मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में 6,637 करोड़ की 23 शहरी परियोजनाएं धीमी, मंजूरी और जमीन विवाद बने बड़ी बाधा

Kavita2
17 Sept 2026 11:53 AM IST
मध्य प्रदेश में 6,637 करोड़ की 23 शहरी परियोजनाएं धीमी, मंजूरी और जमीन विवाद बने बड़ी बाधा
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भोपाल। मध्य प्रदेश में शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं की रफ्तार धीमी हो गई है। शहरी प्रशासन और विकास विभाग (UADD) ने 13 शहरी स्थानीय निकायों में चल रही 23 महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी के पीछे मंजूरी मिलने में देरी और जमीन से जुड़े मुद्दों को प्रमुख कारण बताया है।

इन परियोजनाओं की कुल लागत 6,637.49 करोड़ रुपये बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की समीक्षा में सामने आया कि कई शहरों में पानी की सप्लाई और सीवरेज से जुड़े बड़े काम तय समय सीमा के अनुसार आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

कई बड़े शहरों की परियोजनाएं प्रभावित

UADD अधिकारियों के मुताबिक, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, खंडवा, उज्जैन सहित कई शहरों में शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहे हैं। इनमें पेयजल आपूर्ति, सीवरेज सिस्टम और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों में बढ़ती आबादी के हिसाब से नागरिक सुविधाओं को मजबूत करना है, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों के चलते काम की गति प्रभावित हो रही है।

मंजूरी मिलने में देरी बनी बड़ी चुनौती

अधिकारियों ने बताया कि कई परियोजनाओं के लिए अलग-अलग विभागों से अनुमति मिलने में समय लग रहा है। खासकर रेलवे और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से मिलने वाली मंजूरी में देरी के कारण कई कार्य प्रभावित हुए हैं।

जहां परियोजनाओं के लिए रेलवे क्षेत्र या हाईवे से जुड़े हिस्सों में काम किया जाना है, वहां संबंधित विभागों की अनुमति जरूरी होती है। इन प्रक्रियाओं में लगने वाले अतिरिक्त समय का असर निर्माण कार्यों की समयसीमा पर पड़ रहा है।

वन और पर्यावरण मंजूरी में भी देरी

अधिकारियों ने बताया कि कुछ परियोजनाओं में वन और पर्यावरण संबंधी मंजूरी की आवश्यकता होती है। इन स्वीकृतियों में देरी के कारण भी काम आगे बढ़ाने में परेशानी आ रही है।

बड़े स्तर की शहरी परियोजनाओं में कई तरह की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। ऐसे में किसी एक स्तर पर देरी होने से पूरी परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।

जमीन उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या

UADD की समीक्षा में जमीन की उपलब्धता को भी प्रमुख बाधा के रूप में सामने रखा गया है। कई परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन समय पर उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका या उसकी गति धीमी रही।

अधिकारियों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में जमीन से जुड़े मामले अधिक जटिल होते हैं। जमीन अधिग्रहण, स्थान चयन और अन्य प्रक्रियाओं में समय लगने के कारण परियोजनाओं पर असर पड़ता है।

डिजाइन और ठेकेदारों से जुड़ी समस्याएं

परियोजनाओं में देरी के अन्य कारणों में डिजाइन से जुड़ी समस्याएं और ठेकेदारों की धीमी शुरुआत भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में डिजाइन में बदलाव या तकनीकी दिक्कतों के कारण काम प्रभावित हुआ।

इसके अलावा कुछ ठेकेदारों द्वारा समय पर काम शुरू नहीं करने की स्थिति भी सामने आई है। इससे परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो पाई।

अधिकारियों ने की समीक्षा

UADD ने 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की है। इस दौरान प्रत्येक परियोजना की प्रगति, बाधाओं और समाधान को लेकर चर्चा की गई।

अधिकारियों का कहना है कि जिन कारणों से काम प्रभावित हो रहा है, उन्हें दूर करने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

शहरी विकास योजनाओं पर असर

मध्य प्रदेश के शहरों में बढ़ती आबादी के कारण पानी, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जल आपूर्ति और सीवरेज जैसी योजनाओं में देरी का सीधा असर आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ सकता है। इसलिए विभाग अब लंबित मंजूरियों और अन्य बाधाओं को जल्द दूर करने की कोशिश कर रहा है।

समय पर पूरा करने की चुनौती

6,637 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली इन परियोजनाओं को तय समय में पूरा करना अब विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। UADD अधिकारियों के अनुसार, संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है।

अब नजर इस बात पर होगी कि मंजूरी, जमीन और तकनीकी समस्याओं को कितनी जल्दी दूर किया जाता है, ताकि शहरों में चल रहे बड़े बुनियादी ढांचे के काम समय पर पूरे हो सकें।

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