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इंदौर। प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान सोशल मीडिया पर चर्चा में आईं मोनालिसा भोंसले को अपने जन्म प्रमाण पत्र और उम्र से जुड़े विवाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने महेश्वर नगर पालिका के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके जरिए मोनालिसा की पहले दर्ज जन्मतिथि को बदल दिया गया था। हालांकि अदालत ने उनकी सही जन्मतिथि पर अंतिम फैसला नहीं दिया है और संबंधित अधिकारी को मामला दोबारा सुनने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने की। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की जन्मतिथि में ऐसा बदलाव, जिसका उसके कानूनी अधिकारों पर गंभीर असर पड़ता हो, उसे सुनवाई का मौका दिए बिना नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 31 मार्च 2026 को जारी आदेश को रद्द कर दिया गया।
मोनालिसा की जन्मतिथि पहले 1 जनवरी 2008 दर्ज थी। उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी में भी यही तारीख दर्ज होने की बात अदालत के सामने रखी गई। इसके आधार पर 11 मार्च 2026 को विवाह के समय उनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक बनती थी। बाद में उनके पिता ने अधिकारियों के सामने दावा किया कि अस्पताल के रिकॉर्ड में मोनालिसा की जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज है।
पिता की शिकायत के बाद नगर पालिका स्तर पर पुराने जन्म रिकॉर्ड को बदल दिया गया और 30 दिसंबर 2009 की तारीख दर्ज कर दी गई। इससे कागजों में मोनालिसा की उम्र विवाह के समय करीब 16 वर्ष हो गई। इस बदलाव का असर केवल जन्म प्रमाण पत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी शादी और उनके पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों से भी यह विवाद जुड़ गया।
मोनालिसा और उनके पति ने इस कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि जन्मतिथि बदलने से पहले मोनालिसा को न तो उचित नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर मिला। अदालत ने इस दलील को महत्वपूर्ण माना।
हाई कोर्ट ने कहा कि जन्मतिथि में लगभग दो वर्ष का बदलाव किसी व्यक्ति के कई नागरिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। इनमें मतदान का अधिकार, स्वतंत्र रूप से बैंक खाते संचालित करना, कानूनी अनुबंध करना और विवाह जैसे निजी फैसले शामिल हैं। अदालत ने माना कि ऐसे मामले में संबंधित व्यक्ति को सुनना जरूरी है।
इसी के साथ हाई कोर्ट ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को मोनालिसा के पिता की ओर से दी गई जन्मतिथि बदलने की अर्जी पर नए सिरे से फैसला करने को कहा है। इस बार मोनालिसा को प्रभावी रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा और इसके बाद कानून के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
अदालत के आदेश को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि हाई कोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि 1 जनवरी 2008 और 30 दिसंबर 2009 में से कौन सी जन्मतिथि अंतिम रूप से सही है। कोर्ट ने केवल उस प्रशासनिक प्रक्रिया को गलत माना है, जिसमें मोनालिसा को सुने बिना उनका पहले का रिकॉर्ड बदल दिया गया था। इसलिए जन्मतिथि का अंतिम निर्धारण संबंधित अधिकारी के नए फैसले के बाद होगा।
फैसले के बाद मोनालिसा ने राहत जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास था कि उनके पक्ष की बात आखिरकार सामने आएगी। मोनालिसा के मुताबिक इस विवाद के कारण उन्हें पिछले कई महीनों में आर्थिक और पेशेवर स्तर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
मोनालिसा ने कहा कि कानूनी विवाद के दौरान उनके कई प्रोफेशनल प्रोजेक्ट प्रभावित हुए और फिल्मों से जुड़े काम भी रुक गए। उन्होंने कहा कि उस समय उनके पास मामले से निपटने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन भी नहीं थे। हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद उन्होंने खुशी जताते हुए इसे अपने लिए महत्वपूर्ण फैसला बताया।
मोनालिसा 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। मेले में माला बेचते हुए उनके कई वीडियो और तस्वीरें इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुईं, जिसके बाद उन्हें देशभर में पहचान मिली। इसके बाद उन्हें मनोरंजन जगत से भी काम के प्रस्ताव मिलने लगे।
मार्च 2026 में उनकी शादी के बाद उनकी उम्र को लेकर विवाद तेज हो गया। मोनालिसा के पिता की ओर से जन्मतिथि को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। बाद में जन्म रिकॉर्ड में बदलाव होने से मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर जोर दिया। अदालत का कहना था कि जब किसी प्रशासनिक फैसले से किसी नागरिक के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो उस व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है।
फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले से मोनालिसा के खिलाफ जन्म रिकॉर्ड बदलने वाला 31 मार्च का आदेश समाप्त हो गया है। अब महेश्वर के संबंधित अधिकारी को पूरे मामले पर दोबारा विचार करना होगा। नई सुनवाई में दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर जन्मतिथि को लेकर फैसला किया जाएगा।
इस फैसले से मोनालिसा को तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी सही जन्मतिथि का कानूनी विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आने वाले समय में प्रशासन की नई सुनवाई के बाद ही यह साफ होगा कि आधिकारिक रिकॉर्ड में कौन सी जन्मतिथि कायम रहती है।
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