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मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान मोबाइल इस्तेमाल पर रोक, 1 अक्टूबर से नया नियम

भोपाल। मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे नए पर्यटन सत्र के साथ सफारी के नियम और सख्त होने जा रहे हैं। अब जंगल सफारी के दौरान पर्यटक मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। पर्यटक मोबाइल फोन अपने साथ जिप्सी में जरूर ले जा सकेंगे, लेकिन टाइगर रिजर्व में प्रवेश से पहले फोन को स्विच ऑफ करके विशेष लॉक वाले बॉक्स में रखना होगा।
नई व्यवस्था के तहत मोबाइल रखने वाले बॉक्स की चाबी जिप्सी चालक के पास रहेगी। सफारी पूरी होने के बाद पर्यटकों को उनका मोबाइल फोन वापस दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि सफारी के दौरान पर्यटक न तो मोबाइल से फोटो खींच सकेंगे और न ही वीडियो बना सकेंगे।
पार्क प्रबंधन का उद्देश्य जंगल के अंदर पर्यटकों की गतिविधियों को नियंत्रित करना और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि पर्यटकों की मौजूदगी और मोबाइल फोन के इस्तेमाल से वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर असर न पड़े।
मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व देशभर के पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। नए पर्यटन सत्र के शुरू होते ही बड़ी संख्या में पर्यटक जंगल सफारी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में पार्क प्रबंधन ने सफारी के दौरान अनुशासन को और सख्त करने का निर्णय लिया है।
मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक का सबसे बड़ा असर उन पर्यटकों पर पड़ेगा जो सफारी के दौरान लगातार फोटो और वीडियो बनाते हैं। अब उन्हें जंगल के भीतर मोबाइल का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
पर्यटकों को प्रवेश द्वार पर ही अपना मोबाइल फोन बंद करना होगा। इसके बाद फोन को जिप्सी में मौजूद विशेष लॉक बॉक्स में रखा जाएगा। बॉक्स इस तरह से बंद रहेगा कि सफारी के दौरान पर्यटक उसे खोल न सकें।
बॉक्स की चाबी वाहन चालक के पास रहेगी। सफारी खत्म होने और वाहन के बाहर निकलने के बाद ही मोबाइल फोन वापस दिया जाएगा। इस व्यवस्था से मोबाइल फोन के अनियंत्रित इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी की गई है।
जंगल के भीतर फोटो और वीडियो बनाने के लिए मोबाइल फोन पर निर्भर रहने वाले पर्यटकों को अब नए नियम के अनुसार खुद को तैयार करना होगा। सफारी के दौरान मोबाइल स्क्रीन देखने, वीडियो बनाने या फोटो खींचने जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।
पार्क प्रबंधन का मानना है कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल सफारी के अनुभव और वन्यजीवों दोनों पर असर डाल सकता है। कई बार पर्यटक फोटो या वीडियो बनाने के लिए जिप्सी के अंदर अनावश्यक हलचल करते हैं।
इसके अलावा किसी वन्यजीव को देखने के बाद कई पर्यटक एक साथ मोबाइल निकालकर रिकॉर्डिंग करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में आवाज, गतिविधि और भीड़ का असर वन्यजीवों के व्यवहार पर पड़ सकता है।
नए नियम का उद्देश्य सफारी को शांत और व्यवस्थित बनाना भी है। पर्यटक जंगल के वातावरण और वन्यजीवों को बिना किसी अनावश्यक व्यवधान के देख सकें, इसके लिए मोबाइल के इस्तेमाल को नियंत्रित किया जा रहा है।
जंगल सफारी में सबसे महत्वपूर्ण नियम वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना और उनके प्राकृतिक माहौल में किसी तरह का हस्तक्षेप न करना है। इसी सोच के तहत मोबाइल फोन को सफारी के दौरान बंद रखने की व्यवस्था की गई है।
