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CM मोहन यादव ने की मां काली की पूजा, उज्जैन में निकली ऐतिहासिक नगर पूजा

उज्जैन। मध्य प्रदेश में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। महानवमी और महाअष्टमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के बीच प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन की बंगाली कॉलोनी स्थित कालीबाड़ी मंदिर में मां काली की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। दूसरी ओर उज्जैन के ऐतिहासिक चौबीस खंभा माता मंदिर से सोमवार सुबह पारंपरिक नगर पूजा का शुभारंभ हुआ।
उज्जैन में आयोजित नगर पूजा में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह आयोजन शहर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। नगर की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण के उद्देश्य से विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों में पूजा की जाती है।
#WATCH | Ujjain | Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav offered prayers at the Maa Kali Temple in Bengali Market https://t.co/yPeyDOhZCR
— ANI (@ANI) October 19, 2026
मुख्यमंत्री मोहन यादव पहुंचे मां काली के दरबार
महानवमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन की बंगाली कॉलोनी स्थित कालीबाड़ी मंदिर पहुंचे।
यहां उन्होंने मां काली के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में देवी मां से मध्य प्रदेश के नागरिकों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की कामना की।
उन्होंने सोशल मीडिया पर भी पूजा-अर्चना से संबंधित जानकारी साझा की।
कालीबाड़ी मंदिर उज्जैन में बंगाली समाज की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां नवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा आयोजित की जाती है।
नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़
आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रही।
मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना जाता है।
मंदिर देश के प्रमुख बगलामुखी उपासना केंद्रों में शामिल है।
यहां मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं।
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था में बदलाव किए थे।
श्रद्धालुओं के लिए सुबह साढ़े पांच बजे से रात 11 बजे तक दर्शन की व्यवस्था निर्धारित की गई थी।
मंदिर में विशेष हवन और धार्मिक अनुष्ठान
शारदीय नवरात्रि के दौरान मां बगलामुखी मंदिर में विशेष पूजा, मंत्र जाप और हवन का आयोजन किया गया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धालु मां बगलामुखी की आराधना बाधाओं से मुक्ति, मानसिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए करते हैं।
नलखेड़ा स्थित मंदिर में देवी की आराधना से जुड़ी विभिन्न परंपराएं प्रचलित हैं।
नवरात्रि के दिनों में यहां विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण सुरक्षा, पार्किंग और दर्शन की व्यवस्था महत्वपूर्ण रही।
चौबीस खंभा मंदिर से शुरू हुई ऐतिहासिक नगर पूजा
उज्जैन में सोमवार सुबह करीब आठ बजे चौबीस खंभा माता मंदिर से पारंपरिक नगर पूजा का शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
नगर पूजा की शुरुआत देवी महामाया और महालया की पूजा-अर्चना से की गई।
परंपरा के अनुसार, देवी प्रतिमाओं को मदिरा का भोग भी अर्पित किया गया।
इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और कोटवारों की अलग-अलग टोलियां शहर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पूजा करने के लिए रवाना हुईं।
दो हजार साल पुरानी मानी जाती है परंपरा
उज्जैन की नगर पूजा को अत्यंत प्राचीन धार्मिक परंपरा माना जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल से जुड़ी हुई है।
यह परंपरा लगभग दो हजार वर्षों से चली आने की मान्यता है।
इस अनुष्ठान के अंतर्गत शहर की रक्षा, सुख-शांति और समृद्धि के लिए देवी-देवताओं की आराधना की जाती है।
नगर पूजा में प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी भी इसकी एक विशेष पहचान है।
यह अनुष्ठान उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है।
40 से अधिक मंदिरों में की जाती है पूजा
नगर पूजा के दौरान लगभग 27 किलोमीटर लंबे मार्ग पर विभिन्न मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
इस दौरान देवी मंदिरों के अलावा भैरव और हनुमान मंदिरों में भी पूजा-अर्चना की परंपरा है।
जानकारी के अनुसार, इस धार्मिक आयोजन में 40 से अधिक मंदिरों को शामिल किया जाता है।
सरकारी कर्मचारियों और कोटवारों की टीमें निर्धारित मार्गों पर जाकर पूजा संपन्न कराती हैं।
इस आयोजन का उद्देश्य नगर की सुख-शांति और जनकल्याण की कामना करना है।
महामाया और महालया देवी का विशेष महत्व
उज्जैन के चौबीस खंभा मंदिर में देवी महामाया और महालया की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
मंदिर का नाम यहां मौजूद 24 कलात्मक स्तंभों के कारण पड़ा है।
जिला प्रशासन की आधिकारिक पर्यटन जानकारी के अनुसार, मंदिर की स्थापत्य संरचना नौवीं या दसवीं शताब्दी की मानी जाती है।
यह धार्मिक स्थल उज्जैन के प्रमुख ऐतिहासिक मंदिरों में शामिल है।
नवरात्रि के दौरान यहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
नगर पूजा में मदिरा अर्पित करने की परंपरा
उज्जैन की नगर पूजा की एक विशेष पहचान देवी-देवताओं को मदिरा का भोग अर्पित करने की धार्मिक परंपरा है।
सोमवार को चौबीस खंभा मंदिर में देवी महामाया और महालया की पूजा के दौरान इस परंपरा का पालन किया गया।
यह अनुष्ठान स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन पूजा पद्धतियों का हिस्सा है।
इसके बाद नगर के अन्य निर्धारित मंदिरों में भी पारंपरिक पूजा की गई।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा व्यवस्था
नवरात्रि के दौरान प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया।
आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने पूर्व में दर्शन, पार्किंग तथा सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया था।
कलेक्टर प्रीति यादव और पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह ने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाएं बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए थे।
धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही और भीड़ प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई।
महानवमी पर देवी आराधना का विशेष महत्व
शारदीय नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है।
महानवमी के अवसर पर मां सिद्धिदात्री की पूजा करने की परंपरा है।
इस दिन विभिन्न मंदिरों में हवन, आरती और कन्या पूजन जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
श्रद्धालु परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए देवी मां से प्रार्थना करते हैं।
मध्य प्रदेश में भी नवरात्रि के दौरान अनेक स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक आयोजन किए गए।
आस्था और परंपरा का दिखा अनूठा संगम
सोमवार को मध्य प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में मां काली की पूजा कर प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की, जबकि चौबीस खंभा मंदिर से पारंपरिक नगर पूजा का आयोजन किया गया।
वहीं, मां बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं ने देवी के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की।
इन आयोजनों ने प्रदेश की धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।





