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अविवाहित बेटी की प्रसूति छिपाने की कोशिश, नवजात की जान खतरे में

मध्य प्रदेश: बालाघाट जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। वारासिवनी थाना क्षेत्र के एक गांव में अविवाहित बेटी की प्रसूति की बात छिपाने के लिए नवजात शिशु को कथित तौर पर गोबर के ढेर में जिंदा दफन कर दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। वहीं, घटना का खुलासा होने के बाद नवजात के नाना ने कथित रूप से कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह घटना शुक्रवार रात की बताई जा रही है। गांव के कुछ लोगों ने रात के समय एक नवजात बच्चे के रोने की आवाज सुनी थी। ग्रामीणों को शक हुआ कि आसपास कहीं कोई बच्चा परेशानी में है। जब उन्होंने संबंधित परिवार से इस बारे में जानकारी लेने की कोशिश की तो परिवार के सदस्यों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद ग्रामीणों का संदेह और गहरा गया।
ग्रामीणों ने मामले की जानकारी गांव के अन्य लोगों को दी और परिवार से दोबारा पूछताछ की गई। इसके बाद गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत के दौरान आशा कार्यकर्ता ने बताया कि परिवार की अविवाहित बेटी ने एक बच्चे को जन्म दिया था। इस जानकारी के सामने आने के बाद ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही वारासिवनी पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में गोबर के ढेर को हटाकर नवजात का शव बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक, नवजात के मुंह और गर्दन पर कपड़ा बंधा हुआ मिला। घटना की गंभीरता को देखते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नवजात की मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और परिवार के सदस्यों सहित आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है।
घटना के खुलासे के बाद नवजात के नाना ने कथित तौर पर कीटनाशक पी लिया। उनकी हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार, बुजुर्ग ने यह कदम किस वजह से उठाया, इसकी भी जांच की जा रही है।
वारासिवनी एसडीओपी अभिषेक चौधरी ने बताया कि फिलहाल मामले में आकस्मिक मृत्यु का प्रकरण दर्ज किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर समाज में अविवाहित मातृत्व, सामाजिक दबाव और नवजात बच्चों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना से पूरा गांव स्तब्ध है। लोगों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नवजात को किस परिस्थिति में और किसके द्वारा गोबर के ढेर में दफनाया गया। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।