मध्य प्रदेश में कई प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व हैं, जहां हर पर्यटन सत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। सफारी के दौरान बाघ सहित दूसरे वन्यजीवों को देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं।
नए पर्यटन सत्र में पर्यटकों को पहले की तुलना में अधिक अनुशासित तरीके से सफारी करनी होगी। मोबाइल फोन भले ही साथ रखा जा सकेगा, लेकिन उसका उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
इस नई व्यवस्था में जिप्सी चालक की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। चालक के पास मोबाइल बॉक्स की चाबी रहेगी और उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि सफारी के दौरान बॉक्स न खोला जाए।
सफारी पूरी होने के बाद संबंधित पर्यटक को उसका मोबाइल फोन लौटाया जाएगा। इससे पार्क के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर निगरानी रखना आसान होगा।
पार्क प्रबंधन की कोशिश है कि नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका पालन भी कराया जाए। इसके लिए प्रवेश के समय पर्यटकों को नई व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी।
जंगल के भीतर मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाने पर रोक लगने के बाद सफारी का स्वरूप भी थोड़ा बदलेगा। पर्यटकों को मोबाइल स्क्रीन के बजाय सीधे जंगल और वन्यजीवों को देखने पर ध्यान देना होगा।
इस फैसले के पीछे वन्यजीवों की सुरक्षा को प्रमुख कारण माना जा रहा है। जंगल में इंसानी गतिविधियां जितनी सीमित रहेंगी, वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में उतना ही कम व्यवधान होगा।
सफारी मार्गों पर वाहन पहले से तय नियमों के अनुसार चलते हैं। अब मोबाइल फोन के उपयोग पर रोक जोड़ने के बाद पर्यटकों के व्यवहार को भी ज्यादा नियंत्रित किया जाएगा।
पार्क प्रबंधन यह भी चाहता है कि किसी वन्यजीव की मौजूदगी के दौरान पर्यटक उत्साह में ऐसी गतिविधियां न करें जिनसे जानवर परेशान हों।
मोबाइल फोन पर रोक से वीडियो बनाने, लाइव लोकेशन या सोशल मीडिया पर तुरंत सामग्री साझा करने जैसी गतिविधियां भी सफारी के दौरान संभव नहीं होंगी।
पर्यटक सफारी खत्म होने के बाद ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर सकेंगे। यानी पार्क के अंदर बिताया गया पूरा समय बिना मोबाइल उपयोग के रहेगा।
नए नियम की जानकारी पर्यटन सत्र शुरू होने से पहले ही सामने आ गई है, ताकि सफारी बुक करने वाले लोग इसके लिए तैयार रहें।
1 अक्टूबर से टाइगर रिजर्व में प्रवेश करने वाले पर्यटकों को इस नियम का पालन करना होगा। फोन को स्विच ऑफ करना और लॉक बॉक्स में रखना सफारी प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में नए पर्यटन सत्र के साथ कई पर्यटक लंबे समय से सफारी शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। अब उन्हें नए नियमों के साथ जंगल का अनुभव मिलेगा।
फिलहाल सबसे बड़ा बदलाव मोबाइल फोन को लेकर है। पर्यटक फोन लेकर तो जा सकेंगे, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
पार्क प्रबंधन का मानना है कि इस व्यवस्था से सफारी अधिक शांत, सुरक्षित और वन्यजीवों के अनुकूल बनेगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पर्यटकों का ध्यान फोटो और वीडियो बनाने से हटकर जंगल के वास्तविक अनुभव पर अधिक रहेगा।
1 अक्टूबर से शुरू होने वाले पर्यटन सत्र में यही नियम सभी संबंधित सफारी वाहनों और पर्यटकों पर लागू किया जाएगा।
जंगल के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक के साथ मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व अब पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल पर्यटकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि सफारी के दौरान मोबाइल फोन उनके पास रहेगा, लेकिन वह बंद अवस्था में लॉक बॉक्स में रखा जाएगा और सफारी समाप्त होने के बाद ही वापस मिल सकेगा।





