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FIR से सुप्रीम कोर्ट तक 3 साल में निपटेंगे मामले: अमित शाह

भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद एफआईआर दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक किसी आपराधिक मामले के निपटारे की प्रक्रिया तीन साल के भीतर पूरी करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों को पूरी तरह क्रियान्वित होने में करीब डेढ़ साल और लग सकता है। शाह ने यह बात मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद राज्य स्तरीय पशुपालक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।
अमित शाह ने कहा कि देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था लंबे समय तक मामलों के निपटारे में देरी के लिए जानी जाती रही है। सरकार ने इसी स्थिति को बदलने के उद्देश्य से नए आपराधिक कानून लागू किए हैं। उन्होंने दावा किया कि इनके पूर्ण क्रियान्वयन के बाद एफआईआर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने की व्यवस्था मजबूत होगी।
मध्यप्रदेश में 50 एकड़ भूमि पर गोवंश और भैंस की नस्ल में सुधार होगा।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) October 3, 2026
- माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah जी#दुग्ध_क्रांति_MP pic.twitter.com/pbAKLwR4hA
भारत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 1 जुलाई 2024 से लागू हैं। इन कानूनों ने क्रमशः भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के पुराने ढांचे की जगह ली है। केंद्र सरकार के अनुसार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इनके क्रियान्वयन के लिए नियम, डिजिटल एप्लिकेशन और प्रशिक्षण संबंधी कदम उठाए गए हैं।
शाह ने अपने संबोधन में कहा कि वह विशेष रूप से देश के युवाओं को बताना चाहते हैं कि लगभग डेढ़ साल बाद नए आपराधिक कानूनों का पूरा क्रियान्वयन होने पर एफआईआर दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक किसी मामले के निपटारे की प्रक्रिया तीन साल में पूरी करने की दिशा में व्यवस्था काम करेगी। यह सरकार का घोषित लक्ष्य है; व्यवहार में समयसीमा का पालन पुलिस, अभियोजन और अदालतों समेत पूरी आपराधिक न्याय प्रणाली के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित पांच दिवसीय प्रदर्शनी में नए आपराधिक कानूनों और न्याय प्रक्रिया में आए बदलावों को आम लोगों के सामने रखा गया है। प्रदर्शनी में अपराध की सूचना मिलने से लेकर पुलिस कार्रवाई, घटनास्थल की जांच, सबूत जुटाने, फॉरेंसिक परीक्षण, गिरफ्तारी, अभियोजन और अदालत में न्याय मिलने तक की प्रक्रिया दिखाई जा रही है। इसमें नए कानूनों के तहत निर्धारित समयसीमा वाले प्रावधानों की जानकारी भी दी गई है।
प्रदर्शनी में तकनीक और वैज्ञानिक जांच पर विशेष जोर दिया गया है। ई-एफआईआर, फॉरेंसिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और डिजिटल प्रक्रियाओं से जुड़ी व्यवस्था को भी प्रदर्शित किया गया। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक का अधिक उपयोग करना और मामलों को समय पर आगे बढ़ाना है।
नए कानूनों में Zero FIR और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपराध की सूचना देने जैसी सुविधाओं का प्रावधान है। सरकार ने जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के लिए भी समयसीमाएं निर्धारित किए जाने को नए ढांचे की प्रमुख विशेषताओं में शामिल किया है। गृह मंत्रालय इससे पहले भी कह चुका है कि तीन साल के भीतर न्याय सुनिश्चित करना आपराधिक न्याय सुधारों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में पुराने औपनिवेशिक कानूनों और नए कानूनों के उद्देश्य के बीच अंतर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान बनाए गए आपराधिक कानूनों का प्रमुख उद्देश्य तत्कालीन शासन व्यवस्था की रक्षा करना था, जबकि नए कानूनों का मूल उद्देश्य भारतीय नागरिकों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करते हुए न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों का मूल सिद्धांत केवल दंड नहीं बल्कि न्याय है।
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने पशुपालकों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भोपाल में बड़ी संख्या में पशुपालकों की उपस्थिति मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक संकेत है। कार्यक्रम में पशुपालन, डेयरी और सहकारिता क्षेत्र को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया गया।
शाह ने सहकारिता मंत्रालय के गठन का जिक्र करते हुए कहा कि इसका फायदा किसानों, पशुपालकों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अलग मंत्रालय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। केंद्र सरकार ने 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया था।
उन्होंने दुग्ध उत्पादन का जिक्र करते हुए कहा कि देश में पिछले वर्षों के दौरान दूध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। शाह ने पशुपालकों से आधुनिक तकनीक अपनाने और बेहतर नस्ल के पशुओं के विकास पर ध्यान देने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि पशुओं को बीमारियों से बचाने और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों और आधुनिक तकनीक का उपयोग महत्वपूर्ण है।
भोपाल में आयोजित प्रदर्शनी 3 से 7 अक्टूबर तक चलेगी। इसे मध्य प्रदेश पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित किया है। इसमें आम नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो, मॉडल और लाइव डेमो के जरिए आपराधिक न्याय प्रक्रिया समझाने की व्यवस्था की गई है। फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों के काम को भी प्रदर्शित किया जा रहा है।
नई आपराधिक न्याय व्यवस्था में फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर है। गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था को सरकार तेज और पारदर्शी जांच के लिए महत्वपूर्ण मानती है।
अमित शाह इससे पहले भी अलग-अलग कार्यक्रमों में तीन साल के भीतर न्याय उपलब्ध कराने के लक्ष्य का उल्लेख कर चुके हैं। अगस्त 2026 में पश्चिम बंगाल में नए आपराधिक कानूनों से जुड़ी एक प्रदर्शनी के दौरान भी उन्होंने कहा था कि पूर्ण क्रियान्वयन के बाद एफआईआर से सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल में न्याय सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।
भोपाल में शनिवार को उन्होंने एक बार फिर इसी लक्ष्य को दोहराया। शाह के मुताबिक नए कानूनों में पुलिस, अभियोजन और न्याय व्यवस्था के अलग-अलग चरणों के लिए समयबद्ध प्रक्रियाओं और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य लंबी न्यायिक प्रक्रिया को कम करना और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना है।
फिलहाल तीनों नए आपराधिक कानून देशभर में लागू हैं, लेकिन उनके तकनीकी और संस्थागत ढांचे को पूरी तरह स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। अमित शाह के अनुसार करीब डेढ़ साल में यह व्यवस्था पूरी तरह क्रियान्वित होने के बाद एफआईआर दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल में मामले के निपटारे के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में देश की आपराधिक न्याय प्रणाली काम करेगी।





