- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- AIIMS भोपाल ने...
AIIMS भोपाल ने फार्मासिस्टों को एंटीबायोटिक के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए किया जागरूक

भोपाल: एंटीबायोटिक दवाओं के गलत और अत्यधिक इस्तेमाल से बढ़ रही एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की समस्या से निपटने के लिए AIIMS भोपाल ने एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। जन-स्वास्थ्य की सुरक्षा में एंटीबायोटिक दवाओं के जिम्मेदार इस्तेमाल के महत्व को देखते हुए यह कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम भोपाल स्थित नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) कार्यालय में फार्मासिस्टों के लिए आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का विषय था — “स्मार्ट यूज़, सेफ फ्यूचर – एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस अवेयरनेस फॉर फार्मासिस्ट्स”। इसका उद्देश्य फार्मासिस्टों को एंटीबायोटिक दवाओं के सही उपयोग, उनके दुरुपयोग से होने वाले खतरों और AMR को नियंत्रित करने में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी देना था।
यह कार्यक्रम नेशनल हेल्थ मिशन (NHM), मध्य प्रदेश और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA), मध्य प्रदेश के सहयोग से आयोजित किया गया।
एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल से बढ़ रहा खतरा
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि एंटीबायोटिक दवाएं गंभीर संक्रमणों के इलाज में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन इनका अनावश्यक या गलत तरीके से इस्तेमाल भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि जब एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा उपयोग किया जाता है, तो बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकते हैं। इसके कारण ऐसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जिनमें सामान्य संक्रमणों का इलाज भी मुश्किल हो जाए।
उन्होंने बताया कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस आज दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। इसे रोकने के लिए डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और आम लोगों की संयुक्त भूमिका जरूरी है।
फार्मासिस्टों की भूमिका पर जोर
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे सीधे तौर पर मरीजों के संपर्क में रहते हैं और दवाओं के इस्तेमाल को लेकर लोगों को सही सलाह दे सकते हैं।
उन्होंने फार्मासिस्टों से अपील की कि वे बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेने से लोगों को रोकने में सहयोग करें। साथ ही मरीजों को दवा की सही मात्रा, निर्धारित अवधि तक सेवन और डॉक्टर की सलाह का पालन करने के लिए प्रेरित करें।
विशेषज्ञों ने कहा कि कई बार मरीज कुछ दिनों में आराम महसूस होने पर एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा नहीं करते, जिससे बैक्टीरिया के मजबूत होने का खतरा बढ़ जाता है।
जागरूकता और प्रशिक्षण की जरूरत
कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा की गई कि AMR को नियंत्रित करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
फार्मासिस्टों को बताया गया कि वे लोगों को यह समझाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि हर बीमारी के इलाज के लिए एंटीबायोटिक जरूरी नहीं होती। वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं होतीं और उनका गलत इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक स्टूवर्डशिप यानी एंटीबायोटिक दवाओं के समझदारी भरे उपयोग की अवधारणा पर भी जानकारी दी।
स्वास्थ्य संस्थानों के बीच सहयोग
AIIMS भोपाल, NHM मध्य प्रदेश और FDA मध्य प्रदेश के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।
अधिकारियों ने कहा कि AMR जैसी चुनौती से निपटने के लिए केवल अस्पतालों तक सीमित प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
कार्यक्रम के माध्यम से फार्मासिस्टों को एंटीबायोटिक उपयोग से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं, मरीजों को सलाह देने के तरीकों और संक्रमण नियंत्रण के उपायों के बारे में जानकारी दी गई।
सुरक्षित भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाएं मानव स्वास्थ्य के लिए जीवन रक्षक साबित हुई हैं, लेकिन अगर इनका गलत इस्तेमाल जारी रहा तो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रभावी इलाज के विकल्प कम हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदार तरीके से एंटीबायोटिक का उपयोग करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और आम नागरिकों के सहयोग से ही AMR की बढ़ती समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
AIIMS भोपाल की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों को जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संस्थान ने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के खिलाफ अभियान जारी रखने की बात कही।





