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इंदौर में 5.69 करोड़ की एम्फेटामाइन जब्त, SUV सवार तीन आरोपी गिरफ्तार

इंदौर। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने मध्य प्रदेश के इंदौर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 7.116 किलोग्राम एम्फेटामाइन जब्त की है। अधिकारियों के अनुसार बरामद ड्रग्स की अनुमानित कीमत करीब 5.69 करोड़ रुपये है। कार्रवाई के दौरान तस्करी के शक में कर्नाटक नंबर वाली एक काली SUV में सवार तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई इंदौर के बिचोली मर्दाना इलाके के पास की गई।
जानकारी के अनुसार, DRI को पहले से पुख्ता सूचना मिली थी कि कर्नाटक नंबर की एक काली SUV में सवार तीन लोग एम्फेटामाइन की खेप लेकर जा रहे हैं। सूचना के आधार पर DRI अधिकारियों ने केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के कर्मचारियों के साथ संयुक्त रूप से निगरानी शुरू की। टीम ने गुरुवार सुबह उज्जैन-देवास टोल प्लाजा के आसपास संदिग्ध वाहन की तलाश शुरू की।
जांच और निगरानी के दौरान अधिकारियों को वह संदिग्ध काली SUV टोल प्लाजा की ओर आती हुई दिखाई दी। टीम ने वाहन को रोकने के लिए संकेत दिए। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक चालक ने रुकने के बजाय बैरिकेड तोड़ दिया और तेज रफ्तार से वहां से भागने लगा। इसके बाद DRI और CBN की संयुक्त टीम ने वाहन का पीछा शुरू कर दिया।
अधिकारियों के अनुसार संदिग्ध SUV को रोकने के लिए करीब डेढ़ घंटे तक पीछा किया गया। इस दौरान वाहन तेज रफ्तार से आगे बढ़ता रहा और उसे पकड़ने के लिए अधिकारियों ने कई स्तर पर निगरानी तथा घेराबंदी की। लगातार पीछा करने के बाद आखिरकार संदिग्ध वाहन को इंदौर के बिचोली मर्दाना के पास एक पेट्रोल पंप पर रोक लिया गया।
वाहन रुकने के बाद अधिकारियों ने उसमें सवार तीनों लोगों को पकड़ लिया और SUV की तलाशी ली। तलाशी के दौरान 7.116 किलोग्राम एम्फेटामाइन बरामद होने का दावा किया गया। अधिकारियों के मुताबिक बरामद पदार्थ की बाजार में अनुमानित कीमत करीब 5.69 करोड़ रुपये है। जब्ती के बाद ड्रग्स को सुरक्षित कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी गई।
एम्फेटामाइन एक सिंथेटिक साइकोस्टिमुलेंट मादक पदार्थ है और भारत में इसके उत्पादन, कब्जे, परिवहन तथा बिक्री को लेकर सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां न केवल बरामद पदार्थ और आरोपियों की भूमिका की जांच करती हैं, बल्कि यह भी पता लगाने की कोशिश करती हैं कि ड्रग्स कहां से लाई गई और इसकी आपूर्ति कहां की जानी थी।
इस मामले में भी DRI और CBN अधिकारियों के सामने अब कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। सबसे पहले यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि बरामद एम्फेटामाइन की खेप का स्रोत क्या था। इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि तीनों आरोपी इसे किस व्यक्ति या नेटवर्क तक पहुंचाने वाले थे और तस्करी की इस गतिविधि में उनके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हो सकते हैं।
जांच एजेंसियां SUV के दस्तावेजों और उसमें सवार लोगों के यात्रा रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर सकती हैं। वाहन किसके नाम पर पंजीकृत है, उसे किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा था और आरोपियों ने किस मार्ग से यात्रा शुरू की थी, इन सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती सूचना कर्नाटक नंबर वाली SUV में ड्रग्स ले जाए जाने से संबंधित थी। इसलिए जांच एजेंसियां कर्नाटक और मध्य प्रदेश के बीच इस नेटवर्क के संभावित संपर्कों को भी खंगाल सकती हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित राज्यों की एजेंसियों से भी जानकारी साझा की जा सकती है।
वाहन को रोकने से पहले चालक द्वारा बैरिकेड तोड़कर भागने की घटना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे अधिकारियों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि संदिग्धों को जांच एजेंसियों की मौजूदगी की जानकारी कैसे हुई और उन्होंने मौके से भागने का फैसला क्यों किया। वाहन के इस व्यवहार को देखते हुए आरोपियों की मंशा और यात्रा की परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा सकती है।
