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भोपाल: मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में वेस्टर्न भोपाल बाईपास परियोजना को मंजूरी दे दी गई। इस बाईपास को पक्के शोल्डर वाली चार लेन सड़क के रूप में विकसित किया जाएगा।
सरकार ने इस परियोजना के लिए 3,225.51 करोड़ रुपये के संशोधित प्रोजेक्ट अनुमान को मंजूरी दी है। बाईपास की कुल लंबाई 35.16 किलोमीटर होगी।
कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि वेस्टर्न भोपाल बाईपास परियोजना को मंजूरी दे दी गई है।
उन्होंने कहा कि परियोजना की लागत में वृद्धि का मुख्य कारण रतापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अंडरपास का निर्माण करना है।
रतापानी टाइगर रिजर्व में बनेंगे अंडरपास
PWD मंत्री ने बताया कि बाईपास का एक हिस्सा रतापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से होकर गुजरेगा।
वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित रखने के लिए इस क्षेत्र में विशेष अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे सड़क निर्माण के साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का भी ध्यान रखा जाएगा।
इन्हीं अतिरिक्त निर्माण कार्यों के कारण परियोजना की लागत पहले के अनुमान से बढ़ गई है।
चार लेन सड़क से सुधरेगी कनेक्टिविटी
वेस्टर्न भोपाल बाईपास के निर्माण से राजधानी भोपाल के आसपास यातायात दबाव कम होने की उम्मीद है।
चार लेन सड़क बनने से भारी वाहनों और लंबी दूरी के यातायात को शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से बाहर निकलने में सुविधा मिलेगी।
इससे शहर के अंदर ट्रैफिक जाम की समस्या कम हो सकती है।
आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
बाईपास के निर्माण से औद्योगिक क्षेत्रों, व्यापारिक गतिविधियों और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
इससे लोगों को यात्रा में कम समय लगेगा और परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
पर्यावरण संरक्षण का रखा जाएगा ध्यान
रतापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र को देखते हुए परियोजना में पर्यावरणीय पहलुओं को प्राथमिकता दी गई है।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अंडरपास और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की जाएंगी ताकि सड़क निर्माण से प्राकृतिक क्षेत्र पर कम से कम प्रभाव पड़े।
सरकार का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
भोपाल के लिए अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
वेस्टर्न भोपाल बाईपास को राजधानी के लिए महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है।
भोपाल शहर के विस्तार और बढ़ते यातायात को देखते हुए इस तरह की सड़क परियोजनाओं की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
बाईपास बनने के बाद शहर के बाहरी क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा।
भारी वाहनों का दबाव होगा कम
राजधानी में आने-जाने वाले भारी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे शहर के अंदर यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
नया बाईपास बनने के बाद ऐसे वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, जिससे मुख्य शहर की सड़कों पर दबाव कम होगा।
परियोजना पर जल्द शुरू होगा काम
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
निर्माण से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक कार्य पूरे किए जाएंगे। इसके बाद सड़क निर्माण का काम शुरू होने की संभावना है।
सरकार का फोकस बेहतर सड़क नेटवर्क पर
मध्य प्रदेश सरकार राज्य में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है।
वेस्टर्न भोपाल बाईपास परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
35.16 किलोमीटर लंबी यह चार लेन सड़क न केवल यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगी, बल्कि राजधानी क्षेत्र के विकास को भी नई गति दे सकती है।





