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उज्जैन में 945 करोड़ की लागत से बनेगा 5.3 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ब्रिज

उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक शहर उज्जैन में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ी परियोजना की शुरुआत हो गई है। शहर में जल्द ही 5.3 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ब्रिज बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन किया। इस एलिवेटेड ब्रिज के निर्माण पर 945 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी।
यह परियोजना उज्जैन शहर के लिए यातायात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और शहर में बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इससे न केवल शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले मार्गों पर भी यातायात का दबाव कम होगा।
उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है। यहां स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा काल भैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर भी सालभर भक्तों की आवाजाही बनी रहती है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर शहर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, जिससे सड़कों पर जाम की स्थिति बन जाती है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन का तेजी से विकास हो रहा है और आने वाले समय में यहां श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि शहर की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। एलिवेटेड ब्रिज इसी विकास योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उज्जैन को बेहतर यातायात सुविधा प्रदान करेगा।
प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज पुराने शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने में मदद करेगा। वर्तमान में शहर के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है। खासकर महाकाल मंदिर क्षेत्र और आसपास के इलाकों में भीड़ के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा और मुख्य सड़कों पर जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।
सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की यातायात व्यवस्था को मजबूत करना प्रशासन की बड़ी प्राथमिकता है। एलिवेटेड कॉरिडोर को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, ताकि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भी यातायात सुचारू रूप से संचालित हो सके।
अधिकारियों के अनुसार, एलिवेटेड ब्रिज आधुनिक तकनीक के आधार पर बनाया जाएगा। इसके निर्माण से शहर के महत्वपूर्ण हिस्सों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। परियोजना पूरी होने के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी आवागमन में सुविधा होगी।
उज्जैन में पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महाकाल लोक के निर्माण के बाद शहर में पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों में तेजी आई है। इसके कारण शहर में आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए सड़क, पार्किंग, परिवहन और अन्य सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है।
एलिवेटेड ब्रिज परियोजना को शहर के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे जहां लोगों को जाम से राहत मिलेगी, वहीं शहर की सुंदरता और आधुनिक यातायात व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि उज्जैन को एक बेहतर धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
स्थानीय लोगों ने भी इस परियोजना का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से शहर में यातायात दबाव बड़ी समस्या बना हुआ था। एलिवेटेड ब्रिज बनने से रोजाना आने-जाने वाले लोगों को राहत मिलेगी और धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान होगा।
आने वाले समय में उज्जैन में कई अन्य विकास परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। एलिवेटेड ब्रिज उनमें से एक प्रमुख परियोजना है, जो शहर की बदलती जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। 945 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली यह परियोजना उज्जैन के विकास और बेहतर यातायात व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।





