मध्य प्रदेश

SIR को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, भोपाल में निर्वाचन सदन का करेगी घेराव

Kavita2
25 Sept 2026 10:58 AM IST
SIR को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, भोपाल में निर्वाचन सदन का करेगी घेराव
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भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस ने मतदाता सूची में किए गए बदलावों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग करते हुए सोमवार, 28 सितंबर को भोपाल स्थित निर्वाचन सदन का घेराव करने का ऐलान किया है। इसके बाद पार्टी जिला स्तर पर भी प्रदर्शन करने की तैयारी में है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आंदोलन की घोषणा की।

पटवारी ने कहा कि कांग्रेस की प्रमुख मांग SIR के दौरान मतदाता सूची में जोड़े और हटाए गए नामों की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर अपना विरोध जारी रखेगी। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोप कांग्रेस के राजनीतिक दावे हैं और इन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

कांग्रेस ने अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34 लाख 25 हजार 78 नामों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। पटवारी ने कहा कि चुनाव अधिकारियों को यह बताना चाहिए कि किन विधानसभा क्षेत्रों और जिलों में कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए और प्रत्येक मामले में नाम हटाने का आधार क्या था। कांग्रेस का कहना है कि यह जानकारी सार्वजनिक होने से मतदाता सूची में किए गए बदलावों की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

पटवारी ने ड्राफ्ट मतदाता सूची और अंतिम सूची के बीच हुए बदलावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया शुरू होने से पहले मध्य प्रदेश में 5,74,06,143 पंजीकृत मतदाता थे, जबकि 5,31,31,983 गणना फॉर्म प्राप्त हुए और उनका डिजिटलीकरण किया गया। कांग्रेस ने इन आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूची में हुए बदलावों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।

कांग्रेस ने विशेष रूप से ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए करीब 42.74 लाख नामों का मुद्दा उठाया है। पार्टी जानना चाहती है कि इनमें से कितने लोगों ने दावा और आपत्ति प्रक्रिया के दौरान आवेदन किया, कितने मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में जोड़े गए और कितने आवेदन खारिज किए गए। इसके साथ ही नाम वापस जोड़ने के आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करने के कारण भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

पटवारी ने मतदाता सूची से संबंधित डिजिटल प्रक्रिया का ऑडिट ट्रेल उपलब्ध कराने की मांग भी की। उन्होंने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की बात कही। कांग्रेस का तर्क है कि मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए, ताकि संबंधित मतदाता जरूरत पड़ने पर उसकी जानकारी प्राप्त कर सके।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भोपाल में निर्वाचन सदन के घेराव के बाद आंदोलन को जिलों तक ले जाया जाएगा। पार्टी जिला निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालयों के बाहर भी प्रदर्शन करने की योजना बना रही है। मध्य प्रदेश में कलेक्टर जिला निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभालते हैं, इसलिए कांग्रेस मतदाता सूची से जुड़े अपने सवाल जिला स्तर पर भी उठाएगी।

इससे पहले यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस का कहना है कि SIR केवल राजनीतिक दलों से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक पात्र मतदाता के मताधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है।

SIR के तहत मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल चुकी है और राज्य के विभिन्न जिलों की आधिकारिक वेबसाइटों पर सामान्य मतदाता सूची, सेवा मतदाता सूची और ASD सूची से संबंधित लिंक उपलब्ध कराए गए हैं। इससे यह स्पष्ट है कि राज्य में SIR-2026 से संबंधित मतदाता सूची प्रक्रिया आधिकारिक रूप से संचालित हुई है।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर कथित मतभेदों की मीडिया रिपोर्टों का भी उल्लेख किया है। पटवारी ने ऐसी रिपोर्टों का हवाला देते हुए आयोग से जवाब मांगा है। हालांकि आयोग के भीतर कथित असहमति से जुड़े दावों और उनके प्रभाव का मूल्यांकन आधिकारिक रिकॉर्ड तथा संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर किया जाना जरूरी है।

इस पूरे विवाद में 34.25 लाख और 42.74 लाख के आंकड़ों को लेकर अंतर भी समझना महत्वपूर्ण है। कांग्रेस के अनुसार 42.74 लाख का आंकड़ा ड्राफ्ट चरण में बाहर हुए नामों से संबंधित है, जबकि 34.25 लाख का आंकड़ा अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए नामों से जुड़ा है। पार्टी इसी अंतर का विस्तृत हिसाब मांग रही है और जानना चाहती है कि दावा-आपत्ति प्रक्रिया के बाद कितने नाम वापस जोड़े गए।

कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि विधानसभा और जिले के आधार पर नाम हटाने के कारणों का वर्गीकरण सार्वजनिक किया जाए। पार्टी के मुताबिक इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि नाम मृत्यु, स्थान परिवर्तन, डुप्लीकेट पंजीकरण या किसी अन्य कारण से हटाए गए। फिलहाल इन आंकड़ों को लेकर कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए हैं और पार्टी विस्तृत आधिकारिक डेटा मांग रही है।

मध्य प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक आंदोलन का रूप ले रहा है। कांग्रेस ने भोपाल में निर्वाचन सदन के घेराव के साथ इसे प्रदेशव्यापी स्तर पर ले जाने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि जब तक उसके सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, वह मतदाता सूची की पारदर्शिता का मुद्दा उठाती रहेगी।

अब सोमवार के प्रस्तावित प्रदर्शन पर नजर रहेगी। कांग्रेस SIR के दौरान हटाए गए नामों, दोबारा जोड़े गए मतदाताओं और पूरी प्रक्रिया के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की मांग लेकर निर्वाचन अधिकारियों के सामने जाएगी। दूसरी ओर, इन आरोपों की तथ्यात्मक स्थिति का अंतिम आकलन चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड, उसके जवाब और उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

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