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इंदौर। रविवार देर रात एयरोड्रोम पुलिस थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में बालों के कॉस्मेटिक्स का कारोबार करने वाले कमल वाघेला की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह दोस्तों से मिलकर अपने घर लौट रहे थे, तभी उनकी टू-व्हीलर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए डिवाइडर से टकरा गई। हादसे के बाद परिवार ने मेट्रो निर्माण से जुड़े अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
मृतक कमल वाघेला महावीर कृष्णा एवेन्यू के रहने वाले थे। वह बालों से जुड़े कॉस्मेटिक्स का कारोबार करते थे और परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। अचानक हुई इस घटना से परिवार में मातम पसर गया है।
पुलिस के मुताबिक हादसा रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब आधी रात के समय हुआ। वाघेला अपने दोस्तों से मिलने गए थे और वहां से घर लौट रहे थे। घर के पास दोस्तों से अलग होने के कुछ ही देर बाद उनकी टू-व्हीलर मेट्रो निर्माण से जुड़े डिवाइडर से टकरा गई।
टक्कर इतनी गंभीर थी कि वाघेला को गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की। घटना की जानकारी पुलिस और परिवार को दी गई। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
हादसे की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य भी अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों द्वारा मौत की पुष्टि किए जाने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि हादसा केवल वाहन चालक की गलती से नहीं बल्कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण हुआ।
परिजनों ने आरोप लगाया कि जिस डिवाइडर से कमल वाघेला की गाड़ी टकराई, उस पर रात के समय साफ दिखाई देने वाले पर्याप्त रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत नहीं थे। उनका यह भी आरोप है कि वहां रोशनी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी, जिससे सड़क पर चलने वाले लोगों को डिवाइडर का सही अंदाजा नहीं हो पा रहा था।
परिवार का कहना है कि मेट्रो जैसे बड़े निर्माण कार्य के दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े मानकों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। खासकर रात के समय बैरिकेड, डिवाइडर और अन्य निर्माण सामग्री दूर से स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए। अगर उचित रोशनी और संकेत होते तो संभव है कि हादसे से बचा जा सकता था।
यह आरोप फिलहाल परिवार की ओर से लगाया गया है। हादसे की वास्तविक वजह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस घटनास्थल का निरीक्षण कर हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
एयरोड्रोम पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसे के समय सड़क की स्थिति कैसी थी, वाहन की रफ्तार कितनी थी और डिवाइडर पर किस तरह के सुरक्षा संकेत मौजूद थे। इसके अलावा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पुलिस यह भी देख सकती है कि दुर्घटना स्थल पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट थी या नहीं। अगर निर्माण कार्य चल रहा था तो वहां यातायात को सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। इन सभी बिंदुओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
मेट्रो निर्माण जैसे बड़े प्रोजेक्ट के दौरान कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है और ट्रैफिक को अस्थायी मार्गों से निकाला जाता है। ऐसे स्थानों पर रात में दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए रिफ्लेक्टिव टेप, चेतावनी बोर्ड, लाइट और स्पष्ट बैरिकेडिंग बेहद जरूरी मानी जाती है।
कमल वाघेला के परिवार ने मांग की है कि निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाए। उनका कहना है कि अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
परिवार के लिए यह हादसा बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी बन गया है। कमल वाघेला परिवार के कमाने वाले सदस्य थे। उनके पीछे पत्नी और तीन बच्चे हैं। हादसे के बाद परिवार के सामने भावनात्मक नुकसान के साथ आर्थिक चिंता भी खड़ी हो गई है।
स्थानीय लोगों ने भी निर्माण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जहां भी सड़क के बीच अस्थायी या स्थायी डिवाइडर बनाए गए हैं, वहां रात के समय पर्याप्त रोशनी और चमकदार संकेत होना जरूरी है।
इस तरह के हादसे सड़क सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जरूरत भी बताते हैं। निर्माण एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को समय-समय पर उन स्थानों का निरीक्षण करना चाहिए जहां ट्रैफिक के बीच निर्माण कार्य चल रहा हो।
फिलहाल एयरोड्रोम पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी।
कमल वाघेला की मौत के बाद परिवार न्याय और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहा है। अब नजर पुलिस की जांच और संबंधित मेट्रो निर्माण एजेंसी की प्रतिक्रिया पर है। यदि परिवार के आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो हादसे की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।