डेढ़ घंटे तक चले पीछा अभियान के बाद पेट्रोल पंप पर SUV को रोकना कार्रवाई का महत्वपूर्ण चरण रहा। अधिकारियों ने वाहन को सुरक्षित तरीके से कब्जे में लेकर तीनों संदिग्धों को हिरासत में लिया। इसके बाद बरामद ड्रग्स का वजन और अन्य आवश्यक परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई।
जांच एजेंसियां बरामद एम्फेटामाइन के नमूने भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच के लिए भेज सकती हैं। इससे जब्त पदार्थ की रासायनिक पहचान और उसकी प्रकृति की पुष्टि की जाएगी। इसके साथ ही जब्ती से संबंधित दस्तावेज तैयार किए जाएंगे और आरोपियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिलने की संभावना है। जांचकर्ता यह जानने की कोशिश करेंगे कि क्या आरोपी पहले भी किसी ऐसी गतिविधि में शामिल रहे हैं या यह पहली बार था। उनके पुराने रिकॉर्ड और संपर्कों की भी जांच की जा सकती है।
DRI राजस्व खुफिया से जुड़ी एक प्रमुख केंद्रीय जांच एजेंसी है, जो सीमा शुल्क उल्लंघन और तस्करी के मामलों की जांच करती है। मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही से जुड़े मामलों में भी एजेंसी कार्रवाई करती रही है। CBN के साथ संयुक्त कार्रवाई से इस मामले में नारकोटिक्स से संबंधित विशेषज्ञता और जांच संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
इंदौर में हुई इस कार्रवाई से यह भी पता चलता है कि मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए हाईवे और टोल प्लाजा जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। अंतरराज्यीय सड़कों का इस्तेमाल तस्करी के लिए किए जाने की आशंका के चलते संदिग्ध वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।
अब जांच एजेंसियों का ध्यान बरामद ड्रग्स के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है। केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के आधार पर तस्करी की पूरी तस्वीर सामने नहीं आएगी। यह पता लगाना जरूरी होगा कि खेप कहां तैयार या हासिल की गई, इसे किसने आरोपियों तक पहुंचाया और आगे इसकी डिलीवरी किसे होनी थी।
आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल संपर्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनसे कथित तौर पर संपर्क में रहे लोगों और ड्रग्स की डील से संबंधित संभावित जानकारी सामने आ सकती है। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले एजेंसियों को डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों का सत्यापन करना होगा।
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी देखा जा सकता है कि क्या बरामद एम्फेटामाइन किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा है। कर्नाटक नंबर वाले वाहन और मध्य प्रदेश के रास्ते से ड्रग्स की आवाजाही होने के कारण जांच का दायरा दूसरे राज्यों तक बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल DRI ने 7.116 किलोग्राम एम्फेटामाइन जब्त कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जब्त ड्रग्स की अनुमानित कीमत 5.69 करोड़ रुपये बताई गई है। अधिकारियों ने संदिग्ध वाहन को भी कब्जे में ले लिया है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
पूरी कार्रवाई की शुरुआत एक पुख्ता सूचना से हुई थी। उज्जैन-देवास टोल प्लाजा पर निगरानी के दौरान संदिग्ध SUV की पहचान हुई, लेकिन चालक के बैरिकेड तोड़कर भागने के बाद मामला हाई-स्पीड पीछा अभियान में बदल गया। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद बिचोली मर्दाना के पास पेट्रोल पंप पर वाहन को रोका गया और तीनों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
अब जांच का सबसे अहम चरण आरोपियों से पूछताछ और ड्रग्स की आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाना है। यदि पूछताछ और अन्य साक्ष्यों से किसी बड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। फिलहाल DRI और CBN पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटे हैं और बरामद 5.69 करोड़ रुपये की एम्फेटामाइन के स्रोत तथा संभावित गंतव्य का पता लगाया जा रहा है।





