मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में 75 सेवाओं के लिए साइबर पंजीयन प्रारंभ: सीएम मोहन यादव

SHIDDHANT
16 Feb 2026 8:47 PM IST
मध्य प्रदेश में 75 सेवाओं के लिए साइबर पंजीयन प्रारंभ: सीएम मोहन यादव
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Bhopal भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश भारत का पहला राज्य है, जिसने डिजिटल क्रांति के माध्यम से 75 से अधिक सेवाओं के लिए साइबर पंजीयन प्रारंभ किया है। राजधानी में पंजीयन विभाग के साइबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार विकास के साथ प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, शुचिता, तत्परता, नवाचार और जनकल्याण को प्रोत्साहन दे रही है। पंजीयन विभाग के साइबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ इसी संकल्प की सिद्धि का प्रमाण है। संपदा-1.0 और संपदा 2.0 के बाद प्रदेश में सायबर पंजीयन की प्रक्रिया का आरंभ होना तकनीक आधारित सुशासन की नई शुरुआत है।
उन्होंने आगे कहा कि मध्य प्रदेश तेजी से बदल रहा है। मध्य प्रदेश भारत का पहला राज्य है, जिसने डिजिटल क्रांति के माध्यम से लोन, मुख्तयारनामा, माइनिंग लीज, हलफनामा, पावर आफ अटार्नी, पार्टनरशिप डीड जैसी 75 से अधिक सेवाओं के लिए साइबर पंजीयन प्रारंभ किया है। राज्य सरकार के इस नवाचार से पेपरलेस और कैशलेस प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिल रहा है। यह नई पीढ़ी के लिए पर्यावरण और पारदर्शिता के मामले में महत्वपूर्ण होगा।
सीएम ने कहा कि अब शासन और उसके उपक्रमों के अंतरण दस्तावेज भी पेपरलेस रजिस्ट्रेशन के माध्यम से पूरे होंगे। हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण के अंतरण के लिए जनता को पंजीयन कार्यालय नहीं आना पड़ेगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वीडियो केवाईसी सहित सभी कार्य होंगे, इससे धन और समय दोनों की बचत होगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ई-गवर्नेंस चर्चा करते हुए कहा कि अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। राज्य सरकार ने 55 जिलों में साइबर तहसील परियोजना को लागू किया है, जिसमें राजस्व बंटवारा, नामांतरण की प्रक्रिया भी संपदा 2.0 से हो सकती है।
इस मौके पर उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि वर्ष 2024-25 में दस्तावेजों के पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग के लिए एडवांस सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 लागू किया। इससे चल और अचल संपत्ति के दस्तावेज डिजिटल और पेपरलेस तरीके से पंजीकृत हो रहे हैं। कई दस्तावेज तो ऐसे हैं जिनके लिए उप-पंजीयक कार्यालय भी नहीं आना पड़ता है।
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