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गांधी सागर अभयारण्य में बढ़ेगा चीतों का कुनबा, नई मादा चीता CCB-2 को बाड़े में छोड़ेंगे CM

मंदसौर। मध्य प्रदेश का गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य चीता प्रोजेक्ट के तहत एक और महत्वपूर्ण पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। रविवार को बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता CCB-2 को गांधी सागर अभयारण्य के बाड़े में छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव दोपहर करीब 3:30 बजे से 4 बजे के बीच मादा चीता को बाड़े में रिलीज करेंगे। इसके साथ ही गांधी सागर में चीतों की संख्या बढ़ जाएगी और यहां चीता आबादी को आगे बढ़ाने की कोशिशों को नई गति मिलेगी।
जानकारी के मुताबिक CCB-2 को रविवार को कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य लाया जाएगा। स्थानांतरण के दौरान वन विभाग और चीता प्रोजेक्ट से जुड़े विशेषज्ञों की टीम मौजूद रहेगी। चीता के स्वास्थ्य और व्यवहार पर लगातार नजर रखते हुए उसे सुरक्षित तरीके से गांधी सागर पहुंचाने की तैयारी की गई है।
गांधी सागर में फिलहाल तीन चीते हैं, जिनमें दो नर और एक मादा शामिल हैं। यहां मौजूद मादा चीता करीब एक साल से अभयारण्य में है, लेकिन अब तक उससे प्रजनन में सफलता नहीं मिली है। इसी को देखते हुए चीता प्रोजेक्ट के तहत एक और मादा चीता को यहां लाने का फैसला किया गया है। इससे भविष्य में गांधी सागर में चीतों की आबादी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है।
नई मादा चीता CCB-2 को सीधे खुले जंगल में छोड़ने के बजाय पहले निर्धारित बाड़े में रखा जाएगा। यह प्रक्रिया नए वातावरण के अनुकूल होने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। बाड़े में रहने के दौरान विशेषज्ञ उसके स्वास्थ्य, भोजन, गतिविधियों और नए क्षेत्र के प्रति उसके व्यवहार की निगरानी करेंगे। परिस्थितियां अनुकूल पाए जाने के बाद आगे की प्रक्रिया विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार तय की जाएगी।
चीता प्रोजेक्ट के लिए गांधी सागर अभयारण्य को मध्य प्रदेश के प्रमुख स्थलों में विकसित किया जा रहा है। कूनो नेशनल पार्क के बाद गांधी सागर को भी चीतों के लिए वैकल्पिक और अतिरिक्त आवास के रूप में तैयार किया गया है। यहां पर्याप्त क्षेत्र, शिकार की उपलब्धता और अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से चीतों को बसाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
नई मादा चीता के आने से अभयारण्य में चीतों का लिंग अनुपात भी बेहतर होगा। अभी दो नर के मुकाबले केवल एक मादा चीता मौजूद है। CCB-2 के आने के बाद यहां दो नर और दो मादा चीते हो जाएंगे। चीता प्रोजेक्ट के दीर्घकालिक उद्देश्यों में केवल चीतों को नए क्षेत्रों में बसाना ही नहीं बल्कि उनकी स्थायी और प्रजनन करने वाली आबादी विकसित करना भी शामिल है।
गांधी सागर में पहले से मौजूद मादा चीता के गर्भवती नहीं होने के बाद विशेषज्ञों की नजर अब नई मादा चीता पर भी रहेगी। हालांकि वन्यजीवों में प्रजनन कई प्राकृतिक और व्यवहार संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। नए वातावरण में पूरी तरह अनुकूल होने, नर और मादा के व्यवहार तथा स्वास्थ्य सहित कई कारक इसमें भूमिका निभाते हैं। इसलिए नई मादा चीता को पहले पर्याप्त समय देकर वातावरण के अनुरूप ढालने पर ध्यान दिया जाएगा।
वन विभाग के लिए CCB-2 का स्थानांतरण भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कूनो से गांधी सागर तक यात्रा के दौरान चीता को तनाव से बचाने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञ निगरानी की जरूरत होगी। गांधी सागर पहुंचने के बाद भी उसकी गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में होने वाला यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण परियोजना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। राज्य में कूनो नेशनल पार्क चीता प्रोजेक्ट का प्रमुख केंद्र रहा है, जबकि अब गांधी सागर को भी इस परियोजना के दूसरे महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य मंदसौर और नीमच क्षेत्र में फैला हुआ है। विशाल वन क्षेत्र और प्राकृतिक वातावरण इसे वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाते हैं। चीता प्रोजेक्ट के तहत यहां आवश्यक बुनियादी ढांचे, निगरानी व्यवस्था और प्रबंधन सुविधाओं को विकसित किया गया है।
चीता पुनर्वास परियोजना का उद्देश्य भारत में दशकों पहले विलुप्त हो चुके चीतों की आबादी को दोबारा स्थापित करना है। मध्य प्रदेश इस महत्वाकांक्षी वन्यजीव संरक्षण परियोजना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। पहले कूनो और फिर गांधी सागर में चीतों को बसाने की प्रक्रिया इसी योजना का हिस्सा है।
रविवार को CCB-2 के गांधी सागर पहुंचने के बाद अभयारण्य में चीतों की कुल संख्या चार हो जाएगी। नई मादा चीता को बाड़े में छोड़ने के बाद विशेषज्ञ उसके व्यवहार और स्वास्थ्य की नियमित समीक्षा करेंगे। आगे उसके खुले क्षेत्र में छोड़े जाने और अन्य चीतों के साथ संपर्क से जुड़े फैसले वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर लिए जाएंगे।
नई मादा चीता के आगमन से गांधी सागर में चीता प्रोजेक्ट का दायरा और बढ़ने वाला है। अब वन्यजीव विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि CCB-2 नए वातावरण में कितनी जल्दी अनुकूल होती है और भविष्य में गांधी सागर में चीतों की स्थायी आबादी विकसित करने में उसकी क्या भूमिका रहती है।





