मध्य प्रदेश

जबलपुर में 75 साल पुरानी इमारत की बालकनी गिरी, 10 से ज्यादा लोग तीन घंटे फंसे रहे

Kavita2
6 Oct 2026 5:55 PM IST
जबलपुर में 75 साल पुरानी इमारत की बालकनी गिरी, 10 से ज्यादा लोग तीन घंटे फंसे रहे
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जबलपुर : नया मोहल्ला इलाके में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात बड़ा हादसा टल गया। यहां करीब 75 साल पुरानी दो मंजिला इमारत की बालकनी अचानक गिर गई। हादसे के समय इमारत के अंदर परिवार के 10 से ज्यादा सदस्य मौजूद थे। बालकनी गिरने के बाद बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया, जिससे सभी लोग करीब तीन घंटे तक मकान के भीतर ही फंसे रहे।

घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास के लोगों ने शोर सुनकर तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और नगर निगम समेत संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। इमारत पुरानी होने के कारण सीधे अंदर जाकर लोगों को निकालना जोखिम भरा था। ऐसे में बचाव टीम ने सावधानी से अभियान चलाया।

जानकारी के मुताबिक, हादसा देर रात उस समय हुआ जब परिवार के सदस्य घर के अंदर थे। अचानक तेज आवाज के साथ बालकनी का हिस्सा नीचे गिर गया। इससे मकान का मुख्य निकास मार्ग प्रभावित हो गया और परिवार के सदस्य बाहर नहीं निकल सके।

बालकनी गिरने के बाद मलबा और टूटा हुआ हिस्सा रास्ते में जमा हो गया। परिवार के लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन पुरानी इमारत के बाकी हिस्से को नुकसान पहुंचने की आशंका के कारण उन्हें भीतर ही रुकना पड़ा।

करीब तीन घंटे तक सभी लोग मकान के अंदर फंसे रहे। इस दौरान बाहर मौजूद रिश्तेदार और स्थानीय लोग लगातार उनकी मदद के लिए प्रयास करते रहे।

सूचना मिलने के बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने पहले भवन की स्थिति देखी और फिर सुरक्षित रास्ता तैयार करने की योजना बनाई। मुख्य रास्ता बंद होने के कारण टीम ने इमारत की एक दीवार तोड़कर वैकल्पिक रास्ता बनाया।

इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी व्यक्ति के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं है।

इमारत से बाहर आने के बाद परिवार के सदस्यों ने राहत की सांस ली। करीब तीन घंटे तक अंदर फंसे रहने के कारण परिवार में भय का माहौल था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, मकान काफी पुराना है और लगभग 75 वर्ष पहले बनाया गया था। समय के साथ उसकी संरचना कमजोर हो चुकी थी। हालांकि बालकनी अचानक किस कारण से गिरी, इसका वास्तविक कारण जांच के बाद ही साफ होगा।

नगर निगम की टीम अब इमारत की स्थिति की जांच कर सकती है। यह देखा जाएगा कि मकान का बाकी हिस्सा रहने लायक है या नहीं।

यदि भवन के अन्य हिस्सों में भी कमजोरी पाई जाती है तो सुरक्षा के लिहाज से परिवार को वहां रहने से रोका जा सकता है।

पुरानी इमारतों में समय के साथ दीवारों, छत और बालकनी के हिस्सों में दरारें आने का खतरा रहता है। यदि नियमित मरम्मत न हो तो ऐसे ढांचे अचानक गिर सकते हैं।

नया मोहल्ला क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद आसपास की पुरानी इमारतों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि अत्यधिक जर्जर भवनों की समय-समय पर जांच कराई जाए।

नगर निगम ऐसे भवनों की पहचान कर उन्हें मरम्मत या खाली कराने के निर्देश दे सकता है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।

हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। परिवार के लोग अंदर से मदद के लिए आवाज लगा रहे थे, जबकि बाहर मौजूद लोग लगातार उनसे संपर्क बनाए हुए थे।

नगर निगम की टीम ने दीवार तोड़ते समय भी सावधानी बरती, क्योंकि किसी गलत हिस्से पर दबाव पड़ने से पुरानी इमारत का दूसरा भाग भी प्रभावित हो सकता था।

बचाव अभियान पूरा होने के बाद सभी सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। परिवार ने राहत कार्य में मदद करने वाले कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का आभार जताया।

घटना ने एक बार फिर पुराने भवनों की नियमित जांच की जरूरत को सामने रखा है। शहर के कई इलाकों में दशकों पुराने मकान मौजूद हैं, जिनकी संरचनात्मक मजबूती समय के साथ कम हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मकानों में बालकनी, छज्जे और छत के हिस्सों की समय-समय पर जांच जरूरी है। कहीं दरार या झुकाव दिखाई दे तो तुरंत मरम्मत करानी चाहिए।

बरसात और नमी के कारण भी पुराने भवन कमजोर हो सकते हैं। पानी दीवारों और लोहे के हिस्सों तक पहुंचने से निर्माण सामग्री की मजबूती प्रभावित हो सकती है।

इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यदि बालकनी गिरने के समय नीचे कोई व्यक्ति मौजूद होता तो हादसा गंभीर हो सकता था।

परिवार के 10 से ज्यादा सदस्य भी अंदर फंसे थे, लेकिन नगर निगम की समय पर कार्रवाई से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

फिलहाल घटना के बाद इमारत की तकनीकी स्थिति का आकलन महत्वपूर्ण होगा। यह तय किया जाएगा कि भवन की मरम्मत संभव है या उसे खाली कराना जरूरी होगा।

स्थानीय प्रशासन से भी उम्मीद की जा रही है कि वह क्षेत्र की अन्य जर्जर इमारतों का सर्वे कराएगा।

जबलपुर के नया मोहल्ला में हुई इस घटना ने कुछ घंटों के लिए पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया था, लेकिन बचाव अभियान सफल रहने और किसी के घायल न होने से बड़ी राहत मिली है।

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