मध्य प्रदेश

साइबर ठगी के लिए दिया बैंक अकाउंट ₹9 लाख से ज्यादा का संदिग्ध लेनदेन युवक गिरफ्तार

Kavita2
22 Sept 2026 10:41 AM IST
साइबर ठगी के लिए दिया बैंक अकाउंट ₹9 लाख से ज्यादा का संदिग्ध लेनदेन युवक गिरफ्तार
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इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल होने वाले ‘म्यूल अकाउंट’ के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 25 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि युवक ने अपना बैंक खाता साइबर अपराध से जुड़े पैसों के लेनदेन के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस की जांच में इस खाते से कुल 9 लाख 6 हजार 958 रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन का पता चला है। आरोपी की पहचान मेघदूत नगर निवासी सुयश लाठ के रूप में हुई है।

तुकोगंज थाना पुलिस ने यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ के तहत की है। तुकोगंज पुलिस स्टेशन के प्रभारी जितेंद्र चौहान के मुताबिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर अपराध से संबंधित उपलब्ध डेटा की जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही थी। इसी प्रक्रिया में आरोपी से जुड़े बैंक खाते की गतिविधियां पुलिस के संज्ञान में आईं।

न्यू पलासिया के बैंक अकाउंट पर हुआ शक

पुलिस की जांच में सामने आया कि सुयश लाठ का न्यू पलासिया स्थित एक बैंक में खाता था। इस खाते में अलग-अलग माध्यमों से संदिग्ध रकम आने की जानकारी मिली। जांच आगे बढ़ाई गई तो पुलिस को आशंका हुई कि खाते का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को लेने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया गया।

अधिकारियों ने बैंक खाते से जुड़े ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड खंगाला। प्रारंभिक जांच में कुल 9,06,958 रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रकम में कितनी राशि सीधे साइबर ठगी के पीड़ितों से संबंधित है और खाते में पैसा आने के बाद उसे किन खातों में भेजा गया।

अलग-अलग राज्यों से मिली दो शिकायतें

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के बैंक खाते से जुड़ी दो साइबर अपराध शिकायतों की जानकारी भी मिली। ये शिकायतें अलग-अलग राज्यों से दर्ज कराई गई थीं। इसके बाद खाते की भूमिका को लेकर जांच और तेज की गई।

पुलिस ने संबंधित बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल जानकारी जुटाने के बाद सुयश लाठ से पूछताछ की। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने बैंक खाता किस व्यक्ति या गिरोह को उपलब्ध कराया था और इसके बदले उसे कोई कमीशन या अन्य आर्थिक लाभ मिला था या नहीं।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?

साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने, कुछ समय रखने या आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। साइबर अपराधी कई बार अपने नाम से बैंक खाते इस्तेमाल करने के बजाय दूसरे लोगों के खातों का सहारा लेते हैं।

इसके लिए खाताधारक को कमीशन या निश्चित रकम देने का लालच दिया जा सकता है। कुछ मामलों में नौकरी, निवेश या दूसरे बहाने से बैंक खाते की जानकारी हासिल की जाती है। साइबर ठगी से प्राप्त पैसा पहले ऐसे खातों में भेजा जाता है और फिर उसे कई दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इससे अपराधियों तक पहुंचने में जांच एजेंसियों को मुश्किल होती है।

बैंक खाते की पूरी ट्रेल खंगाल रही पुलिस

तुकोगंज पुलिस अब आरोपी के खाते में आए और उससे बाहर भेजे गए पैसों की पूरी ट्रेल की जांच कर रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि 9 लाख रुपये से ज्यादा के संदिग्ध ट्रांजैक्शन किन-किन तारीखों को किए गए और पैसा किन खातों से आया था।

इसके साथ ही उन बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है, जिनमें आरोपी के खाते से रकम भेजी गई। अगर जांच में अन्य संदिग्ध खातों का पता चलता है तो उनके खाताधारकों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उससे जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। जांच का उद्देश्य साइबर ठगी के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क तक पहुंचना है।

ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ के तहत की गई। अभियान में साइबर अपराध से संबंधित पोर्टल पर उपलब्ध शिकायतों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है।

इस डेटा की मदद से ऐसे बैंक खातों की पहचान की जाती है, जिनके खिलाफ अलग-अलग स्थानों से साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। एक ही बैंक खाते के खिलाफ अलग-अलग राज्यों से शिकायत सामने आने पर उसकी गतिविधियों की विस्तृत जांच की जाती है।

इंदौर पुलिस साइबर अपराध के मामलों में केवल सीधे ठगी करने वाले आरोपियों तक सीमित रहने के बजाय उन लोगों पर भी कार्रवाई कर रही है, जिनके बैंक खाते या अन्य वित्तीय माध्यम अपराध की रकम को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।

कमीशन के लालच में अकाउंट देना पड़ सकता है भारी

साइबर अपराधी अक्सर लोगों को बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले कमीशन का लालच देते हैं। बैंक खाते के साथ एटीएम कार्ड, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग या यूपीआई से संबंधित जानकारी भी हासिल की जा सकती है। इसके बाद खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया जाता है।

पुलिस लगातार लोगों को चेतावनी देती रही है कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, यूपीआई आईडी, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या ओटीपी किसी अन्य व्यक्ति को न दें। किसी दूसरे व्यक्ति को अपने बैंक खाते का इस्तेमाल करने की अनुमति देना गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है, खासकर यदि खाते का इस्तेमाल अपराध से जुड़े पैसों के लेनदेन में होता है।

साइबर नेटवर्क की तलाश जारी

फिलहाल पुलिस आरोपी सुयश लाठ से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अलग-अलग राज्यों से सामने आई दो शिकायतों की जानकारी भी संबंधित एजेंसियों से जुटाई जा रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि दोनों साइबर ठगी की घटनाएं किस तरीके से अंजाम दी गई थीं और उनमें शामिल अपराधियों का आपस में कोई संबंध है या नहीं।

पुलिस के सामने अब सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपी का बैंक खाता साइबर अपराधियों तक कैसे पहुंचा और 9,06,958 रुपये के संदिग्ध लेनदेन में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी। जांच पूरी होने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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