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झाबुआ में पानी की किल्लत का खतरा, प्रशासन ने पूरे जिले को जल अभावग्रस्त घोषित किया

झाबुआ। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में औसत से कम बारिश और लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने जिले के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया है। इसके साथ ही पूरे जिले में निजी बोरवेल की खुदाई और विभिन्न जल स्रोतों से मोटर पंप या टैंकर के माध्यम से पानी निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस वर्ष अपेक्षाकृत कम बारिश होने के कारण कुओं, तालाबों और अन्य जल स्रोतों का स्तर लगातार घट रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में गंभीर पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए जल संरक्षण के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूरे झाबुआ जिले को किया जल अभावग्रस्त घोषित
झाबुआ जिला प्रशासन ने संभावित पेयजल संकट को रोकने के उद्देश्य से पूरे जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है।
यह आदेश केवल नगर पालिका और शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में आने वाले गांवों पर भी लागू होगा।
इसका मतलब है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल स्रोतों के उपयोग से जुड़े नए प्रतिबंधों का पालन करना जरूरी होगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इसके लिए जल स्रोतों के अनियंत्रित दोहन को रोकने और उपलब्ध पानी को संरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
पूरे जिले में निजी बोरवेल की खुदाई पर प्रतिबंध
नए आदेश के तहत झाबुआ जिले में निजी नलकूप और बोरवेल की खुदाई पर रोक लगा दी गई है।
अब कोई व्यक्ति सामान्य रूप से निजी उपयोग के लिए नया बोरवेल नहीं खुदवा सकेगा।
जिला प्रशासन ने इस संबंध में संबंधित विभागों को निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन का मानना है कि लगातार नए बोरवेल खोदने से भूजल का दोहन बढ़ता है।
कम बारिश की स्थिति में जमीन के नीचे पानी की भरपाई पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाती।
इससे पहले से मौजूद कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर भी प्रभावित हो सकता है।
इसी कारण संभावित संकट को देखते हुए निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
कुओं, तालाबों और नदियों से पानी निकालने पर रोक
जिला प्रशासन ने केवल बोरवेल की खुदाई पर ही रोक नहीं लगाई है, बल्कि मौजूदा जल स्रोतों के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।
आदेश के अनुसार, जिले के कुओं, बावड़ियों, तालाबों, नदियों, नालों, बांधों और सरकारी नलकूपों से मोटर पंप या टैंकर के जरिए पानी निकालने पर प्रतिबंध रहेगा।
यह रोक कृषि, व्यावसायिक और निजी प्रयोजनों के लिए पानी निकालने पर लागू होगी।
प्रशासन ने कहा है कि उपलब्ध जल संसाधनों का संरक्षण करना जरूरी है, ताकि भविष्य में पेयजल संकट पैदा होने की स्थिति में लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा सके।
हालांकि, आवश्यक और अनुमति प्राप्त उपयोग से जुड़ी विस्तृत शर्तें संबंधित प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार लागू होंगी।
कम बारिश और गिरते भूजल स्तर से बढ़ी चिंता
जिले में जल संकट की आशंका का प्रमुख कारण इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होना बताया गया है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने जिला प्रशासन को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था।
विभाग ने बताया कि बारिश कम होने से भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है।
इसके अलावा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थित पारंपरिक जल स्रोतों तथा जलाशयों की स्थिति भी चिंताजनक है।
आने वाले महीनों में पानी की मांग बढ़ने पर समस्या और गंभीर होने की आशंका है।
इसी रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया।
प्रशासन का प्रयास है कि संकट गहराने से पहले ही पानी के अनावश्यक दोहन को रोका जा सके।
सरकारी जल स्रोतों की होगी जांच
जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को सरकारी जल स्रोतों का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
इसके तहत ऐसे स्थानों की पहचान की जाएगी, जहां बिना अनुमति मोटर पंप या अन्य उपकरण लगाकर पानी निकाला जा रहा है।
यदि जांच में सरकारी जल स्रोतों पर अवैध रूप से मोटर पंप लगे मिलते हैं, तो उन्हें नियमानुसार हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
नगर निकायों, ग्राम पंचायतों और संबंधित विभागों को जल स्रोतों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने कहा है कि आदेश के पालन में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
इसके लिए स्थानीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ेगा असर
नए प्रतिबंधों का प्रभाव उन लोगों पर पड़ सकता है, जो सिंचाई या व्यावसायिक कार्यों के लिए जल स्रोतों से पानी निकालते हैं।
विशेष रूप से मोटर पंप के जरिए कुओं, तालाबों या अन्य स्रोतों से पानी लेने वालों को प्रशासनिक आदेश का पालन करना होगा।
झाबुआ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है।
ऐसे में किसानों के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है।
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पेयजल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
कृषि या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए किसी प्रकार की छूट मिलने की स्थिति में संबंधित सक्षम अधिकारी से नियमों की जानकारी लेना जरूरी होगा।
फिलहाल आदेश में सभी संभावित अपवादों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
नियम तोड़ने वालों के खिलाफ होगी कानूनी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 तथा मध्य प्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 और उसके संशोधित प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।
प्रशासन के अनुसार, बिना अनुमति प्रतिबंधित गतिविधियां करने पर संबंधित कानूनों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
संबंधित विभागों और स्थानीय अधिकारियों को इसके पालन की जिम्मेदारी दी गई है।
नियमों के उल्लंघन की शिकायत कर सकेंगे नागरिक
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से भी जल संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।
यदि किसी व्यक्ति को प्रतिबंध के बावजूद निजी बोरवेल की खुदाई या जल स्रोतों से अवैध पानी निकासी की जानकारी मिलती है, तो वह संबंधित अधिकारियों को सूचना दे सकता है।
इसके लिए क्षेत्र के अनुविभागीय दंडाधिकारी, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी, तहसीलदार या थाना प्रभारी से संपर्क किया जा सकता है।
प्रशासन ने शिकायत करने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखने का भरोसा दिया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय लोगों की सहायता से जल स्रोतों की निगरानी को प्रभावी बनाना है।
गांव-गांव में दी जाएगी आदेश की जानकारी
प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक आदेश के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए हैं।
इसके लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर सूचना प्रसारित की जाएगी।
आवश्यकता के अनुसार ध्वनि विस्तारक यंत्रों और डोंडी पिटवाकर लोगों को प्रतिबंधों की जानकारी दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त आदेश की प्रतियां जिला कार्यालय, नगर निकायों, जनपद पंचायतों, तहसील कार्यालयों और पुलिस थानों के सूचना पटल पर लगाई जाएंगी।
प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर भी आदेश की जानकारी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन चाहता है कि अधिक से अधिक लोगों को नए नियमों की जानकारी मिले और अनजाने में प्रतिबंधों का उल्लंघन न हो।
पेयजल बचाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता
झाबुआ जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में पीने के पानी का संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण है।
नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके तहत पानी की अनावश्यक बर्बादी रोकने और उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि जल स्रोतों की नियमित निगरानी और आम जनता के सहयोग से संभावित पेयजल संकट के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
अब सबसे बड़ी चुनौती प्रतिबंधों का प्रभावी पालन कराने के साथ लोगों की आवश्यक जल जरूरतों को पूरा करना होगी।
फिलहाल पूरे झाबुआ जिले में जल अभावग्रस्त क्षेत्र संबंधी आदेश लागू है और निजी बोरवेल खनन तथा निर्धारित जल स्रोतों से प्रतिबंधित तरीके से पानी निकालने पर रोक रहेगी।





