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गेहूं खरीद व्यवस्था को लेकर BKS का अल्टीमेटम, राज्य सरकार से सुधार की मांग

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : भारतीय किसान संघ (BKS) ने मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन को गेहूं खरीद व्यवस्था में सुधार के लिए पांच दिन का अल्टीमेटम दिया है। संगठन ने मांग की है कि सैटेलाइट सर्वे सिस्टम को तुरंत समाप्त किया जाए और स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया जाए। BKS ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार निर्धारित समय में आवश्यक बदलाव नहीं करती है, तो पूरे राज्य में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल अंजना ने कहा कि वर्तमान गेहूं खरीद प्रणाली में मझोले और बड़े किसानों को अभी तक शामिल नहीं किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में किसान परेशान हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि मझोले और बड़े किसानों के लिए गेहूं खरीद का स्पष्ट शेड्यूल तुरंत जारी किया जाए। इस शेड्यूल में प्रत्येक दिन की खरीद सीमा और निश्चित तारीखों का उल्लेख होना चाहिए ताकि किसानों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
किसान संगठन का कहना है कि खरीद प्रक्रिया में देरी और तकनीकी व्यवस्थाओं के कारण किसानों को अपने अनाज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग प्रणाली में भी कई तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे किसान समय पर अपना गेहूं नहीं बेच पा रहे हैं।
इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य के किसानों को भरोसा दिलाया है कि सरकार पूरी तरह से गेहूं खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद राज्य में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और गेहूं का उत्पादन लगभग दोगुना हो गया है। सरकार ने केंद्र से भी खरीद कोटा बढ़ाने की मांग की है ताकि सभी किसानों का अनाज समय पर खरीदा जा सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता छोटे किसानों को दी जा रही है ताकि उन्हें पहले लाभ मिल सके। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिसमें ₹40 का बोनस भी शामिल है। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को सही दाम और सुचारू खरीद व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि गेहूं खरीद प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और तकनीकी सुधारों पर भी काम चल रहा है। हालांकि किसान संगठनों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर सुधार नहीं होगा, तब तक किसानों की समस्याएं बनी रहेंगी।
फिलहाल पूरे मामले पर सरकार और किसान संगठन के बीच बातचीत और समाधान की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन यदि पांच दिनों के भीतर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो राज्य में आंदोलन की स्थिति बन सकती है।





