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इंदौर। साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत शहर की क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने एक 19 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जिसका बैंक खाता कथित तौर पर कई राज्यों में हुई साइबर धोखाधड़ी की 10 शिकायतों से जुड़ा पाया गया है। इन शिकायतों में करीब 5 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ के तहत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य उन संदिग्ध बैंक खातों की पहचान करना और कार्रवाई करना है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को प्राप्त करने या आगे ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। ऐसे खातों को साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।
क्राइम ब्रांच अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड, तकनीकी जानकारी और साइबर अपराध से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया गया। इसके बाद संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की गई और उनके मालिकों की जानकारी जुटाई गई।
I4C और NCRP से मिली जानकारी के आधार पर कार्रवाई
एडिशनल DCP (क्राइम) राजेश डंडोतिया ने बताया कि यह जांच गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों का पता लगाने के लिए पुलिस ने कई स्तरों पर जांच की। बैंकिंग ट्रांजेक्शन, तकनीकी डेटा और साइबर शिकायतों के रिकॉर्ड का मिलान किया गया।
जांच में ऐसे खातों की पहचान की गई, जिनमें कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा की गई थी या फिर वहां से दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई थी।
मुसाखेड़ी निवासी युवक का निकला खाता
पुलिस जांच में सामने आया कि संदिग्ध बैंक खाता मुसाखेड़ी क्षेत्र के इंदिरा एकता नगर निवासी 19 वर्षीय वासु पंवार के नाम पर था।
क्राइम ब्रांच ने बैंक खाते की जानकारी का मिलान NCRP और साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज शिकायतों से किया। जांच में पता चला कि यह खाता कई राज्यों में दर्ज साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा हुआ है।
पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि युवक खुद साइबर अपराध में शामिल था या फिर उसने किसी लालच में अपना बैंक खाता दूसरे लोगों को उपलब्ध कराया था।
म्यूल अकाउंट के जरिए होती है ठगी की रकम की हेराफेरी
साइबर अपराधी अक्सर ठगी की रकम को सीधे अपने बैंक खातों में नहीं लेते। इसके लिए वे दूसरे लोगों के बैंक खाते का इस्तेमाल करते हैं। कई बार लोगों को पैसे का लालच देकर या कमीशन देने का वादा कर उनके खाते किराये पर ले लिए जाते हैं।
इन खातों के जरिए ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस अब ऐसे सभी खातों की जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया गया है।
ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत लगातार कार्रवाई
क्राइम ब्रांच द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत लगातार संदिग्ध म्यूल अकाउंट्स की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए केवल मुख्य आरोपियों पर ही नहीं बल्कि उनके लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों पर भी कार्रवाई जरूरी है।
अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में भी ऐसे खातों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर या इंटरनेट बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
अधिकारियों का कहना है कि कई लोग बिना जानकारी के अपना खाता दूसरों को उपलब्ध करा देते हैं, जिसका इस्तेमाल गंभीर साइबर अपराधों में हो सकता है। ऐसे मामलों में खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
फिलहाल क्राइम ब्रांच गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है और साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर अपराध से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।





