपूर्ण होगा। कुल मौतों की संख्या, एसएनसीयू में हुई मौतों की संख्या और सांस संबंधी परेशानी वाले बच्चों की संख्या अलग-अलग जानकारी हैं। उपलब्ध बयान में 46 बच्चों का उल्लेख कुल 58 मौतों के भीतर किया गया है। इसलिए 46 और 58 को जोड़कर मौतों की कोई नई संख्या नहीं निकाली जा सकती।
विधायक के निरीक्षण में सामने आई जानकारी के बाद शासन को लिखे गए पत्र में जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। मामला केवल संख्या सामने आने तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि संबंधित बच्चों की स्थिति क्या थी, उन्हें किस तरह का उपचार मिला और क्या किसी स्तर पर ऐसी कमी थी, जिसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इन सवालों का उत्तर चिकित्सकीय दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
सामने आए बयान में सांस लेने में तकलीफ से जुड़ी मौतों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। बयान देने वाले व्यक्ति ने उपचार व्यवस्था में बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया है। हालांकि, किसी नवजात को सांस लेने में परेशानी होने और उसकी मृत्यु के बीच के चिकित्सकीय घटनाक्रम को देखे बिना लापरवाही का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आरोप की पुष्टि के लिए प्रत्येक बच्चे के उपचार, उसकी स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं का विवरण आवश्यक होगा।
इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उसने यह भी कहा है कि जांच में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। यह मांग जांच के परिणाम से जुड़ी है। उपलब्ध जानकारी में किसी चिकित्सक, नर्स या अन्य कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने अथवा दोष निर्धारित होने का उल्लेख नहीं है।
नवजातों की मौत से जुड़े मामले में जवाबदेही तय करने के लिए सामान्य आरोपों के बजाय स्पष्ट तथ्यों की जरूरत होगी। कौन-सा बच्चा कब भर्ती हुआ, भर्ती के समय उसकी हालत कैसी थी, उपचार के दौरान क्या बदलाव आए और मृत्यु का कारण रिकॉर्ड में क्या दर्ज किया गया—ये विवरण जांच के लिए अहम हो सकते हैं। इसी तरह बच्चों को अस्पताल में जन्म के बाद भर्ती किया गया था या कहीं और से लाया गया था, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड भी आंकड़ों को समझने में मदद करेगा।
सांस लेने में तकलीफ का उल्लेख सामने आने से उपचार व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। लेकिन उपलब्ध विवरण से यह स्थापित नहीं होता कि सभी संबंधित बच्चों की परेशानी एक जैसी थी या उन्हें एक ही प्रकार के उपचार की जरूरत थी। किसी खास उपकरण की अनुपलब्धता को मौतों का कारण बताने वाली पुष्ट जानकारी भी नहीं दी गई है। इसलिए वेंटिलेटर, ऑक्सीजन या कर्मचारियों की कमी को निश्चित वजह मानकर प्रस्तुत करने से पहले जांच का आधार जरूरी है।
निरीक्षण के बाद उठी मांगों में दो बातें प्रमुख हैं। पहली, मौतों के आंकड़ों और परिस्थितियों की निष्पक्ष पड़ताल हो। दूसरी, यदि जांच में उपचार संबंधी लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। इन दोनों चरणों को साथ समझना जरूरी है। जांच की मांग अपने आप दोष साबित नहीं करती, लेकिन सामने आए गंभीर आरोपों का तथ्यपूर्ण परीक्षण आवश्यक बनाती है।
मामले की रिपोर्टिंग में अवधि की अस्पष्टता दूर करना भी जरूरी है। तीन महीनों में 46 मौतों की शुरुआती जानकारी और एक अप्रैल से 58 मौतों वाला बयान एक-दूसरे से अलग विवरण देते हैं। अस्पताल के प्रमाणित आंकड़ों से स्पष्ट होना चाहिए कि किस अवधि में कितने बच्चे भर्ती हुए और कितनी मौतें दर्ज हुईं। केवल मौतों की संख्या से उपचार की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
फिलहाल विधायक ने शासन से जांच और कार्रवाई की मांग की है, जबकि कांग्रेस ने निष्पक्ष पड़ताल तथा लापरवाही साबित होने पर एफआईआर दर्ज करने की बात कही है। उपलब्ध सामग्री में जांच की अंतिम रिपोर्ट या दोषियों पर कार्रवाई का विवरण नहीं है। सिवनी जिला अस्पताल से जुड़े इस मामले में अब सबसे जरूरी तथ्य मौतों की सही अवधि, चिकित्सकीय कारण और उपचार व्यवस्था से संबंधित रिकॉर्ड हैं, जिनके आधार पर जिम्मेदारी का निर्धारण किया जा सकेगा।
Next Story





