मध्य प्रदेश

मंदिर प्रवेश को लेकर बयान पर विवाद: पांडा संघ अध्यक्ष कपिल केलारकर ने धर्मांतरण पर रखी शर्त

SHIDDHANT
27 Jan 2026 9:56 PM IST
मंदिर प्रवेश को लेकर बयान पर विवाद: पांडा संघ अध्यक्ष कपिल केलारकर ने धर्मांतरण पर रखी शर्त
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Khandva खंडवा: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में मंदिर प्रवेश को लेकर दिए गए एक बयान ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। पांडा संघ के अध्यक्ष कपिल केलारकर ने मंदिरों में प्रवेश को लेकर धर्म से जुड़ी शर्तों की बात कही है, जिस पर विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कपिल केलारकर ने एक बयान में कहा कि प्रारंभ में सभी लोग हिंदू धर्म के अनुयायी थे और यदि कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म को अपनाकर मंदिर दर्शन के लिए आता है तो उसका स्वागत है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सनातन धर्म को स्वीकार नहीं करता, तो उसे मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनके इस बयान को लेकर धार्मिक स्वतंत्रता, परंपरा और संविधानिक अधिकारों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पांडा संघ अध्यक्ष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में मंदिर प्रबंधन, धार्मिक पहचान और परंपराओं को लेकर लगातार बहस होती रही है। केलारकर का कहना है कि मंदिर सनातन संस्कृति और परंपराओं के केंद्र हैं और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को उन मूल्यों और आस्थाओं का सम्मान करना चाहिए, जिन पर यह धार्मिक स्थल आधारित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना या भेदभाव करना नहीं है, बल्कि मंदिर की धार्मिक मर्यादा और परंपराओं की रक्षा करना है। उनके अनुसार, मंदिरों में प्रवेश करने वाले लोगों को सनातन धर्म की आस्था और नियमों को स्वीकार करना चाहिए, ताकि धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
हालांकि, इस बयान के बाद कुछ सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता देता है और मंदिर जैसे सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर प्रवेश को धर्म परिवर्तन से जोड़ना विवादास्पद हो सकता है। कुछ लोगों ने इसे समाज में विभाजन पैदा करने वाला बयान बताया है। वहीं, केलारकर के समर्थकों का कहना है कि यह बयान धार्मिक परंपराओं की रक्षा के उद्देश्य से दिया गया है और इसे गलत संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि संस्कृति और आस्था के प्रतीक होते हैं, जहां परंपराओं का पालन आवश्यक है।
स्थानीय प्रशासन की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। खंडवा में यह मुद्दा अब सामाजिक और धार्मिक विमर्श का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर राजनीतिक दलों, धार्मिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं।
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