मध्य प्रदेश

गरबा के लकी ड्रॉ में 6 साल के बच्चे की चमकी किस्मत, 50 लाख की फॉर्च्यूनर जीती

Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 5:43 PM IST
गरबा के लकी ड्रॉ में 6 साल के बच्चे की चमकी किस्मत, 50 लाख की फॉर्च्यूनर जीती
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बुरहानपुर। किस्मत कब और किस रूप में किसी का दरवाजा खटखटा दे, यह कोई नहीं जानता। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से जुड़ी एक ऐसी ही दिलचस्प घटना ने लोगों का ध्यान खींचा था। यहां एक साधारण परिवार का वर्षों पुराना लग्जरी कार खरीदने का सपना महज 201 रुपये के कूपन से पूरा हो गया। नवरात्रि के दौरान अभापुरी क्षेत्र में आयोजित गरबा उत्सव में चार साल के बच्चे के नाम पर खरीदे गए कूपन का लकी ड्रॉ निकला, जिसमें परिवार को करीब 53 लाख रुपये कीमत की टोयोटा फॉर्च्यूनर एसयूवी मिल गई। इस अप्रत्याशित जीत से पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। यह घटना अक्टूबर 2025 में सामने आई थी, इसलिए इसे हाल की नई घटना के बजाय उस समय की चर्चित खबर के रूप में देखा जाना चाहिए।
201 रुपये के कूपन ने दिलाई लाखों की कार
बुरहानपुर के शिलामपुर क्षेत्र की रहने वाली किरण रायकवार अपने परिवार के साथ अभापुरी में आयोजित गरबा उत्सव में शामिल होने पहुंची थीं। यह आयोजन सरकार धाम की ओर से किया गया था। उत्सव में गरबा और दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पुरस्कारों के लिए लकी ड्रॉ भी रखा गया था।
इसी दौरान किरण ने अपने चार साल के पोते मेधांश के नाम पर 201 रुपये का एक कूपन खरीदा। आमतौर पर ऐसे आयोजनों में लोग मनोरंजन और उत्साह के लिए कूपन लेते हैं, लेकिन इस बार यह छोटा-सा कूपन परिवार के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आया।अगले दिन जब लकी ड्रॉ का परिणाम सामने आया, तो मेधांश के नाम वाला कूपन विजेता घोषित हुआ। पुरस्कार में करीब 53 लाख रुपये कीमत की टोयोटा फॉर्च्यूनर कार मिलने की जानकारी सामने आई।
पोते के नाम पर खरीदा था कूपन
किरण रायकवार के लिए यह जीत खास इसलिए भी थी, क्योंकि उन्होंने कूपन अपने पोते के नाम पर खरीदा था। परिवार के मुताबिक, मेधांश को बचपन से ही कारों के खिलौने बहुत पसंद हैं। वह अक्सर खिलौना कारों से खेलता था और परिवार से कार से जुड़ी चीजें मांगता था।
किसी ने नहीं सोचा था कि जिस बच्चे को खिलौना कारों का शौक है, उसके नाम पर खरीदा गया कूपन एक दिन उसे असली लग्जरी कार का विजेता बना देगा।जब परिवार को जीत की जानकारी मिली, तो घर में खुशी का माहौल बन गया। आसपास के लोग भी इस अनोखी जीत की चर्चा करने लगे। बच्चे को लोग प्यार से 'लकी बॉय' कहकर बुलाने लगे।
साधारण परिवार के लिए किसी सपने से कम नहीं
करीब 53 लाख रुपये की कार किसी भी सामान्य परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। इतनी महंगी एसयूवी खरीदना हर किसी के बजट में नहीं होता। ऐसे में सिर्फ 201 रुपये के कूपन से फॉर्च्यूनर जीतने की खबर ने लोगों को हैरान कर दिया।
टोयोटा फॉर्च्यूनर भारत में प्रीमियम एसयूवी सेगमेंट की लोकप्रिय गाड़ियों में शामिल है। इसकी कीमत वेरिएंट और अन्य सुविधाओं के अनुसार अलग-अलग होती है। बड़ी बॉडी, दमदार इंजन और मजबूत सड़क उपस्थिति के कारण इसे पसंद किया जाता है।परिवार के लिए यह जीत केवल महंगी कार हासिल करने का मामला नहीं था, बल्कि वर्षों से देखे जा रहे एक सपने के अचानक सच होने जैसा अनुभव था।
कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिलनी थी कार
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुरस्कार जीतने के बाद कार से संबंधित कागजी प्रक्रिया पूरी की जानी थी। इसके बाद वाहन परिवार को सौंपा जाना था।ऐसे लकी ड्रॉ में विजेता की पहचान, कूपन की पुष्टि, पुरस्कार से जुड़े दस्तावेज और वाहन के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में कार की चाबी सौंपे जाने और वाहन के अंतिम हस्तांतरण की स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट रूप से नहीं मिलती। इसलिए यह कहना उचित होगा कि परिवार को कार जीतने की घोषणा हुई थी और आगे की प्रक्रिया पूरी की जानी थी।
गरबा उत्सव में लकी ड्रॉ बना आकर्षण
नवरात्रि के दौरान मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में धार्मिक उत्साह के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और मनोरंजन के कार्यक्रम भी होते हैं।
अभापुरी के गरबा उत्सव में भी लकी ड्रॉ ने लोगों की उत्सुकता बढ़ाई थी। अलग-अलग लोग कूपन खरीदकर पुरस्कार जीतने की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन इस बार सबसे बड़ा पुरस्कार मेधांश के नाम रहा।इस घटना ने स्थानीय स्तर पर उत्सव की चर्चा को और बढ़ा दिया और सोशल मीडिया पर भी बच्चे की किस्मत को लेकर टिप्पणियां की गईं।
क्या लकी ड्रॉ से सचमुच बदल जाती है किस्मत?
लकी ड्रॉ में पुरस्कार मिलना संयोग पर निर्भर करता है। किसी कूपन के विजेता बनने की गारंटी नहीं होती। इस घटना में परिवार को बड़ी कार मिली, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि हर कूपन खरीदने वाले को लाभ होगा।किसी भी कूपन या पुरस्कार योजना में भाग लेने से पहले आयोजन की विश्वसनीयता, नियम और पुरस्कार से संबंधित शर्तों को समझना जरूरी है।
बुरहानपुर की इस कहानी ने क्यों खींचा ध्यान?
मेधांश के नाम पर खरीदे गए छोटे-से कूपन से लाखों रुपये की कार मिलने की खबर इसलिए चर्चा में रही, क्योंकि इसमें एक साधारण परिवार की खुशी और अप्रत्याशित जीत की कहानी थी।किरण रायकवार ने पोते के नाम पर कूपन खरीदा था, और उसी कूपन के विजेता बनने से परिवार का सपना पूरा होने की उम्मीद जगी।
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