मध्य प्रदेश

40 साल पुराने आशियानों पर अब नहीं चलेगा बुलडोजर

Saba Naaz
31 July 2026 9:13 PM IST
40 साल पुराने आशियानों पर अब नहीं चलेगा बुलडोजर
x

मध्य प्रदेश: खंडवा में मकानों को गिराने की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत के इस आदेश से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिनके घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की जा रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित मकानों को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची एवं वी. मोहना की पीठ ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता निजाम पाशा ने अदालत के सामने प्रभावित परिवारों की स्थिति रखते हुए तत्काल राहत की मांग की थी। उन्होंने बताया कि कई परिवार इन मकानों में पिछले 40 वर्षों से अधिक समय से रह रहे हैं और अचानक मकान टूटने की कार्रवाई से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

अधिवक्ता निजाम पाशा ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि जब तक शीर्ष अदालत इस मामले पर अंतिम निर्णय नहीं लेती, तब तक प्रभावित लोगों के घरों को गिराने से सुरक्षा दी जाए। अदालत ने उनकी दलीलों को सुनने के बाद फिलहाल मकानों को तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगा दी और यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।

दरअसल, इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रभावित परिवारों को राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पीड़ित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश के आधारों के बारे में जानकारी मांगी। इस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने बताया कि हाई कोर्ट ने प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव दिया था।

हाई कोर्ट की ओर से यह कहा गया था कि प्रभावित निवासियों को किसी अन्य स्थान पर आवास उपलब्ध कराने के लिए भुगतान की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, परिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से इसी स्थान पर रह रहे हैं और उनके जीवन तथा रोजी-रोटी का संबंध इसी जगह से जुड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल खंडवा के उन परिवारों ने राहत की सांस ली है, जिनके घरों पर कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रभावित परिवार कई दशकों से इन मकानों में रह रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक घर हटाने से उनके सामने रहने और जीवनयापन की समस्या खड़ी हो जाएगी। परिवारों ने अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद जताई है।

मामले में अब सभी की नजर 3 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर है। उस दिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की दिशा तय करेगा। अदालत यह भी देखेगी कि प्रभावित परिवारों के अधिकारों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच किस तरह संतुलन बनाया जा सकता है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खंडवा के करीब 25 परिवारों को तत्काल राहत मिल गई है। बुलडोजर कार्रवाई पर रोक ने उन्हें अपने घरों को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखने का मौका दिया है। अब अगली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन मकानों के भविष्य को लेकर अदालत क्या फैसला सुनाती है।

Next Story