मध्य प्रदेश

Bhopal: कांग्रेस जिला अध्यक्षों पर प्रदर्शन को लेकर सवाल

Admindelhi1
21 April 2026 11:54 AM IST
Bhopal: कांग्रेस जिला अध्यक्षों पर प्रदर्शन को लेकर सवाल
x

भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर सख्त फैसले की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक 9 से ज्यादा जिला अध्यक्षों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है। खास बात यह है कि जिन नेताओं से संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और जनता के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाने की उम्मीद की गई थी, वे उसी कसौटी पर खरे नहीं उतर सके।

बताया जा रहा है कि कई ऐसे जिला अध्यक्ष भी डेंजर जोन में हैं, जिन्हें सीधे राहुल गांधी की सहमति से जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन संगठन विस्तार, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और जमीनी सक्रियता के मामले में उनकी रिपोर्ट बेहद कमजोर पाई गई। यही वजह है कि अब कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं दिख रहा।

सूत्रों के अनुसार डिंडोरी जिला अध्यक्ष ओमकार सिंह मरकाम, सतना ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाह, मंडला के अशोक मर्सकोले समेत ग्वालियर ग्रामीण, रतलाम शहर, मंदसौर, अनूपपुर, दतिया, रीवा ग्रामीण, मऊगंज और आगर मालवा के जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट खराब बताई जा रही है। हालांकि कुछ जिलाध्यक्ष जातिगत और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण राहत पा सकते हैं। करीब 8 महीने पहले संगठन सृजन अभियान के तहत इन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी। उद्देश्य था कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाए, कांग्रेस की गतिविधियों को तेज किया जाए और जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया जाए। लेकिन कई जिलों में अपेक्षित काम नहीं हुआ। AICC की ओर से वामसी चंद रेड्डी को समीक्षा के लिए भेजा गया था।

उन्होंने चार दिनों तक वन-टू-वन चर्चा कर जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट तैयार की। इस दौरान संगठन की मजबूती, ब्लॉक-मंडलम-पंचायत और वार्ड समितियों के गठन, AICC और PCC के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, प्रेस कॉन्फ्रेंस, धरना-प्रदर्शन, जिला कार्यकारिणी बैठकों और कनेक्ट सेंटर को रिपोर्टिंग जैसे कई बिंदुओं पर सवाल पूछे गए।

जानकारी के मुताबिक डिंडोरी के ओमकार सिंह मरकाम और रतलाम ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाहा ने तो अपने कामकाज की रिपोर्ट तक कनेक्ट सेंटर को नहीं भेजी, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर मानी जा रही है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जिन नेताओं को संगठन की नई ऊर्जा बनने के लिए जिम्मेदारी दी गई थी, वे अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। अब पार्टी ऐसे चेहरों को हटाकर नए और सक्रिय नेतृत्व को मौका देने के पक्ष में नजर आ रही है। आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है, जिससे प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में हलचल और तेज होना तय है।

Next Story