मध्य प्रदेश

150 स्वयंसेवक ले रहे आपदा मित्र प्रशिक्षण

Kavita2
2 Sept 2026 12:19 PM IST
150 स्वयंसेवक ले रहे आपदा मित्र प्रशिक्षण
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इंदौर। आपातकालीन परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इंदौर में सामुदायिक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने की पहल आगे बढ़ाई जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को रालामंडल स्थित स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) ट्रेनिंग सेंटर में सात दिवसीय ‘आपदा मित्र’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे सत्र की शुरुआत हुई।

इस बैच के लिए करीब 150 स्वयंसेवकों ने पंजीकरण कराया है। इंदौर जिला प्रशासन का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से कुल 900 ‘आपदा मित्रों’ को प्रशिक्षित करना है। प्रशिक्षण के जरिए ऐसे स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जो किसी आपदा या आपात स्थिति में प्रशासन और राहत-बचाव एजेंसियों के साथ मिलकर स्थानीय स्तर पर तुरंत मदद कर सकें।

रालामंडल SDRF सेंटर में शुरू हुआ प्रशिक्षण

‘आपदा मित्र’ कार्यक्रम का दूसरा सत्र रालामंडल स्थित SDRF ट्रेनिंग सेंटर में शुरू हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन डिविजनल कमांडेंट प्रीति बाला सिंह और ट्रेनिंग चेयरपर्सन डॉ. मधु राजेश तिवारी ने किया।

अधिकारियों ने स्वयंसेवकों को आपदा के समय धैर्य, अनुशासन और टीमवर्क के साथ काम करने की जरूरत बताई। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वयंसेवकों को ऐसी बुनियादी जानकारी और कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे वे जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों तक प्राथमिक स्तर की सहायता पहुंचा सकें।

दूसरे बैच में 150 स्वयंसेवक

दूसरे प्रशिक्षण सत्र में लगभग 150 स्वयंसेवकों ने पंजीकरण कराया है। अलग-अलग क्षेत्रों से शामिल हो रहे ये स्वयंसेवक सात दिनों तक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

प्रशासन का मानना है कि आपदा के समय शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित लोग घटनास्थल तक जल्दी पहुंचकर स्थिति का आकलन करने, लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और राहत एजेंसियों को जरूरी जानकारी देने में मदद कर सकते हैं।

इसी सोच के तहत स्थानीय समुदाय से स्वयंसेवकों को जोड़कर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

900 आपदा मित्र तैयार करने का लक्ष्य

इंदौर जिला प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से कुल 900 ‘आपदा मित्रों’ को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए अलग-अलग बैच में स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बड़ी संख्या में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की उपलब्धता से जिले में आपदा प्रबंधन की स्थानीय क्षमता मजबूत हो सकती है। किसी एक स्थान पर आपदा आने की स्थिति में आसपास के प्रशिक्षित स्वयंसेवक शुरुआती प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

आपदा के समय स्थानीय नेटवर्क होगा मददगार

बाढ़, भूकंप, आग, भवन गिरने, सड़क दुर्घटना या अन्य आपात परिस्थितियों में स्थानीय लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रशिक्षित स्वयंसेवक राहत एजेंसियों के पहुंचने से पहले प्रभावित लोगों की मदद कर सकते हैं।

‘आपदा मित्र’ कार्यक्रम का उद्देश्य इसी स्थानीय क्षमता को व्यवस्थित और प्रशिक्षित स्वरूप देना है। स्वयंसेवकों को आपदा की स्थिति में अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए राहत कार्यों में सहयोग करने के लिए तैयार किया जाता है।

सात दिन तक चलेगा प्रशिक्षण

दूसरे बैच का प्रशिक्षण सात दिनों का है। इस दौरान स्वयंसेवकों को आपदा की स्थिति में आवश्यक बुनियादी प्रक्रियाओं और बचाव कार्यों से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण में केवल सैद्धांतिक जानकारी के बजाय व्यवहारिक समझ विकसित करने पर भी जोर दिया जा सकता है। आपदा के दौरान प्रभावित लोगों से संपर्क, सुरक्षित तरीके से सहायता पहुंचाना और राहत एजेंसियों के साथ समन्वय जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे।

