मध्य प्रदेश

गुरु पूर्णिमा पर इंदौर के शिक्षण संस्थानों में दिखा परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम

Kavita2
30 July 2026 11:31 AM IST
गुरु पूर्णिमा पर इंदौर के शिक्षण संस्थानों में दिखा परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम
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इंदौर। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इंदौर के शिक्षण संस्थानों में श्रद्धा, सम्मान और ज्ञान का अनूठा माहौल देखने को मिला। शहर के विभिन्न कॉलेजों में आयोजित कार्यक्रमों में दिल को छू लेने वाले भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रेरणादायक व्याख्यान और ज्ञानवर्धक क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन आयोजनों में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए छात्रों को यह संदेश दिया गया कि एक सच्चा गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि जीवन के मूल्यों, सोच और व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

गुरु पूर्णिमा के मौके पर शहर के शिक्षण संस्थानों ने भारतीय परंपरा और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के बीच संतुलन को प्रदर्शित किया। कार्यक्रमों में शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ छात्रों को गुरु के महत्व और उनके मार्गदर्शन की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।

गवर्नमेंट होल्कर साइंस कॉलेज में गुरु पूर्णिमा का विशेष आयोजन किया गया। कॉलेज की इंडियन नॉलेज ट्रेडिशन सेल की ओर से आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘शिक्षक से गुरु तक’ रखा गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने शिक्षक और गुरु के बीच अंतर पर प्रकाश डाला और बताया कि गुरु का संबंध केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों को जीवन की दिशा भी प्रदान करता है।

कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्यों के सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया। संस्थान के विकास और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले पूर्व प्राचार्यों को सम्मानित किया गया। इनमें डॉ. राम श्रीवास्तव, डॉ. नरेंद्र धाकड़, डॉ. एस.एल. गर्ग और डॉ. रूपलेखा व्यास शामिल रहे। कॉलेज परिवार ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि अनुभवी शिक्षकों और प्राचार्यों का मार्गदर्शन संस्थानों की मजबूत नींव तैयार करता है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु के स्थान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को हमेशा विशेष सम्मान दिया गया है। गुरु केवल विषय का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों को सही निर्णय लेने, अनुशासन बनाए रखने और समाज के प्रति जिम्मेदारी समझने की प्रेरणा देता है।

शहर के अन्य कॉलेजों में भी गुरु पूर्णिमा को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहीं छात्रों ने अपने शिक्षकों का सम्मान किया तो कहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। भजनों और गीतों के माध्यम से विद्यार्थियों ने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।

कई संस्थानों में छात्रों के लिए क्विज प्रतियोगिताएं और ज्ञान आधारित गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य छात्रों में भारतीय संस्कृति, शिक्षा परंपरा और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ इन गतिविधियों में भाग लिया।

शिक्षकों ने अपने संबोधन में छात्रों से कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। सही मार्गदर्शन, सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कार भी उतने ही जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि गुरु का मार्गदर्शन विद्यार्थी को चुनौतियों का सामना करने और बेहतर इंसान बनने में मदद करता है।

कार्यक्रमों में छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि शिक्षकों का मार्गदर्शन उनके शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं।

शिक्षण संस्थानों के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। आधुनिक शिक्षा के दौर में भी गुरु-शिष्य संबंध की प्रासंगिकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि तकनीक और नई शिक्षा पद्धतियों के बावजूद शिक्षक की भूमिका कभी समाप्त नहीं हो सकती।

इंदौर में आयोजित गुरु पूर्णिमा कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों का विकास भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शहर के कॉलेजों में यही भावना प्रमुख रूप से दिखाई दी।

कुल मिलाकर, इंदौर के शिक्षण संस्थानों में मनाई गई गुरु पूर्णिमा परंपरा और आधुनिक शिक्षा का सुंदर मेल साबित हुई। कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों के योगदान को सम्मान मिला और छात्रों को गुरु के महत्व को समझने का अवसर मिला।

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