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मध्य प्रदेश
सीएम मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को मंजूरी
Rajeshwari Nishad
15 Oct 2026 5:47 PM IST

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भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के औद्योगिक विकास, शिक्षा, परिवहन, सिंचाई और रोजगार से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में लगभग 27,050 करोड़ रुपये के विकास प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। कैबिनेट का सबसे प्रमुख फैसला जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास के लिए नई सरकारी कंपनी के गठन को स्वीकृति देना रहा। इसके तहत जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड का गठन किया जाएगा। कंपनी पूरी तरह मध्य प्रदेश सरकार के स्वामित्व में होगी। राज्य सरकार इसके लिए शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से प्रदेश में निवेश, उद्योगों और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को मिली मंजूरी
मंत्रि-परिषद ने जबलपुर से भोपाल होते हुए इंदौर तक औद्योगिक एवं आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है।इस परियोजना का उद्देश्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों को आपस में जोड़ना है।सरकार की योजना है कि कॉरिडोर के आसपास चयनित स्थानों पर बड़े औद्योगिक हब विकसित किए जाएं।इन औद्योगिक क्षेत्रों में निवेशकों को जमीन, सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह कॉरिडोर महाकौशल और मालवा सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा।
100 करोड़ रुपये से बनेगी विशेष सरकारी कंपनी
कॉरिडोर के विकास के लिए मंत्रि-परिषद ने विशेष प्रयोजन कंपनी यानी एसपीवी के गठन को मंजूरी दी है।इसका नाम जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड होगा।कंपनी पूरी तरह राज्य शासन के स्वामित्व में रहेगी और इसे शुरुआती पूंजी के रूप में 100 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं कंपनी की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता करेंगे।इस व्यवस्था का उद्देश्य परियोजना से संबंधित फैसलों को तेजी से लागू करना और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना है।कंपनी के गठन की प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
10 हजार एकड़ तक विकसित होंगे औद्योगिक क्षेत्र
सरकार की योजना के अनुसार, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के पहले चरण में लगभग 3,000 से 10,000 एकड़ भूमि विकसित करने का प्रस्ताव है।इसके अंतर्गत तीन से पांच बड़े औद्योगिक और आर्थिक हब बनाए जा सकते हैं।
इन क्षेत्रों में उद्योगों को तैयार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।इसके अलावा औद्योगिक कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आवासीय क्षेत्र, अस्पताल, स्कूल, कौशल विकास केंद्र और हरित क्षेत्र विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल औद्योगिक इकाइयां स्थापित करना नहीं, बल्कि उद्योगों के आसपास व्यवस्थित आर्थिक और सामाजिक ढांचा तैयार करना है।
एक लाख करोड़ निवेश और तीन लाख रोजगार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी औद्योगिक कॉरिडोर से प्रदेश में बड़े स्तर पर निवेश आने की उम्मीद है।सरकार ने मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का अनुमान जताया है।इससे लगभग एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
वहीं अगले तीन वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश और छह लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर विकसित करने की संभावना भी जताई गई है।हालांकि, ये सरकार के निर्धारित लक्ष्य और अनुमान हैं। वास्तविक निवेश और रोजगार की संख्या परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा उद्योगों की भागीदारी पर निर्भर करेगी।
सात जिलों को मिल सकता है औद्योगिक विकास का लाभ
इस औद्योगिक कॉरिडोर से जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।जबलपुर में इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन, पर्यटन, खनन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं हैं।
नरसिंहपुर और रायसेन में खाद्य प्रसंस्करण, वेयरहाउसिंग तथा कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकता है।इसी तरह भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर में विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं हैं।शिक्षा क्षेत्र के लिए 3 हजार करोड़ मंजूरकैबिनेट बैठक में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों, आवासीय विद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के विकास के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।मुख्यमंत्री ने बताया कि इस राशि के जरिए शैक्षणिक संस्थानों की सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।इसमें विधायक, सांसद और अन्य मदों से उपलब्ध संसाधनों को भी शामिल किया जा सकता है।सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
सांदीपनि स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा
मंत्रि-परिषद ने सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन से संबंधित व्यवस्था के लिए भी धनराशि स्वीकृत की है।इस योजना के लिए लगभग 241 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।चयनित जिलों के कलेक्टरों को विद्यार्थियों की परिवहन दरें निर्धारित करने से संबंधित अधिकार दिए जाएंगे।विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में स्थित सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों को बस सेवा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।इससे दूरदराज क्षेत्रों से विद्यालय आने वाले छात्र-छात्राओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
आयुष और सिंचाई योजनाओं पर भी फैसला
कैबिनेट ने आयुष विभाग की योजनाओं को आगे जारी रखने के लिए लगभग 1,691 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।इससे आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से संबंधित सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।इसके अलावा जल संसाधन विभाग की विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।सिंचाई परियोजनाओं का उद्देश्य किसानों के लिए जल उपलब्धता और कृषि संबंधी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।हालांकि, प्रत्येक परियोजना की लागत और क्रियान्वयन अवधि अलग-अलग निर्धारित होगी।
नए जिलों में महिला एवं बाल विकास कार्यालय
मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के नवगठित जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के नए कार्यालय खोलने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।इससे विभागीय योजनाओं के स्थानीय स्तर पर संचालन और निगरानी को मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।महिलाओं और बच्चों से संबंधित योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण योगदान होता है।नए कार्यालयों के माध्यम से इन सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जाएगा।
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।जबलपुर-भोपाल-इंदौर औद्योगिक कॉरिडोर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।औद्योगिक हबों के विकास से विनिर्माण, कृषि प्रसंस्करण, परिवहन और सेवा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
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