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सागर। राज्य में नागरिकों की भागीदारी से चल रहे सफाई अभियानों की चर्चा के बीच सागर जिले से भी एक प्रेरक पहल सामने आई है। रामजी लोधी नाम के एक नागरिक ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर एक मंदिर परिसर में स्थित पेयजल सुविधा की सफाई की। यह जगह लंबे समय से गंदगी, काई और चिकनाई से भरी हुई थी और वहां आने-जाने वाले लोगों को इस्तेमाल में परेशानी हो रही थी।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में रामजी लोधी को पहले उस पेयजल सुविधा का इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है। इसी दौरान उनकी नजर वहां फैली गंदगी और जमी हुई काई पर पड़ी। स्थिति देखकर उन्होंने इसे नजरअंदाज करने के बजाय खुद सफाई करने का फैसला किया।
रामजी ने अपने दो दोस्तों को मौके पर बुलाया। इसके बाद तीनों ने डिटर्जेंट, ब्रश और झाड़ू की मदद से सफाई का काम शुरू किया। कई घंटे तक लगातार मेहनत के बाद उन्होंने पेयजल सुविधा के आसपास जमी गंदगी, काई और चिकनाई को साफ किया।
Where others ignored the mess, Ramji Lodhi and his team chose to take responsibility. At a temple complex in Sagar, Madhya Pradesh, drinking water taps were covered in algae, grease and dirt—so unhygienic that people hesitated to use them. Instead of simply complaining, Ramji and his team rolled up their sleeves and cleaned the area themselves. After hours of effort, the space was restored and made usable for everyone. Ramji believes public spaces are not just the government’s responsibility—they belong to all of us. Because civic sense isn’t just about following rules. It’s about caring for the spaces we all share. Credits : help_by_ram1 #CivicSense #Inspiring #Cleaning [Civic Sense Revelation, Ramji Lodhi and his team cleaning a neglected drinking water area at a temple in Sagar Madhya Pradesh, young volunteers taking responsibility for keeping public drinking water facilities clean]
— The Better India (@thebetterindia) October 6, 2026
वीडियो में देखा जा सकता है कि सफाई से पहले जगह की हालत काफी खराब थी। पानी लेने वाले लोगों के लिए सतह पर जमी चिकनाई और काई असुविधाजनक होने के साथ फिसलन का कारण भी बन सकती थी। तीनों युवकों ने पहले पूरे हिस्से पर पानी डाला और फिर ब्रश से रगड़-रगड़कर सफाई की।
इसके बाद झाड़ू और अन्य साधनों से आसपास की गंदगी हटाई गई। लगातार प्रयास के बाद पेयजल सुविधा का पूरा हिस्सा साफ दिखाई देने लगा। सफाई पूरी होने के बाद वह जगह आम लोगों के इस्तेमाल के लिए बेहतर स्थिति में नजर आई।
रामजी लोधी और उनके दोस्तों की यह पहल सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। इसे नागरिकों के नेतृत्व में सफाई की एक सकारात्मक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
इस पहल की खास बात यह रही कि इसके लिए किसी सरकारी अभियान या प्रशासनिक निर्देश का इंतजार नहीं किया गया। गंदगी देखकर रामजी ने खुद जिम्मेदारी लेने का फैसला किया और अपने दोस्तों के साथ मिलकर काम शुरू कर दिया।
ऐसी घटनाएं यह संदेश देती हैं कि सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। यदि नागरिक भी अपने आसपास की व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान दें तो छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
मंदिर परिसरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग आते-जाते हैं। ऐसे स्थानों पर पीने के पानी की सुविधा का साफ-सुथरा होना विशेष रूप से जरूरी है। गंदगी और काई जमा होने से न केवल सुविधा का इस्तेमाल मुश्किल होता है, बल्कि आसपास का वातावरण भी खराब दिखाई देता है।
रामजी और उनके दोस्तों ने सफाई करते समय केवल दिखने वाली गंदगी को हटाने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने सतह को कई बार रगड़ा, जिससे जमा हुई पुरानी चिकनाई और काई भी हटाई जा सके।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कई लोग इस पहल को अन्य नागरिकों के लिए प्रेरणादायक बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि हर व्यक्ति अपने आसपास के सार्वजनिक स्थानों के प्रति थोड़ी जिम्मेदारी दिखाए तो शहरों और गांवों में सफाई की स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है।
हाल के समय में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नागरिकों की भागीदारी से सफाई के कई अभियान सामने आए हैं। इनमें नदी, तालाब, धार्मिक स्थल और सार्वजनिक स्थानों की सफाई के लिए लोग खुद आगे आ रहे हैं।
इसी क्रम में सागर की यह घटना भी चर्चा में है। यहां तीन लोगों ने छोटी-सी पहल के जरिए उस जगह की स्थिति बदल दी, जिसे लंबे समय से उपेक्षित छोड़ दिया गया था।
यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित देखरेख कितनी जरूरी है। यदि पेयजल स्थानों की समय-समय पर सफाई की जाए तो गंदगी और काई जमा होने की स्थिति से बचा जा सकता है।
स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाओं के रखरखाव के लिए संबंधित प्रबंधन और जिम्मेदार संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद नागरिकों की भागीदारी व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकती है।
रामजी लोधी ने जिस तरह बिना किसी दिखावे के सफाई का काम शुरू किया, उसे लोग व्यक्तिगत जिम्मेदारी की मिसाल मान रहे हैं। उनके साथियों ने भी पूरा सहयोग दिया और कई घंटों तक सफाई में जुटे रहे।
वीडियो में सफाई से पहले और बाद का अंतर साफ नजर आता है। जिस जगह पर पहले काई और गंदगी जमी थी, वह बाद में काफी साफ दिखाई देती है।
इस तरह की पहल बच्चों और युवाओं के लिए भी सकारात्मक संदेश देती है। सार्वजनिक जगहों को अपना समझकर उनकी साफ-सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी लेना सामाजिक व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सफाई अभियान में सबसे अहम बात निरंतरता है। एक बार सफाई कर देने से समस्या स्थायी रूप से खत्म नहीं होती। इसके लिए नियमित देखरेख और लोगों की जिम्मेदार भागीदारी जरूरी है।
मंदिर आने वाले लोगों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे पेयजल सुविधा और आसपास के क्षेत्र में कचरा न फैलाएं। साफ जगह को साफ बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।
रामजी लोधी और उनके दोस्तों की पहल ने यह साबित किया कि किसी व्यवस्था की कमी को केवल शिकायत का विषय बनाने के बजाय उसे सुधारने के लिए स्वयं भी कदम उठाया जा सकता है।
इस घटना को बिट्टू तबाही के नदी सफाई अभियान से प्रेरित नागरिक भागीदारी की कड़ी के रूप में भी देखा जा रहा है। राज्य में ऐसे प्रयास लोगों को अपने आसपास के वातावरण के प्रति सजग बना रहे हैं।
सागर जिले में सामने आई यह पहल अब सोशल मीडिया के जरिए दूसरे लोगों तक भी पहुंच रही है। वीडियो देखकर कई लोग इसे अपने क्षेत्र में दोहराने की बात कर रहे हैं।
फिलहाल मंदिर परिसर की वह पेयजल सुविधा फिर से लोगों के इस्तेमाल के लायक बना दी गई है। रामजी लोधी और उनके दो दोस्तों की मेहनत ने एक उपेक्षित जगह की तस्वीर बदल दी है।
यह छोटी-सी पहल नागरिक जिम्मेदारी का बड़ा संदेश दे रही है—सफाई केवल किसी विभाग या संस्था का काम नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है।





