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पन्ना टाइगर रिजर्व में रिसॉर्ट को होम स्टे बताने का आरोप

मध्य प्रदेश: पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। टाइगर रिजर्व के ईको सेंसिटिव जोन में बने एक आलीशान रिसॉर्ट को कथित तौर पर होम स्टे बताकर पेश किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े जानकारों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन कर बड़े व्यावसायिक निर्माणों को होम स्टे योजना की आड़ में अनुमति दी गई है, तो इससे योजना के वास्तविक उद्देश्य को नुकसान पहुंचेगा।
जानकारी के अनुसार, छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव में पन्ना टाइगर रिजर्व के ईको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत करीब पांच एकड़ भूमि पर एक भव्य निर्माण किया गया है। इस निर्माण को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि इसे रिसॉर्ट के रूप में विकसित किया गया है, लेकिन विभिन्न स्तरों पर इसे होम स्टे अथवा निजी आवास बताने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निर्माण का स्वरूप सामान्य होम स्टे की अवधारणा से बिल्कुल अलग है।
होम स्टे योजना का उद्देश्य ग्रामीण और स्थानीय परिवारों को रोजगार से जोड़ना है। इसके तहत ग्रामीण अपने घर या सीमित संसाधनों वाले भवनों में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था करते हैं। इससे पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को समझने का अवसर मिलता है, वहीं ग्रामीण परिवारों को आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। लेकिन आरोप है कि राजगढ़ गांव में बनाया गया निर्माण इस उद्देश्य से मेल नहीं खाता।
स्थानीय लोगों के अनुसार, विवादित स्थल पर कई बड़े-बड़े कॉटेज बनाए गए हैं। ये कॉटेज एक-दूसरे से काफी दूरी पर स्थित हैं और यहां आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इतना बड़ा क्षेत्रफल और इस तरह का निर्माण सामान्य होम स्टे की श्रेणी में नहीं आता। उनका दावा है कि यह एक व्यावसायिक रिसॉर्ट जैसा दिखाई देता है।
मामले में यह भी चर्चा है कि निर्माण से जुड़े लोगों की ओर से इसे निजी आवास बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि भविष्य में सेवानिवृत्ति के बाद यहां रहने की योजना है। हालांकि स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि यह वास्तव में निजी आवास होता तो परिवार के रहने के लिए एक ही भवन में आवश्यक कमरे बनाए जाते। कई एकड़ क्षेत्र में अलग-अलग कॉटेज बनाना कई सवाल खड़े करता है।
इस मामले में वन भूमि से जुड़े नियमों के उल्लंघन और संभावित अतिक्रमण की भी शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता अजय दुबे ने आरोप लगाया है कि यदि होम स्टे योजना का इस्तेमाल बड़े व्यावसायिक निर्माणों को वैध दिखाने के लिए किया गया है तो यह योजना के वास्तविक लाभार्थियों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने संबंधित विभागों से पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के ईको सेंसिटिव जोन में निर्माण कार्यों को लेकर विशेष नियम बनाए गए हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी तरह के निर्माण से पहले पर्यावरणीय प्रभाव और वन्यजीवों पर पड़ने वाले असर का ध्यान रखना जरूरी होता है।
फिलहाल इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों को निर्माण की अनुमति, भूमि उपयोग, निर्माण की प्रकृति और होम स्टे योजना के नियमों की जांच करनी चाहिए। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण नियमों के अनुरूप है या नहीं। वहीं, पन्ना जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में पारदर्शी कार्रवाई की मांग लगातार बढ़ रही है।





