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पति को पीठ पर लादकर कलेक्टर के पास पहुंची 60 साल की महिला, मांगी ट्राइसाइकिल

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी योजनाओं और दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 60 वर्षीय एक महिला अपने दिव्यांग पति को पीठ पर लादकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंच गई। महिला की मांग थी कि उसके पति को चलने-फिरने के लिए इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें हर जगह ले जाने के लिए अपनी पीठ का सहारा न लेना पड़े। बताया जा रहा है कि पति को करीब नौ साल पहले पैरालिसिस का दौरा पड़ा था। इसके बाद उनकी चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित हो गई और इलाज के दौरान उनका एक पैर भी काटना पड़ा। तभी से पत्नी उनकी देखभाल कर रही है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
MP | Offbeat | A 60-YO woman carrying her husband on the back reached Burhanpur (MP) DM’s office seeking an electric tricycle for him. After her husband lost his legs years ago following a paralysis attack, she has been carrying on her back for years. Things women do for love. They have stronger willpower than men. ❣️ https://t.co/nxNzXddwMp
— काश/if Kakvi (@KashifKakvi) October 31, 2026
पति को पीठ पर उठाकर पहुंची कलेक्टर की जनसुनवाई में
मामला बुरहानपुर जिला मुख्यालय की महाजन कॉलोनी का है। यहां रहने वाली बिंदुबाई अपने पति दयाशंकर को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। पति को चलने-फिरने में परेशानी होने के कारण महिला ने उन्हें अपनी पीठ पर उठाया और अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखने पहुंच गई।
कार्यालय परिसर में जब लोगों ने 60 वर्षीय महिला को अपने पति को पीठ पर लादकर आते देखा तो हर कोई हैरान रह गया। महिला का यह कदम किसी प्रदर्शन या राजनीतिक विरोध का हिस्सा नहीं था, बल्कि अपने दिव्यांग पति के लिए जरूरी सुविधा हासिल करने की कोशिश थी।
बिंदुबाई ने कलेक्टर विवेक कुमार के सामने अपनी परेशानी रखी। उन्होंने बताया कि पति को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए उन्हें लंबे समय से खुद ही सहारा बनना पड़ता है। परिवार के पास परिवहन का कोई ऐसा साधन नहीं है, जिससे पति आसानी से कहीं आ-जा सकें।
नौ साल पहले पैरालिसिस ने बदल दी जिंदगी
जानकारी के अनुसार, बिंदुबाई के पति दयाशंकर करीब नौ साल पहले पैरालिसिस के शिकार हो गए थे। बीमारी के बाद उनकी शारीरिक स्थिति लगातार प्रभावित हुई। इलाज के दौरान उनका एक पैर भी काटना पड़ा। इसके बाद उनके लिए सामान्य तरीके से चलना-फिरना संभव नहीं रह गया।
पति की देखभाल की जिम्मेदारी बिंदुबाई ने अपने ऊपर ले ली। जब भी दयाशंकर को किसी काम से बाहर जाना होता है या उन्हें किसी स्थान पर पहुंचाना होता है, तो पत्नी उन्हें अपनी पीठ पर उठाकर ले जाती हैं।
यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से जारी है। उम्र बढ़ने के साथ बिंदुबाई के लिए पति को उठाकर ले जाना भी शारीरिक रूप से कठिन होता जा रहा है। इसके बावजूद वह उनकी देखभाल कर रही हैं।
ट्राइसाइकिल के साथ पेंशन की भी मांग
बिंदुबाई ने प्रशासन से केवल इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल ही नहीं, बल्कि पति के लिए आर्थिक सहायता और पेंशन उपलब्ध कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि पति की दिव्यांगता के कारण परिवार को रोजमर्रा के कामों में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
एक इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल मिलने से दयाशंकर को आने-जाने में स्वतंत्रता मिल सकती है। इससे बिंदुबाई को भी बार-बार पति को पीठ पर उठाकर ले जाने की मजबूरी से राहत मिलेगी।
महिला के अनुसार, वह कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा चुकी हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। बताया जाता है कि वह अपनी फरियाद लेकर पहले भी कलेक्टर कार्यालय पहुंची थीं, लेकिन उस दिन संबंधित अधिकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने दोबारा जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी बात रखी।
कई साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने का आरोप
बिंदुबाई की परेशानी केवल पति को उठाकर ले जाने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि पति की दिव्यांगता के बाद से उन्हें कई सरकारी सुविधाओं की जरूरत महसूस हुई, लेकिन ट्राइसाइकिल और पेंशन के लिए बार-बार आवेदन और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद राहत नहीं मिली।
उनकी मांग है कि प्रशासन उनके पति की स्थिति को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराए। साथ ही परिवार को मिलने वाली पात्र पेंशन का लाभ भी सुनिश्चित किया जाए।
इस मामले में कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में दिव्यांग कल्याण विभाग की ओर से पहले व्हीलचेयर उपलब्ध कराए जाने का भी उल्लेख है। हालांकि, परिवार की मौजूदा जरूरत इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल और नियमित आर्थिक सहायता से जुड़ी है।
कलेक्टर कार्यालय पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोग महिला के संघर्ष की चर्चा कर रहे हैं। वीडियो में महिला अपने पति को पीठ पर उठाकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचती दिखाई दे रही हैं।
लोगों का कहना है कि दिव्यांग व्यक्ति को ट्राइसाइकिल और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं प्राप्त करने के लिए इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़नी चाहिए। वहीं, कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बिंदुबाई की समस्या का जल्द समाधान किया जाए।
यह घटना केवल एक महिला के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि उन परिवारों की मुश्किलों की ओर भी ध्यान दिलाती है, जिनके घर में कोई सदस्य चलने-फिरने में असमर्थ है और जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
दिव्यांगों के लिए सरकारी सुविधाओं तक पहुंच का सवाल
सरकार की ओर से दिव्यांग नागरिकों के लिए ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, पेंशन और अन्य सहायता योजनाएं संचालित की जाती हैं। इनका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी दैनिक जिंदगी को आसान करना है।
लेकिन बिंदुबाई का मामला यह सवाल खड़ा करता है कि पात्र लाभार्थियों तक इन योजनाओं का लाभ समय पर क्यों नहीं पहुंच पाता। कई बार दस्तावेजों की कमी, पात्रता सत्यापन और विभागीय प्रक्रिया के कारण जरूरतमंद परिवारों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों तक पहुंचना भी कठिन होता है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जरूरतमंद लोगों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जाए।
अब प्रशासन से राहत की उम्मीद
बिंदुबाई ने कलेक्टर विवेक कुमार के सामने अपनी मांग रखते हुए पति के लिए इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल और पेंशन की सुविधा उपलब्ध कराने की अपील की है। इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान भी इस परिवार की परेशानी की ओर गया है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन दयाशंकर को इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने और पेंशन संबंधी मांग पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।
करीब नौ साल से पति की देखभाल कर रही 60 वर्षीय बिंदुबाई की यह तस्वीर एक बड़ा सवाल छोड़ गई है। आखिर एक दिव्यांग व्यक्ति को आने-जाने की सुविधा और आर्थिक सहायता पाने के लिए अपने परिवार को कितनी बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे?





