- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- बारिश में भीमबेटका...

भोपाल। रविवार को बारिश के बीच BRICS (ब्रिक्स) कल्चर वर्किंग ग्रुप और मिनिस्टीरियल ग्रुप से जुड़े प्रतिनिधियों ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल भीमबेटका रॉक शेल्टर्स का दौरा किया। इस दौरान दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, रूस और चीन समेत BRICS देशों के 15 से अधिक प्रतिनिधियों ने भीमबेटका की प्रागैतिहासिक गुफाओं, हजारों वर्ष पुरानी रॉक आर्ट और यहां मौजूद प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा। बारिश के बावजूद प्रतिनिधियों में इस ऐतिहासिक स्थल को जानने और समझने को लेकर खासा उत्साह नजर आया।
भीमबेटका रॉक शेल्टर्स भारतीय उपमहाद्वीप की प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता और उसकी सांस्कृतिक यात्रा के महत्वपूर्ण प्रमाणों में शामिल हैं। यहां मौजूद शैलाश्रयों और चट्टानों पर बने प्राचीन चित्र मानव जीवन, प्रकृति, वन्यजीवों और तत्कालीन सामाजिक गतिविधियों की झलक प्रस्तुत करते हैं। BRICS देशों से आए प्रतिनिधियों ने इन प्राचीन चित्रों को देखकर भारतीय सभ्यता के हजारों वर्ष पुराने इतिहास और कला परंपरा को समझने का प्रयास किया।
ASI की देखरेख में हुआ भ्रमण
BRICS प्रतिनिधिमंडल के भीमबेटका भ्रमण की व्यवस्था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), भोपाल सर्कल की देखरेख में की गई। ASI, भोपाल सर्कल के सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट शिवकांत बाजपेयी और उनकी टीम ने प्रतिनिधियों के दौरे का समन्वय किया। टीम ने प्रतिनिधियों को रॉक शेल्टर्स से जुड़ी ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक जानकारियां उपलब्ध कराईं।
प्रतिनिधियों ने भीमबेटका परिसर में स्थित विभिन्न रॉक शेल्टर्स का भ्रमण किया और वहां मौजूद प्राचीन शैलचित्रों को देखा। इन चित्रों में तत्कालीन मानव जीवन और उसके आसपास के प्राकृतिक परिवेश की झलक मिलती है। प्रतिनिधियों को बताया गया कि भीमबेटका केवल प्राचीन शैलचित्रों का स्थल नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता के लंबे इतिहास और प्रकृति के साथ उसके संबंधों को समझने का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है।
हजारों साल पुरानी सभ्यता के साक्ष्य
भीमबेटका के शैलाश्रय प्रागैतिहासिक मानव के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को संरक्षित किए हुए हैं। यहां की चट्टानों पर बने चित्रों में मानव आकृतियों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों और दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियों को दर्शाया गया है। यही वजह है कि दुनिया भर के पुरातत्वविदों और इतिहासकारों के लिए भीमबेटका विशेष महत्व रखता है।
BRICS प्रतिनिधियों ने इन शैलचित्रों और शैलाश्रयों को देखकर भारत की प्राचीन कला परंपरा के बारे में जानकारी हासिल की। प्रतिनिधियों ने स्थल की संरचना, यहां संरक्षित प्राचीन चित्रों और उनके संरक्षण की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ली। बारिश के कारण मौसम में बदलाव के बावजूद भ्रमण को लेकर प्रतिनिधियों का उत्साह बना रहा।
प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम
भीमबेटका की विशेषता केवल इसकी पुरातात्विक विरासत तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के अनूठे संगम के लिए भी जाना जाता है। रॉक शेल्टर्स के आसपास का प्राकृतिक वातावरण और चट्टानी संरचनाएं इस पूरे क्षेत्र को विशिष्ट बनाती हैं।
BRICS देशों के प्रतिनिधियों के दौरे के दौरान इस प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को भी विशेष रूप से देखा गया। प्रतिनिधियों ने समझा कि किस तरह हजारों वर्ष पहले मानव ने प्राकृतिक शैलाश्रयों का उपयोग किया और अपनी जीवनशैली तथा अनुभवों को चट्टानों पर चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
सांस्कृतिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण दौरा
BRICS कल्चर वर्किंग ग्रुप और मिनिस्टीरियल ग्रुप के प्रतिनिधियों का भीमबेटका दौरा सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BRICS देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग के साथ सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधियों के सामने प्रत्यक्ष प्रदर्शन इस सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम माना जा सकता है।
भीमबेटका जैसे विश्व धरोहर स्थल के भ्रमण से विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की प्राचीन सभ्यता, कला और पुरातात्विक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने यह भी जाना कि हजारों वर्ष पुराने इन साक्ष्यों को संरक्षित रखने के लिए किस तरह पुरातत्व विभाग द्वारा कार्य किया जाता है।
विश्व स्तर पर भारत की विरासत की पहचान
यूनेस्को की विश्व धरोहर साइट के रूप में भीमबेटका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त है। यहां मौजूद प्रागैतिहासिक शैलचित्र और शैलाश्रय मानव इतिहास के विकास की कहानी को सामने लाते हैं। BRICS प्रतिनिधियों के दौरे से इस ऐतिहासिक स्थल की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान को भी एक नया मंच मिला।
रविवार को बारिश के बीच हुए इस दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने भीमबेटका की प्राचीन विरासत को नजदीक से देखा और उसके महत्व को समझा। ASI, भोपाल सर्कल के सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट शिवकांत बाजपेयी और उनकी टीम ने प्रतिनिधियों के भ्रमण को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराया। दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, रूस और चीन समेत BRICS देशों के 15 से अधिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस दौरे को खास बना दिया।
भीमबेटका का यह भ्रमण न केवल भारत की हजारों वर्ष पुरानी मानव सभ्यता और कला परंपरा से परिचित कराने वाला रहा, बल्कि BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत और आपसी समझ को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने आया।





