मध्य प्रदेश

जुड़वा भाइयों के अपहरण-हत्याकांड मामले में कोर्ट का आया फैसला, आरोपियों को मिली ये सजा

jantaserishta.com
26 July 2021 1:09 PM GMT
जुड़वा भाइयों के अपहरण-हत्याकांड मामले में कोर्ट का आया फैसला, आरोपियों को मिली ये सजा
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एक आरोपी जेल में आत्महत्या कर चुका है.

सतना. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh News) के सतना जिले में हुए मासूम जुड़वा भाइयों के अपहण-हत्याकांड में फैसला आ गया है. कोर्ट ने इस हत्याकांड में शामिल पांचों आरोपियों को दोषी पाते हुए अलग अलग धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. एक सजा पूरी होने पर दूसरी सजा शुरू होगी. इस अपहरण और हत्याकांड में 6 लोग शामिल थे. एक आरोपी जेल में आत्महत्या कर चुका है.

गौरतलब है कि साल 2019 की 12 फरवरी को चित्रकूट में तेल कारोबारी बृजेश रावत के 6 साल के मासूम जुड़वा बेटों श्रेयांश और प्रियांश का अपहरण कर लिया गया था. अपरहणकर्ताओं ने 1 करोड़ की फिरौती मांगी थी. पहली किश्त के 20 लाख रुपए देने के बाद भी आरोपियों ने दोनों मासूमों की हत्या कर दी थी. आरोपियों ने मासूमों के शवों को पत्थर से बांधकर यमुना नदी में फेंक दिया था.
डबल मर्डर ने हिला दिया था पूरा प्रदेश-इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था. सतना की जनता सड़कों पर आ गई थी. हत्याकांड की गूंज विधानसभा तक भी पहुंची थी. पुलिस ने घटना के मुख्य दोषी राजू द्विवेदी और पद्मकान्त शुक्ला समेत लकी तोमर, विक्रम जीत सिंह, बंटा और रामकेश यादव को गिरफ्तार कर लिया गया था. पुलिस ने पद्मकान्त, लकी तोमर, राजू को हत्या करने और विक्रमजीत सिंह व बंटा को साक्ष्य छुपाने का दोषी पाया. रामकेश यादव ने जेल में आत्महत्या कर ली थी. पुलिस ने कोर्ट में 2500 पन्नों की केस शीट पेश की थी.
सतना की अदालत ने अपने फैसले में इस हत्याकांड के पांचों आरोपियों को दोषी पाया. पद्मकान्त शुक्ला चित्रकूट, लकी तोमर और राजू द्विवेदी को हत्या करने और विक्रमजीत सिंह जमुई बिहार और अपूर्व यादव उर्फ बंटा को अपहरण और हत्या का साक्ष्य छुपाने का दोषी पाया गया. पद्मकांत शुक्ला, राजू द्विवेदी और लकी तोमर को अदालत ने धारा 302 और धारा 364 A, 328 के तहत दोषी पाया, वहीं विक्रम और अपूर्व यादव को 120 B और 364 A, 328 के तहत दोषी पाया.
अदालत का फैसला सुनने दोनों मृतक मासूमों श्रेयांश और प्रियांश के पिता ब्रजेश रावत भी अदालत में मौजूद थे. अदालत का फैसला आते ही वो फफक कर रो पड़े. परिवार इन दरिंदो को फांसी की सजा देने की मांग कर रहा था. फैसला सुनने के बाद पिता ने कहा मैं जब तक जीवित हूं, उच्च अदालत तक जाऊंगा
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