SDRF सेंटर में मिलेगा प्रशिक्षण

रालामंडल स्थित SDRF ट्रेनिंग सेंटर को स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण के लिए चुना गया है। यहां आपदा प्रबंधन और बचाव कार्यों से जुड़े प्रशिक्षण के लिए आवश्यक वातावरण उपलब्ध है।

SDRF जैसी विशेषज्ञ एजेंसी के प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण मिलने से स्वयंसेवकों को आपात स्थितियों की गंभीरता और बचाव कार्यों की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।

प्रशासन और समुदाय के बीच मजबूत होगा समन्वय

आपदा के दौरान प्रशासनिक मशीनरी के साथ स्थानीय समुदाय का सहयोग राहत कार्यों की गति बढ़ा सकता है। प्रशिक्षित स्वयंसेवक स्थानीय लोगों और सरकारी एजेंसियों के बीच संपर्क की कड़ी बन सकते हैं।

उदाहरण के लिए, किसी क्षेत्र में पानी भरने या कोई अन्य आपदा आने पर स्थानीय स्वयंसेवक प्रभावित लोगों की संख्या, जरूरत और स्थिति की जानकारी प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं। इससे राहत सामग्री और बचाव दल को सही स्थान पर भेजने में मदद मिल सकती है।

स्वयंसेवकों की सुरक्षा भी अहम

आपदा राहत में शामिल होने वाले स्वयंसेवकों की अपनी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। बिना प्रशिक्षण के जोखिम वाले स्थानों पर जाना स्वयंसेवक और प्रभावित लोगों दोनों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

इसीलिए ‘आपदा मित्र’ कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को सुरक्षित तरीके से राहत कार्यों में भाग लेने के लिए तैयार करना जरूरी है। उन्हें यह समझना होगा कि कब खुद आगे बढ़ना है और कब विशेषज्ञ बचाव दल के पहुंचने का इंतजार करना है।

आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ाने की कोशिश

इंदौर जैसे बड़े जिले में आपदा प्रबंधन के लिए केवल सरकारी एजेंसियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क किसी भी आपात स्थिति में अतिरिक्त सहायता उपलब्ध करा सकता है।

900 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार होने से आपदा की स्थिति में प्रशासन को स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त मानव संसाधन मिल सकता है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत महत्वपूर्ण

मंगलवार को दूसरे बैच के प्रशिक्षण की शुरुआत के साथ ‘आपदा मित्र’ कार्यक्रम का विस्तार आगे बढ़ा है। पहले बैच के बाद अब 150 नए स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रशासन की योजना चरणों में कुल 900 लोगों को प्रशिक्षित करने की है। इससे जिले में आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित सामुदायिक नेटवर्क तैयार किया जा सकेगा।

आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया पर जोर

आपदा की स्थिति में शुरुआती प्रतिक्रिया जितनी तेज और व्यवस्थित होगी, नुकसान को कम करने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है। प्रशिक्षित स्थानीय स्वयंसेवक इस शुरुआती प्रतिक्रिया में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।

‘आपदा मित्र’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रशासन का प्रयास है कि समुदाय के लोगों को आपदा प्रबंधन की बुनियादी समझ और जरूरी कौशल दिया जाए।

रालामंडल SDRF ट्रेनिंग सेंटर में शुरू हुए सात दिवसीय दूसरे सत्र में करीब 150 स्वयंसेवक प्रशिक्षण ले रहे हैं। डिविजनल कमांडेंट प्रीति बाला सिंह और ट्रेनिंग चेयरपर्सन डॉ. मधु राजेश तिवारी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। आने वाले चरणों में 900 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य पूरा होने पर इंदौर में आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक सामुदायिक स्वयंसेवक नेटवर्क तैयार हो सकेगा।

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