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DAVV ने BTech फाइनल ईयर छात्रों के करियर पर नरमी दिखाई, हॉस्टल तोड़फोड़ मामले में जांच जारी

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) ने रामानुजन बॉयज़ हॉस्टल में हुई तोड़फोड़ की घटना के बाद बड़ा निर्णय लेते हुए कहा है कि इस मामले में शामिल BTech फाइनल ईयर छात्रों के करियर को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, इस घटना ने विश्वविद्यालय और संस्थान की छवि पर गंभीर असर डाला है।
पूरा मामला तब सामने आया जब रविवार सुबह करीब 150 फाइनल ईयर BTech छात्रों ने हॉस्टल परिसर में कथित तौर पर शराब पार्टी के दौरान जमकर हंगामा किया। आरोप है कि इस दौरान छात्रों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और हॉस्टल की कई चीजों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
इस घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। वीडियो में इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) के छात्र डीजे म्यूजिक पर नाचते हुए दिखाई दे रहे हैं। आरोप यह भी है कि कुछ छात्र अर्ध-नग्न अवस्था में थे और इस दौरान कुर्सियां, टेबल, पानी की टंकियां और खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए गए।
घटना के बाद संस्थान में भारी आक्रोश फैल गया और प्रशासन ने तुरंत जांच कमेटी का गठन किया। समिति ने मामले की जांच के बाद छात्रों को अनुशासनहीनता का दोषी माना और सख्त कार्रवाई की सिफारिश की।
कमेटी की सिफारिशों में छात्रों के प्लेसमेंट अवसर रोकने, परीक्षा परिणाम रोकने और प्रत्येक छात्र पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने जैसे कदम शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि यह व्यवहार संस्थान के नियमों और अनुशासन के खिलाफ है और इससे संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचा है।
हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में नरमी का रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि छात्रों के भविष्य और करियर को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई अनुशासनात्मक होगी, लेकिन इसका उद्देश्य सुधारात्मक होगा, न कि छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचाना।
DAVV प्रशासन का कहना है कि संस्थान छात्रों को शिक्षा और अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने संकेत दिया है कि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और छात्र व्यवहार को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संतुलित कार्रवाई जरूरी है, जिससे एक ओर अनुशासन बना रहे और दूसरी ओर छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित रहे।
फिलहाल मामले की आगे जांच जारी है और विश्वविद्यालय प्रशासन सभी संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद अंतिम निर्णय लेने की तैयारी कर रहा है।





