केरल

ओणम से पहले रतालू के दाम बढ़े, 100 रुपये तक पहुंचने की आशंका

Kavita2
9 Aug 2026 3:56 PM IST
ओणम से पहले रतालू के दाम बढ़े, 100 रुपये तक पहुंचने की आशंका
x

पठानमथिट्टा। ओणम के त्योहार से पहले रतालू की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। इस बार जिले में रतालू की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। थोक बाजार में कुछ समय पहले तक रतालू 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 80 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। व्यापारियों का अनुमान है कि ओणम का मुख्य बाजार शुरू होने तक इसकी कीमत 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।

रतालू ओणम के दौरान तैयार किए जाने वाले कई पारंपरिक व्यंजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का असर सीधे त्योहार के दौरान घरों के बजट पर पड़ सकता है। रतालू के साथ अन्य सब्जियों और खाद्य सामग्री की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने पर ओणम के पारंपरिक भोज की लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

कम पैदावार से बढ़े दाम

व्यापारियों के अनुसार रतालू की कीमत बढ़ने का मुख्य कारण इस वर्ष इसकी कम पैदावार है। जिले में रतालू का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में कम हुआ है। मांग बनी रहने और बाजार में आवक कम होने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

ओणम नजदीक आने के साथ रतालू की मांग में और वृद्धि होने की उम्मीद है। ऐसे में यदि बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपज नहीं पहुंची तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। व्यापारियों का अनुमान है कि त्योहार शुरू होने तक खुदरा बाजार में रतालू की कीमत 100 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच सकती है।

किसानों को अब मिल रहा बेहतर दाम

रतालू की बढ़ती कीमतों का एक सकारात्मक पहलू किसानों के लिए सामने आया है। पिछले साल बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने के कारण कई किसानों ने रतालू की खेती से दूरी बना ली थी। उत्पादन लागत के मुकाबले कम दाम मिलने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इसके चलते खेती का क्षेत्र भी प्रभावित हुआ।

हालांकि, इस बार जिन किसानों ने दोबारा रतालू की खेती शुरू की है, उन्हें बेहतर कीमत मिल रही है। बाजार में मौजूदा भाव किसानों के लिए राहत लेकर आया है। किसानों को उम्मीद है कि ओणम के दौरान मांग बढ़ने से उन्हें अपनी उपज का और अच्छा मूल्य मिल सकेगा।

पूर्वी इलाकों में अधिक उत्पादन

जिले के पूर्वी क्षेत्रों में रतालू की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। यहां की जलवायु और मिट्टी को इस फसल के लिए अनुकूल माना जाता है। इन इलाकों से आने वाली उपज जिले के विभिन्न बाजारों में पहुंचती है और ओणम के दौरान इसकी मांग बढ़ जाती है।

इस बार उत्पादन कम होने के कारण पूर्वी इलाकों से बाजारों तक आने वाली रतालू की मात्रा भी प्रभावित हुई है। आवक में कमी और त्योहार की बढ़ती मांग के बीच कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

पिछले साल कीमत न मिलने से किसानों ने छोड़ी खेती

रतालू की वर्तमान कीमतों को पिछले साल की स्थिति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पिछले साल किसानों को उनकी उपज का पर्याप्त मूल्य नहीं मिला था। उत्पादन लागत, मजदूरी और परिवहन खर्च निकालने के बाद किसानों के पास बहुत कम राशि बची थी।

कम लाभ के कारण कई किसानों ने अगले सीजन में रतालू की खेती नहीं करने का फैसला किया। इससे इस वर्ष उत्पादन क्षेत्र प्रभावित हुआ और बाजार में उपलब्धता कम हो गई। अब कम आवक के कारण बाजार में रतालू की कीमत तेजी से बढ़ रही है।

ओणम बाजार पर पड़ेगा असर

ओणम के दौरान परिवारों में पारंपरिक व्यंजन और विशेष भोजन तैयार किए जाते हैं। इसके लिए बड़ी मात्रा में विभिन्न सब्जियों और कंद-मूल की खरीदारी होती है। रतालू भी इन खाद्य पदार्थों में प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

यदि इसकी कीमत 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंचती है तो इसका असर त्योहार के कुल खाद्य बजट पर पड़ सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वाले परिवारों को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

मांग बढ़ने से और तेजी की आशंका

व्यापारियों का कहना है कि अभी ओणम बाजार पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है। जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आएगा, रतालू की मांग बढ़ेगी। यदि उसी अनुपात में बाजार में आवक नहीं बढ़ी तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

थोक बाजार में 65 रुपये से बढ़कर 80 रुपये किलो पहुंची कीमत इस बात का संकेत है कि बाजार पर आपूर्ति की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में किसानों से बाजार तक अधिक उपज पहुंचती है या नहीं, यह कीमतों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

किसानों के लिए बेहतर बाजार का संकेत

एक तरफ रतालू की बढ़ती कीमतें उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण हैं, वहीं किसानों के लिए यह बेहतर बाजार मूल्य का संकेत है। पिछले साल उचित दाम नहीं मिलने के कारण खेती से पीछे हटे किसानों के सामने अब फिर से इस फसल की खेती करने का प्रोत्साहन पैदा हो सकता है।

यदि किसानों को लागत के अनुरूप लाभ मिलता है तो अगले सीजन में रतालू की खेती का क्षेत्र बढ़ सकता है। इससे भविष्य में उत्पादन बढ़ने और बाजार में कीमतों को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।

उपभोक्ताओं की बढ़ेगी परेशानी

ओणम के दौरान रतालू की बढ़ती कीमत से सबसे अधिक असर उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। पहले ही कई जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतें परिवारों के बजट को प्रभावित करती हैं। ऐसे में त्योहार के लिए जरूरी रतालू का महंगा होना अतिरिक्त बोझ बढ़ा सकता है।

फिलहाल थोक बाजार में 80 रुपये प्रति किलो चल रही कीमत को लेकर व्यापारियों का अनुमान है कि ओणम तक यह 100 रुपये तक पहुंच सकती है। अब बाजार की आवक, मांग और किसानों से आने वाली नई खेप पर नजर रहेगी। यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो इस साल ओणम के पारंपरिक भोजन की थाली महंगी होना तय माना जा रहा है।

Next Story