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सिद्दीकीगंज। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मियों पर कथित बदसलूकी और मारपीट का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को सिद्दीकीगंज पुलिस स्टेशन का घेराव करने की योजना बनाई थी। हालांकि पुलिस अधिकारियों की ओर से मामले की जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद संगठन ने प्रस्तावित घेराव रद्द कर दिया। पुलिस के सब-डिविजनल ऑफिसर दामोदर गुप्ता ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि शिकायत की जांच की जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
मामला खाचरौद निवासी बजरंग दल के दो सदस्यों देवेंद्र सिंह और हेमंत सिंह की शिकायत से जुड़ा है। दोनों ने शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर कुछ पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर शिकायत की। उनका आरोप है कि गोवंश की कथित तस्करी से संबंधित सूचना देने के बावजूद पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंची और बाद में उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी और मारपीट की गई।
गोवंश तस्करी की सूचना देने का दावा
देवेंद्र सिंह और हेमंत सिंह के अनुसार उन्हें एक वाहन के जरिए गायों की कथित तस्करी किए जाने की जानकारी मिली थी। दोनों का दावा है कि उन्होंने इसकी सूचना सिद्दीकीगंज पुलिस स्टेशन को दी और पुलिस से मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
आरोप है कि सूचना देने के बावजूद पुलिस टीम समय पर मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद दोनों ने स्वयं संदिग्ध वाहन का पीछा करने का फैसला किया। उन्होंने वाहन का पीछा किया और उसमें मौजूद लोगों से मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए कहा।
इस दौरान वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ और वाहन में मौजूद लोग कौन थे, इन तथ्यों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी का आरोप
बजरंग दल के दोनों सदस्यों ने आरोप लगाया कि मामले के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया। शिकायत में कथित बदसलूकी के साथ मारपीट का भी आरोप लगाया गया है।
इस घटना की जानकारी संगठन के अन्य कार्यकर्ताओं को मिलने के बाद नाराजगी बढ़ गई। कार्यकर्ताओं ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई और शुक्रवार को सिद्दीकीगंज पुलिस स्टेशन का घेराव करने की तैयारी शुरू कर दी।
संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना था कि यदि उन्होंने कथित गोवंश तस्करी की सूचना पुलिस को दी थी तो उस सूचना पर समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए थी। इसके बजाय शिकायतकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की बात सामने आने से मामला और गंभीर हो गया।
एसपी से की गई शिकायत
देवेंद्र सिंह और हेमंत सिंह ने शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक के समक्ष अपनी शिकायत रखी। उन्होंने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के व्यवहार की जांच कराने की मांग की।
शिकायत के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेने की बात कही। पुलिस अब दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक घटनाक्रम का पता लगा सकती है।
जांच में यह भी देखा जा सकता है कि कथित गोवंश तस्करी की सूचना पुलिस को किस समय दी गई थी, सूचना मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई और शिकायतकर्ताओं तथा पुलिसकर्मियों के बीच विवाद किन परिस्थितियों में हुआ।
पुलिस स्टेशन के घेराव की थी तैयारी
पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सिद्दीकीगंज पुलिस स्टेशन का घेराव करने की योजना बनाई थी। शुक्रवार को संगठन के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन की तैयारी में थे।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने संगठन के लोगों से बातचीत की। सब-डिविजनल ऑफिसर दामोदर गुप्ता ने कार्यकर्ताओं को शिकायत की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद बजरंग दल ने फिलहाल पुलिस स्टेशन का घेराव करने का फैसला वापस ले लिया।
आश्वासन के बाद टला प्रदर्शन
पुलिस अधिकारी के आश्वासन के बाद संभावित विरोध प्रदर्शन टलने से प्रशासन ने भी राहत महसूस की। यदि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पुलिस स्टेशन पहुंचते तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत पड़ सकती थी।
अब संगठन की नजर पुलिस जांच पर रहेगी। कार्यकर्ता चाहते हैं कि उनकी शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए।
दूसरी तरफ पुलिस के लिए शिकायत में लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक जांच करना महत्वपूर्ण होगा। किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई से पहले घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।
गोवंश तस्करी के आरोपों की भी जांच अहम
पूरे मामले में पुलिसकर्मियों के व्यवहार के अलावा कथित गोवंश तस्करी की सूचना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। पुलिस यह पता लगा सकती है कि जिस वाहन का पीछा किए जाने की बात कही जा रही है, उसमें मवेशियों का परिवहन किस उद्देश्य से किया जा रहा था और वाहन के पास आवश्यक दस्तावेज थे या नहीं।
वाहन की पहचान होने पर उसके मालिक, चालक और यात्रा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि किसी तरह के गैरकानूनी परिवहन की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनों के तहत अलग कार्रवाई की जा सकती है।
जांच के नतीजों पर टिकी नजर
फिलहाल बजरंग दल ने पुलिस स्टेशन के प्रस्तावित घेराव को रद्द कर दिया है। एसडीओपी दामोदर गुप्ता की ओर से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि देवेंद्र सिंह और हेमंत सिंह द्वारा पुलिसकर्मियों पर लगाए गए बदसलूकी और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है। साथ ही कथित गोवंश तस्करी से जुड़े मामले की वास्तविक स्थिति भी जांच के बाद सामने आएगी।





