मध्य प्रदेश

DAVV के डॉ. मुकेश चंद्र शर्मा लगातार पांचवीं बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल

Kavita2
10 Oct 2026 10:02 AM IST
DAVV के डॉ. मुकेश चंद्र शर्मा लगातार पांचवीं बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल
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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के स्कूल ऑफ फार्मेसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुकेश चंद्र शर्मा ने शोध के क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की है। 7 अक्टूबर 2026 को जारी सूची के अनुसार, उन्हें लगातार पांचवें वर्ष दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल किया गया है। यह सूची स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर के सहयोग से तैयार की गई है। डॉ. शर्मा का शोध कार्य फार्मेसी, फार्माकोलॉजी और क्लिनिकल मेडिसिन जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है।

डॉ. शर्मा का लगातार पांचवें साल इस सूची में शामिल होना उनके शोध कार्य की निरंतरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके प्रभाव को दर्शाता है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट भी उन्हें स्कूल ऑफ फार्मेसी में एसोसिएट प्रोफेसर और फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री के विशेषज्ञ के रूप में सूचीबद्ध करती है।

एक साल और पूरे करियर के शोध का होता है मूल्यांकन

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की इस वैश्विक सूची में वैज्ञानिकों के शोध और उसके प्रभाव का आकलन दो प्रमुख श्रेणियों में किया जाता है। पहली श्रेणी में किसी वैज्ञानिक के एक वर्ष के शोध प्रदर्शन को देखा जाता है, जबकि दूसरी श्रेणी में उनके पूरे करियर के दौरान किए गए शोध का प्रभाव शामिल होता है।

इस मूल्यांकन में वैज्ञानिक प्रकाशनों, उद्धरणों और शोध के अन्य bibliometric संकेतकों को महत्व दिया जाता है। इसका उद्देश्य उन शोधकर्ताओं की पहचान करना है, जिनके वैज्ञानिक कार्यों का संबंधित विषयों में महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है।

डॉ. शर्मा का दोनों श्रेणियों में शामिल होना उनके शोध के अलग-अलग पहलुओं को रेखांकित करता है। एक ओर यह उनके हालिया शोध कार्य की प्रासंगिकता को दर्शाता है, तो दूसरी ओर लंबे समय में किए गए उनके वैज्ञानिक योगदान की पहचान भी कराता है।

हालांकि, शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची को किसी वैज्ञानिक की सभी उपलब्धियों का पूर्ण माप नहीं माना जाना चाहिए। यह मुख्य रूप से शोध के प्रभाव और उद्धरणों से जुड़े मानकों पर आधारित मूल्यांकन है।

फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री में विशेषज्ञता

डॉ. मुकेश चंद्र शर्मा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मेसी में फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री के क्षेत्र से जुड़े हैं। विश्वविद्यालय के शैक्षणिक रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने फार्मेसी में स्नातकोत्तर शिक्षा और पीएचडी की है। वे वर्ष 2009 से विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं।

फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री दवाओं की रासायनिक संरचना, उनके गुणों, निर्माण और औषधीय उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण विषय है। इस क्षेत्र में शोध का उद्देश्य दवाओं के विकास, उनके गुणों को समझने और औषधीय विज्ञान से जुड़े विभिन्न प्रश्नों पर अध्ययन करना होता है।

डॉ. शर्मा का शोध फार्मेसी और संबंधित वैज्ञानिक क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। उनके अकादमिक कार्यों में शोध पत्रों के प्रकाशन के साथ वैज्ञानिक पुस्तकों और संदर्भ ग्रंथों में योगदान भी शामिल है।

100 से अधिक शोध प्रकाशनों का रिकॉर्ड

डॉ. शर्मा के उपलब्ध अकादमिक विवरण के अनुसार, उनके नाम वेब ऑफ साइंस के एससीआई और ईएससीआई में सूचीबद्ध पत्रिकाओं में 100 से अधिक शोध प्रकाशन दर्ज हैं। उनके सीवी में गूगल स्कॉलर पर 3,000 से अधिक उद्धरण तथा स्कोपस पर 25 का एच-इंडेक्स दर्ज किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संदर्भ पुस्तकों में 35 से अधिक अध्यायों का योगदान दिया है।

शोध प्रकाशनों और उद्धरणों की संख्या वैज्ञानिक समुदाय में किसी शोध कार्य के संदर्भ और इस्तेमाल का संकेत दे सकती है। जब अन्य शोधकर्ता किसी प्रकाशित अध्ययन का उल्लेख अपने शोध में करते हैं, तो उसे उद्धरण के रूप में गिना जाता है। हालांकि, अलग-अलग विषयों में प्रकाशन और उद्धरण की परंपराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए ऐसे आंकड़ों को विषय और संदर्भ के अनुसार समझना जरूरी है।

डॉ. शर्मा के अकादमिक विवरण में शोध पत्रों के अलावा पुस्तकों, शोध मार्गदर्शन और वैज्ञानिक पत्रिकाओं की समीक्षा से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख है।

विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश का प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मेसी में दवा विज्ञान और उससे संबंधित क्षेत्रों में अध्ययन तथा शोध कार्य किए जाते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोधकर्ताओं की पहचान संस्थान के शैक्षणिक वातावरण और शोध गतिविधियों की चर्चा को बढ़ावा देती है।

डॉ. शर्मा की उपलब्धि फार्मेसी के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी प्रासंगिक है। उच्च शिक्षा में शोध कार्य के लिए विषय की गहरी समझ, लगातार अध्ययन, वैज्ञानिक लेखन और दूसरे शोधकर्ताओं के साथ सहयोग की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया में प्रकाशित शोध की गुणवत्ता और उसका वैज्ञानिक उपयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लगातार पांच वर्षों तक सूची में जगह बनाए रखने का दावा उनके शोध कार्य में निरंतरता की ओर संकेत करता है। हालांकि, इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के सभी शोध क्षेत्रों के प्रदर्शन का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह एक विशेष शोधकर्ता के काम से संबंधित है।

वैज्ञानिक शोध में निरंतरता का महत्व

वैज्ञानिक शोध किसी एक अध्ययन या प्रकाशन तक सीमित नहीं रहता। नए निष्कर्षों की जांच, पुराने अध्ययनों का मूल्यांकन और संबंधित विषयों में नए प्रश्नों पर काम करना इस प्रक्रिया का हिस्सा है। फार्मेसी जैसे क्षेत्र में शोध का संबंध दवाओं और स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़े ज्ञान को आगे बढ़ाने से भी होता है।

डॉ. मुकेश चंद्र शर्मा का नाम लगातार पांचवीं बार शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होने की जानकारी उनके शैक्षणिक सफर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है। उनके शोध प्रकाशनों, उद्धरणों और शैक्षणिक योगदान से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड भी उनके अकादमिक कार्य का विवरण देते हैं।

कुल मिलाकर, डॉ. मुकेश चंद्र शर्मा की यह उपलब्धि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मेसी और इंदौर के शैक्षणिक जगत के लिए महत्वपूर्ण है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की सूची में लगातार पांचवें वर्ष स्थान मिलने का दावा उनके शोध कार्य की अंतरराष्ट्रीय पहचान को रेखांकित करता है।

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