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छतरपुर : मध्य प्रदेश में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं के कारण प्रभावित हो रहे लोगों के विस्थापन के मुद्दे को लेकर अनशन कर रहे एक्टिविस्ट अमित भटनागर ने अपना 18 दिन लंबा उपवास समाप्त कर दिया है। स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती होने के बाद छुट्टी मिलने पर जब वे अपने गृह नगर बिजावर पहुंचे, तो परिवार के आग्रह पर उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया।
अमित भटनागर के भाई अंकित भटनागर ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि अनशन के दौरान अमित की तबीयत काफी खराब हो गई थी। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे छतरपुर जिले के बिजावर स्थित अपने घर पहुंचे। वहां उनकी मां ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।
अंकित ने कहा, “उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। घर पहुंचने पर हमारी मां ने उनसे अनशन तुड़वाया।” परिवार के सदस्यों ने भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई और उनसे आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की।
अमित भटनागर पिछले 18 दिनों से केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और इससे जुड़ी सिंचाई योजनाओं के कारण प्रभावित होने वाले ग्रामीणों के विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दे को लेकर अनशन कर रहे थे। उनका कहना था कि परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए और विस्थापन से पहले उचित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए।
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना देश की प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ाना है। हालांकि, परियोजना के कारण कुछ क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और विस्थापन को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से चिंताएं जताई जाती रही हैं।
अमित भटनागर लंबे समय से क्षेत्रीय मुद्दों और ग्रामीणों के अधिकारों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपने आंदोलन के माध्यम से मांग उठाई थी कि परियोजना प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और आजीविका से जुड़े अधिकार दिए जाएं।
उनका कहना था कि विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन इनसे प्रभावित होने वाले लोगों के हितों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार से मांग की थी कि विस्थापन की प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी जाए और प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
अनशन समाप्त होने के बाद अब आंदोलन से जुड़े लोगों की नजर सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर है। समर्थकों का कहना है कि अमित भटनागर ने प्रभावित लोगों की आवाज उठाने के लिए लंबा संघर्ष किया है और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार पहले भी कहती रही है कि बड़ी परियोजनाओं में प्रभावित लोगों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए तय नियमों का पालन किया जाता है।
बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी और सिंचाई लंबे समय से प्रमुख मुद्दे रहे हैं। केन-बेतवा परियोजना को क्षेत्र में जल संकट कम करने और कृषि को मजबूती देने वाली महत्वपूर्ण योजना के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, परियोजना से जुड़े सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी विभिन्न संगठनों द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं।
अमित भटनागर के अनशन खत्म करने के बाद अब आगे की रणनीति को लेकर उनके समर्थकों और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने किस रूप में अपनी मांगों को आगे बढ़ाया जाएगा, इस बारे में अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
परिवार के अनुसार, फिलहाल अमित भटनागर का स्वास्थ्य प्राथमिकता में है। 18 दिन के अनशन के बाद शरीर कमजोर होने के कारण उन्हें आराम की जरूरत है। परिवार ने उम्मीद जताई है कि सरकार और संबंधित विभाग प्रभावित लोगों की समस्याओं पर सकारात्मक कदम उठाएंगे।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर बड़े विकास प्रोजेक्ट और उनसे प्रभावित होने वाले लोगों के अधिकारों के बीच संतुलन की बहस को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि परियोजना प्रभावित लोगों की मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार की ओर से आगे क्या पहल की जाती है।





