मध्य प्रदेश

भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद: ASI ने कोर्ट में पेश की 2000 पेज की रिपोर्ट

Kavita2
6 May 2026 2:17 PM IST
भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद: ASI ने कोर्ट में पेश की 2000 पेज की रिपोर्ट
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद कॉम्प्लेक्स को लेकर चल रहे मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। ASI ने अपने वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर दावा किया है कि यह स्थल परमार राजाओं के काल का एक विशाल संरचनात्मक परिसर था, जिसमें मौजूदा ढांचे का बड़ा हिस्सा पुराने मंदिर संरचनाओं के अवशेषों से निर्मित प्रतीत होता है।

यह दावा ASI ने मंगलवार को अपने 98 दिनों तक चले विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे और 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर अदालत के सामने प्रस्तुत किया। रिपोर्ट में स्थल की संरचना, निर्माण शैली और पुरातात्विक अवशेषों का विस्तृत विश्लेषण शामिल बताया गया है।

इस मामले में धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक पहचान को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। हिंदू पक्ष इस स्थल को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है। यह पूरा परिसर वर्तमान में ASI के संरक्षण में है और न्यायिक प्रक्रिया के तहत इसका अध्ययन किया जा रहा है।

मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष हो रही है। सुनवाई के दौरान ASI की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने अदालत में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और पिछले दो वर्षों में किए गए वैज्ञानिक सर्वे का पूरा ब्यौरा दिया।

रिपोर्ट में बताया गया कि सर्वे के दौरान स्थल की दीवारों, स्तंभों, संरचनात्मक अवशेषों और निर्माण तकनीकों का गहन अध्ययन किया गया। ASI का दावा है कि कई हिस्सों में प्राचीन हिंदू मंदिरों की स्थापत्य शैली के संकेत मिलते हैं, जो परमार काल की वास्तुकला से मेल खाते हैं।

हालांकि यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा। दोनों पक्षों की दलीलों और ASI की रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।

यह विवाद ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। लंबे समय से इस स्थल को लेकर दोनों समुदायों के बीच अलग-अलग दावे रहे हैं, जिसके चलते यह मामला कानूनी और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ASI की यह विस्तृत रिपोर्ट मामले के ऐतिहासिक पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सभी तथ्यों और पक्षों की सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा।

फिलहाल इस मामले पर सभी की नजरें हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की दिशा तय हो सकती है।

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