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आपदा प्रबंधन को लेकर बड़ा कदम, महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए बने नए SOP

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश में आपदा राहत और बचाव कार्यों को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। सोमवार को राज्य में आयोजित एक राज्य-स्तरीय परामर्श (कंसल्टेशन) के दौरान महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए विशेष स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किए गए हैं।
यह पहल मध्य प्रदेश स्टेट डिजास्टर इमरजेंसी रिस्पॉन्स फोर्स (SDERF) और UN Women के संयुक्त सहयोग से की गई है। इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न संभागों और जिलों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ उत्तराखंड, बिहार और भारतीय सेना के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस दौरान आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस कंसल्टेशन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी आपदा की स्थिति में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य कमजोर वर्गों को समय पर और उचित सहायता मिल सके। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आपदा प्रबंधन के दौरान अक्सर इन वर्गों की जरूरतों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल पाती, जिससे उनकी कठिनाइयां बढ़ जाती हैं।
नए तैयार किए गए SOP में यह स्पष्ट किया गया है कि राहत और बचाव कार्यों के दौरान महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, अस्थायी आश्रय, भोजन और मनोवैज्ञानिक सहायता को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही राहत शिविरों में सुरक्षित और समावेशी वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी शामिल किए गए हैं।
इस अवसर पर SDERF और UN Women के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य आपदा प्रबंधन में लैंगिक संवेदनशीलता को मजबूत करना है। इस सहयोग के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम, क्षमता निर्माण और जागरूकता अभियानों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
राज्य के अधिकारियों ने बताया कि इस पहल से आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाया जा सकेगा। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले कमजोर वर्गों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आपदा के समय सबसे अधिक प्रभावित होने वाले समूहों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल होते हैं। ऐसे में उनके लिए अलग और विशेष दिशा-निर्देश तैयार करना एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है।
कार्यक्रम में मौजूद प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि आपदा प्रबंधन केवल त्वरित राहत तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें मानव संवेदनशीलता और सामाजिक सुरक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि इन SOPs को जल्द ही सभी जिलों में लागू किया जाएगा और संबंधित एजेंसियों को इसके अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि आपदा के समय त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।





