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मध्य प्रदेश
भोपाल में 3 अक्टूबर को नए डेयरी प्लांट का उद्घाटन करेंगे अमित शाह
Ratna Netam
30 Sept 2026 7:44 PM IST

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भोपाल। मध्य प्रदेश में दूध की प्रोसेसिंग और वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को भोपाल कोऑपरेटिव मिल्क यूनियन परिसर में तैयार किए गए फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का उद्घाटन करेंगे। अमित शाह का भोपाल दौरा 3 अक्टूबर को प्रस्तावित है और इस दौरान डेयरी तथा सहकारिता क्षेत्र से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार नए फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का निर्माण कुल 16.80 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसमें भारत सरकार की ओर से 6 करोड़ रुपये की ग्रांट दी गई है, जबकि भोपाल कोऑपरेटिव मिल्क यूनियन ने 10.80 करोड़ रुपये का योगदान किया है।
प्लांट की दूध प्रोसेसिंग क्षमता 40 हजार लीटर प्रतिदिन बताई गई है। यहां आधुनिक मशीनरी और तकनीक की मदद से दूध के साथ-साथ दही, छाछ और दूसरे वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। परियोजना की जानकारी के मुताबिक प्लांट में प्रतिदिन 10 हजार लीटर दूध, 10 हजार लीटर दही और 30 हजार लीटर छाछ से संबंधित उत्पादन और प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित की गई हैं।
डेयरी सेक्टर में वैल्यू एडिशन को किसानों और दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। केवल तरल दूध की बिक्री पर निर्भर रहने के बजाय दही, छाछ, पनीर, घी और दूसरे उत्पाद तैयार करने से सहकारी दुग्ध संघों को बाजार में अधिक विकल्प मिलते हैं। इससे अतिरिक्त दूध का उपयोग करने और उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
भोपाल का नया प्लांट इसी दिशा में तैयार किया गया है। आधुनिक मशीनों की मदद से उत्पादन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और स्वचालित बनाया जाएगा। इससे उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश में सहकारी डेयरी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर पिछले कुछ समय से कई कदम उठाए गए हैं। अप्रैल 2025 में मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, राज्य के विभिन्न दुग्ध संघों और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच डेयरी सहकारिता के विस्तार को लेकर समझौता किया गया था। इसमें भोपाल दुग्ध संघ भी शामिल था।
इस सहयोग का उद्देश्य गांवों में दुग्ध सहकारी समितियों की पहुंच बढ़ाने, दूध संग्रह और प्रोसेसिंग क्षमता मजबूत करने तथा पशुपालकों को संगठित बाजार से जोड़ने पर काम करना है। सहकारी मॉडल में किसानों से दूध खरीदकर उसे प्रोसेस किया जाता है और बाद में विभिन्न उत्पादों के रूप में बाजार में पहुंचाया जाता है।
केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय भी पिछले कुछ वर्षों से डेयरी सहकारी संस्थाओं के विस्तार और वैल्यू एडिशन पर जोर दे रहा है। अमित शाह ने पहले भी कहा है कि डेयरी प्लांट में फूड प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भोपाल में तैयार नया फर्मेंटेड प्रोडक्ट प्लांट विशेष रूप से दही और छाछ जैसे उत्पादों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहरी बाजारों में पैकेज्ड दही, छाछ और दूसरे फर्मेंटेड डेयरी उत्पादों की मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में सहकारी दूध संघ अपनी उत्पाद श्रृंखला बढ़ाकर नए उपभोक्ताओं तक पहुंच सकते हैं।
अमित शाह के 3 अक्टूबर के भोपाल दौरे के दौरान राज्य स्तरीय पशुपालक सम्मेलन का भी आयोजन प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक भेल दशहरा मैदान में होने वाले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पशुपालकों और डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों के शामिल होने की तैयारी है। इस दौरे के दौरान अन्य डेयरी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं।
प्लांट शुरू होने के बाद भोपाल दुग्ध संघ को स्थानीय स्तर पर अधिक मात्रा में वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पाद बनाने की सुविधा मिलेगी। इससे दूध की उपलब्धता अधिक होने के समय उसे केवल तरल दूध के रूप में बेचने का दबाव कम हो सकता है। अतिरिक्त दूध को प्रोसेस कर दही, छाछ और अन्य उत्पादों में बदलना डेयरी संस्थाओं के लिए बाजार प्रबंधन का महत्वपूर्ण तरीका माना जाता है।
आधुनिक मशीनरी के इस्तेमाल से उत्पादन के अलग-अलग चरणों में स्वचालन बढ़ाया जा सकेगा। इसमें दूध की प्रोसेसिंग, फर्मेंटेशन, पैकेजिंग और उत्पादों को सुरक्षित रखने से जुड़ी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। बेहतर प्रोसेसिंग व्यवस्था से एक समान गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
इस परियोजना का फायदा सहकारी व्यवस्था से जुड़े दुग्ध उत्पादकों तक पहुंचाने पर भी जोर रहेगा। दूध की प्रोसेसिंग और बिक्री क्षमता बढ़ने पर दुग्ध संघ किसानों से अधिक दूध खरीदने और नए बाजार विकसित करने की स्थिति में आ सकते हैं। हालांकि किसानों की आय पर वास्तविक असर खरीद मूल्य, दूध संग्रह, बिक्री और प्लांट के उपयोग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।
भारत दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में शामिल है और देश में डेयरी उद्योग का बड़ा हिस्सा छोटे पशुपालकों से जुड़ा है। इसी कारण सहकारी डेयरी मॉडल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आय से जोड़कर देखा जाता है।
भोपाल में बनने वाला फर्मेंटेड प्रोडक्ट प्लांट भी इसी मॉडल को आधुनिक तकनीक और वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की कोशिश है। 16.80 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस संयंत्र के शुरू होने के बाद भोपाल कोऑपरेटिव मिल्क यूनियन की दही, छाछ और अन्य प्रोसेस्ड डेयरी उत्पादों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
3 अक्टूबर को अमित शाह द्वारा प्लांट के उद्घाटन के साथ इसकी नियमित गतिविधियों की शुरुआत का रास्ता साफ होगा। राज्य सरकार और सहकारी संस्थाओं को उम्मीद है कि आधुनिक प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से मध्य प्रदेश के डेयरी सेक्टर को मजबूत करने और पशुपालकों को संगठित बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।
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