मध्य प्रदेश

बैंक हड़ताल से इंदौर की करीब 650 शाखाओं में काम ठप पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग तेज

Kavita2
12 Sept 2026 10:57 AM IST
बैंक हड़ताल से इंदौर की करीब 650 शाखाओं में काम ठप पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग तेज
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इंदौर : शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दिया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारियों के काम पर नहीं आने से शाखाओं में सामान्य सेवाएं प्रभावित हुईं। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 848 बैंक शाखाओं में से लगभग 650 में कामकाज ठप रहा। हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने किया था। कर्मचारियों की प्रमुख मांग पांच दिन के कार्य सप्ताह से संबंधित समझौते को मंजूरी देना और लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान करना है।

शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने से ग्राहकों के उन कार्यों में बाधा आई, जिनके लिए कर्मचारियों की उपलब्धता जरूरी होती है। नकदी जमा करने, पैसे निकालने, चेक से संबंधित कार्य और अन्य शाखा आधारित सेवाओं पर हड़ताल का असर पड़ा। अलग-अलग बैंकों तथा शाखाओं में स्थिति कर्मचारियों की भागीदारी के अनुसार रही। जिले में करीब 650 शाखाओं के प्रभावित होने का आंकड़ा स्थानीय रिपोर्ट में दिया गया है। इसे सभी बैंकों की प्रत्येक सेवा पूरी तरह बंद रहने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इंदौर में प्रभावित बैंकिंग कारोबार को लेकर स्थानीय रिपोर्ट में 2.57 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आंकड़ा बताया गया है। हालांकि, इस राशि की गणना का विस्तृत आधार स्पष्ट नहीं है। इसे एक दिन की हड़ताल से हुआ वास्तविक आर्थिक नुकसान मानना उचित नहीं होगा। बैंकिंग कारोबार, लंबित लेन-देन और आर्थिक नुकसान अलग अवधारणाएं हैं। इसलिए इस बड़े आंकड़े को रिपोर्ट में बताए गए दावे के रूप में ही समझना जरूरी है।

राज्य स्तर पर कर्मचारियों की संख्या और प्रभावित कारोबार के आंकड़ों में भी अंतर सामने आया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश की 8,707 शाखाओं में से लगभग सात हजार शाखाओं के करीब 42 हजार कर्मचारियों तथा अधिकारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। बैंक कर्मचारी संगठन ने राज्य में लगभग 5,500 करोड़ रुपये का दैनिक कारोबार प्रभावित होने का दावा किया। ये आंकड़े चार हजार कर्मचारियों और 15 लाख करोड़ रुपये के कारोबार वाले विवरण से अलग हैं।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राज्य संयोजक मोहन कृष्ण शुक्ला के अनुसार, कर्मचारी पांच दिन के कार्य सप्ताह संबंधी समझौते की मंजूरी में देरी से नाराज हैं। उनका कहना है कि लगभग ढाई साल बीतने के बावजूद इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ है। कर्मचारियों ने अन्य लंबित मांगों को लेकर भी असंतोष जताया है। एक दिन की हड़ताल के जरिए संगठन ने इन विषयों पर निर्णय लेने की मांग सामने रखी। समझौते की मंजूरी में देरी का आरोप संगठन का पक्ष है।

पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग बैंक कर्मचारियों के आंदोलन का प्रमुख विषय बनी हुई है। कर्मचारी चाहते हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में कार्यदिवसों की व्यवस्था को लेकर लंबित निर्णय लिया जाए। हालांकि, हड़ताल होने से यह व्यवस्था स्वतः लागू नहीं हो जाती। कार्य सप्ताह में बदलाव के लिए संबंधित औपचारिक निर्णय आवश्यक होगा। फिलहाल खबर का मुख्य घटनाक्रम कर्मचारियों का विरोध और उससे शाखाओं में सेवाओं पर पड़ा असर है। नई व्यवस्था लागू होने की घोषणा इस घटनाक्रम में नहीं हुई है।

राज्य में हड़ताल से नकदी जमा और निकासी के अलावा चेक क्लियरेंस, सावधि जमा योजनाओं के नवीनीकरण तथा सरकारी कोषालय से संबंधित काम प्रभावित होने की जानकारी दी गई है। ये सेवाएं व्यक्तिगत ग्राहकों के साथ व्यापारिक और संस्थागत जरूरतों से भी जुड़ी हैं। किसी कार्य के उस दिन पूरा नहीं होने से उसे आगे के कार्यदिवस के लिए टालना पड़ सकता है। हालांकि, प्रत्येक लंबित कार्य का मूल्य आर्थिक नुकसान के समान नहीं होता। प्रभावित कारोबार के आकलन में यह अंतर महत्वपूर्ण है।

देशव्यापी आह्वान के बावजूद सभी बैंकों में प्रभाव समान नहीं रहा। राष्ट्रीय स्तर की रिपोर्ट में सार्वजनिक क्षेत्र और कुछ निजी बैंकों की सेवाओं पर असर बताया गया, जबकि अधिकांश निजी बैंकों में सामान्य कामकाज जारी रहा। इससे स्पष्ट होता है कि किसी ग्राहक की स्थिति उसके बैंक और संबंधित शाखा पर निर्भर रही। हड़ताल को पूरे बैंकिंग तंत्र की सभी सुविधाएं बंद हो जाने के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

इंदौर में बड़ी संख्या में शाखाओं के प्रभावित होने से हड़ताल का स्थानीय स्तर पर व्यापक असर सामने आया। कर्मचारियों की भागीदारी और ग्राहकों के लंबित कार्य इस घटनाक्रम के दो प्रमुख पहलू हैं। संगठन अपनी मांगों पर निर्णय चाहता है, जबकि ग्राहकों के लिए शाखाओं में सामान्य सेवाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। उपलब्ध विवरण में जिलेवार प्रत्येक सेवा के प्रभावित लेन-देन की अलग गणना नहीं दी गई है।

फिलहाल शुक्रवार की हड़ताल ने पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग को फिर चर्चा में ला दिया है। आगे संबंधित पक्षों के निर्णय और बातचीत से आंदोलन की दिशा स्पष्ट होगी। ग्राहकों के लंबित काम सामान्य कार्यदिवसों में पूरे किए जाने की स्थिति संबंधित शाखाओं पर निर्भर करेगी। कारोबार प्रभावित होने के बड़े दावों के बीच प्रमाणित दैनिक आंकड़ों और वास्तविक नुकसान का अंतर स्पष्ट रखना जरूरी रहेगा।

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