मध्य प्रदेश

दवा कंपनी की फ्रेंचाइजी का झांसा देकर लाखों की ठगी, अपराध दर्ज

Shantanu Roy
28 May 2022 4:37 PM IST
दवा कंपनी की फ्रेंचाइजी का झांसा देकर लाखों की ठगी, अपराध दर्ज
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जबलपुर। आयुर्वेदिक दवा कंपनी की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर जालसाजों ने एक व्यापारी को साढ़े आठ लाख रुपये की चपत लगा दी। यादव कालोनी लार्डगंज निवासी व्यापारी की शिकायत पर स्टेट सायबर सेल ठगों की तलाश में जुटी है। जानकारी के अनुसार यादव कालोनी निवासी व्यापारी इंटीरियर डिजाइनर है तथा निर्माण कार्य का काम करता है।

व्यापार में वृद्धि के लिए वह नए कारोबार की तलाश में था। गूगल सर्च पर व्यवसाय संबंधी जानकारी लेने के दौरान उसे आयुर्वेदिक दवा कंपनी की वेबसाइट का पता चला था। गूगल सर्च पर मिली इस वेबसाइट के चक्कर में वह ठगों के चंगुल में फंस गया। स्टेट सायबर सेल जबलपुर इकाई के एसपी लोकेश सिंहा के निर्देश पर डीएसपी आरके मालवीय द्वारा शिकायत की जांच की जा रही है।

गूगल से लिया नंबर
गूगल पर वेबसाइट सर्च करने के बाद व्यापारी ने उस पर दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। पंकज आचार्य नामक व्यक्ति ने उससे बात की तथा स्वयं को आयुर्वेदिक दवा कंपनी का अधिकारी बताया। दवा कंपनी से जुड़े नामचीन लोगों की फोटो व उनके संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी वेबसाइट पर दी गई थी। जिससे वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर व्यापारी का भरोसा बढ़ गया। जिसके बाद उसने बातचीत करने वाले पंकज नामक व्यक्ति को अपनी पहचान व कारोबार से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भेज दिए।
25 हजार से शुरू हुई ठगी
व्यापारी व पंकज के बीच इंटरनेट व मोबाइल पर बातचीत हाेने लगी। जिसके बाद पंकज ने व्यापारी को कंपनी का एक प्रमाण पत्र भेजा और उसके बदले 25 हजार रुपये की मांग की। व्यापारी ने पंकज द्वारा बताए गए उत्तराखंड के एक बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कर दी। जिसके बाद पंकज ने राजेंद्र गौतम नामक व्यक्ति से व्यापारी की बातचीत कराई। राजेंद्र को कंपनी का महामंत्री बताकर परिचय कराया था। राजेंद्र ने फ्रेंचाइजी देने के लिए धरोहर राशि बतौर पांच लाख रुपये मांगे। जिसके बाद पंजक व राजेंद्र प्रक्रिया शुल्क समेत अन्य कारण बताकर व्यापारी से रकम वसूलते रहे।
दो माह केे भीतर लाखों रुपये जमा कराए
व्यापारी ने स्टेट सायबर अधिकारियों को बताया कि पंकज व राजेंद्र ने दो माह के भीतर उत्तराखंड के अलग-अलग बैंक खातों में साढ़े आठ लाख रुपये जमा करा लिए। इंटरनेट व मोबाइल पर हुई चर्चा के दौरान राजेंद्र व पंकज ने जबलपुर आने का आश्वासन दिया था। दवा कारोबार के लिए प्रस्तावित जगह का दोनों जायजा लेना चाह रहे थे। लाखों रुपये जमा कराने के बाद दोनों ने संपर्क तोड़ दिया। उनके मोबाइल फोन बंद हो गए तथा इंटरनेट मीडिया पर भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।
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